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Adityapur Industrial Area : जिंको इंडिया की प्रोपराइटर को इंसाफ की मांग को लेकर जियाडा के समक्ष धरना, निदेशक बोले- जमीन आवंटन रद्द, ट्रिब्यूनल के फैसले का इंतजार

Adityapur : सिंहभूम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (सिया) के बैनर तले आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों ने झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) के समक्ष धरना दिया. मामला क्षेत्र के मेसर्स जिंको इंडिया कंपनी से जुड़ा हुआ है. उद्यमियों ने कंपनी की प्रोपराइटर सिद्धि सिंह के खिलाफ गलत कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए उन्हें इंसाफ देने की मांग की. साथ ही कहा कि सिद्धि सिंह को इंसाफ मिलने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा. इधर इस मामले पर जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन ने कहा कि जियाडा ने जिंको इंडिया कंपनी का प्लॉट आवंटन रद्द कर दिया है, उन्होंने स्वयं कंपनी को सील करने का आदेश दिया है. 20 जुलाई को कंपनी सील होनेवाली थी, लेकिन प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट की तबीयत खराब हो गयी. उन्होंने एसडीओ से कंपनी को सील करने के लिए नयी तिथि निर्धारित करने का आग्रह किया गया. तारीख तय होते ही कंपनी को सील करने की कार्रवाई की जायेगी. उन्होंने कहा कि चूंकि जियाडा ने प्लॉट का आवंटन ही रद्द कर दिया है. प्रभावित पक्ष उद्योग सचिव के अपीलीय ट्रिब्यूनल में गये हैं. वहां से आदेश आने की प्रतीक्षा की जा रही है, जो भी आदेश आयेगा, जियाडा उसका पालन करेगा.

मामला भ्रष्टाचार का, पीटीपीसी की मान्यता रद्द हो : संतोष सिंह

इस मामले में सिंहभूम इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष सिंह ने कहा कि पूरा मामला भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है. पीटीपीसी की मान्यता रद्द होनी चाहिए और जिंक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की प्रोपराइटर सिद्धि सिंह को उनका अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने जिंको इंडिया के मूल प्रोपराइटर सियाराम अग्रवाल के जीवित होने की बात कही है. उन्होंने बताया कि जब सियाराम अग्रवाल जीवित थे, तो किस आधार पर ज्यादा उन्हें मृत मान लिया गया. क्यों नहीं इसकी जांच करायी गयी. वहीं उन्होंने बिजली विभाग के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया है. कुल मिलाकर उन्होंने जियाडा प्रबंधन को चेतावनी दी है, कि अगर इस मामले में इंसाफ नहीं हुआ तो जियाडा कार्यालय पर तब तक प्रदर्शन होगा, जब तक इस मामले का पटाक्षेप नहीं होता है. साथ ही उन्होंने जियाडा से मांग की है, कि आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में उद्यमियों के साथ हो रहे अत्याचार पर नकेल कसी जाये, अन्यथा इसकी शिकायत सरकार के स्तर पर भी की जाएगी.

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यह है मामला
उद्यमियों का कहना है कि जिंको इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर आवंटित भूखंड पर गैर कानूनी रूप से पीटीपीसी द्वारा कब्जा जमाकर उद्योग संचालित किया जा रहा था. मामला उजागर होने के बाद जियाडा ने विगत 6 जुलाई को जिंको और पीटीपीसी दोनों को गलत ठहराते हुए एसडीओ से कंपनी को सील करने का अनुरोध किया. उसके बाद 11 जुलाई को एसडीओ की ओर से दंडाधिकारी सन्नी तिर्की को उक्त भूखंड पर कब्जा करने और सील करने की जवाबदेही सौंपी गयी. बुधवार को उक्त भूखंड पर सन्नी तिर्की सील करने पहुंचने वाले थे. आदित्यपुर थाने को भी सूचित कर दिया गया, बावजूद इसके वक्त सनी तिर्की ने अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया. सिंहभूम स्मॉल इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारी एवं जिंको इंडिया के प्रोपराइटर सिद्धि सिंह बुधवार को दिन भर जियाडा परिसर में जमे रहे. बावजूद इसके उनके पक्ष में किसी तरह कार्रवाई नहीं होने के बाद आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया.

बिजली विभाग की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
इस दौरान उद्यमियों ने पूरे मामले में बिजली विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाये. उन्होंने कहा कि टेंपरेरी कनेक्शन के माध्यम से आज तक पीटीपीसी बिजली जला रहा है. जिससे साफ प्रतीत होता है, न केवल इस मामले में जमकर भ्रष्टाचार हुआ, बल्कि सरकारी राजस्व का दोहन भी जमकर हुआ है. इसके लिए जिम्मेदार कौन है. इसकी भी जांच होनी चाहिए.

प्लॉट का आवंटन रद्द है, अब सचिव का न्यायाधिकरण ही करेगा फैसला : आरडी

इधर सिया के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन ने कहा कि जिंको इंडिया कंपनी को 1990 में प्लॉट आवंटित हुआ था. मूल आवंटी सियाराम अग्रवाल और आशा अग्रवाल थे. बाद में सिद्धी सिंह के नाम से प्लॉट ट्रांसफर के लिए आवेदन दिया गया. उस समय आशा अग्रवाल ने लिख कर दिया कि उनके जाली हस्ताक्षर कर ट्रांसफर आवेदन दिया गया है. इसके बाद जियाडा की ओर से सिद्धी सिंह को लिखित में दिया गया कि उनके पास ट्रांसफर का कोई कानूनी आधार नहीं है. इसके बाद सिद्धी सिंह ने क्षेत्रीय निदेशक के पास अपील की. अपील सुने जाने के बीच में मूल आवंटी हाईकोर्ट चले गये. हाईकोर्ट ने जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक को आदेश दिया कि वे फ्रेश अपील कर आदेश निकालें. अपील पर जांच के क्रम में जियाडा ने पाया कि वहां कोई तीसरी कंपनी चलायी जा रही है. जो न मूल आवंटी की है और न ट्रांसफर का आवेदन करनेवाले की है. इस पर जियाडा ने प्लॉट का आवंटन रद्द कर दिया. इस पर ही लोगों को आपत्ति है. इस आपत्ति का निबटारा अपील से ही हो सकता है. सभी पार्टियां उद्योग सचिव के न्यायाधिकरण में अपील में गयी हैं. अब लोग कंपनी सील करने का दबाव बना रहे हैं, जबकि सील करने का आदेश मैंने ही दिया है. अपने ही आदेश का अनुपालन नहीं करने का सवाल कहां पैदा होता है. एसडीओ ने 20 जुलाई को कंपनी सील करने की तारीख तय की थी. प्रतियुक्त मजिस्ट्रेट की तबीयत बिगड़ जाने के कारण उन्होंने एसडीओ को सूचित करते हुए नयी तारीख मुकर्रर करने का अनुरोध किया है. एसडीओ से तारीख मिलते ही कंपनी सील करने की कार्रवाई की जायेगी.

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