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बिना किसी जांच के ही होगी डुमरी सीओ पर कार्रवाई, मंत्री ने सदन में कहा चुनाव आयोग से अनुमति का है इंतजार

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Ranchi: सीएम जनसंवाद में एक शिकायत के आधार पर सरकार अब कार्रवाई करना शुरू कर रही है. शुक्रवार को विधानसभा सत्र के दौरान डुमरी के विधायक जगरनाथ महतो ने डुमरी सीओ को लेकर प्रश्न किया कि जनसंवाद में सीएम ने सीओ पर कार्रवाई करने को कहा था, ऐसे में कार्रवाई कब-तक होगी. इसके जवाब में भू-राजस्व मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि 31 जनवरी तक सीओ पर कार्रवाई हो जायेगी. कार्रवाई के संबंध में चुनाव आयोग को पत्र भेजा गया है. चुनाव की अनुमति मिलते ही सीओ को पद से हटा दिया जायेगा. दरअसल सीओ और बीडीओ वोटर आइडी पुनिर्रीक्षण संबंधित कार्यों में जुटे हुए हैं. इसिलए उनपर किसी तरह की कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग से अनुमित आवश्यक है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सिर्फ सीएम जनसंवाद में शिकायत के बाद ही अधिकारियों पर कार्रवाई होगी.

नहीं हुई है किसी तरह की जांच, लेकिन होगी कार्रवाई

मामले को लेकर न्यूज विंग ने गिरिडीह जिला के डीसी से बात करने की कोशिश की. लेकिन पता चला कि गिरिडीह की डीसी नेहा अरोड़ा छुट्टी पर हैं. ऐसे में डीसी के प्रभार में डीडीसी से बात हुई. डीडीसी ने कहा कि कार्रवाई के संबंध में मैं कुछ नहीं कह सकता. यह एक उच्च स्तरीय फैसला है. वहीं जिला स्तार पर किसी जांच को लेकर उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर डुमरी की सीओ के मामले को लेकर किसी तरह की कोई जांच नहीं हुई है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि बिना जांच डुमरी सीओ पर कार्रवाई का आधार क्या सिर्फ जनसुनवाई के दौरान की गयी शिकायत है या फिर इन सब के पीछे कुछ राजनीतिक मंशा है.

कार्मिक को सेवा वापसी करना सरकार का अधिकार, जांच के बाद ही होगी कार्रवाई

मामले पर भू-राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव राम कुमार सिन्हा ने कहा कि अभी फिलहाल कार्मिक को सेवा वापसी की जा रही है. ऐसा सरकार कर सकती है. वहीं विभाग की तरफ से गिरिडीह डीसी को जांच के लिए लिखा गया है. डीसी की जांच प्रतिवेदन के बाद ही किसी तरह की कोई कार्रवाई डुमरी सीओ पर होगी.

ये है पूरा मामला

26 दिसंबर को सूचना भवन में आयोजित सीधी बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने एक मामले में कहा था कि सभी सीओ-बीडीओ भ्रष्ट हैं, जिसके कारण राज्य की छवि खराब हो रही है. लेकिन इसके पीछे एक खास वजह बतायी जा रही है. बताया जा रहा है कि गिरिडीह के बीजेपी जिला उपाध्यक्ष प्रशांत जायसवाल किसी भी तरह डुमरी के जीटी रोड के पास की 11.26 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं. आरोप है कि प्रशांत जायसवाल के इशारे पर ही यह पूरी कहानी गढ़ी गयी है. जमीन माफिया का एक ग्रुप उस सरकारी जमीन पर विवाह मंडप बनाना चाह रहा है. आधा विवाह मंडप तैयार भी हो गया है. लेकिन डुमरी सीओ रविंद्र कुमार पांडे जमीन के सही दस्तावेज कोर्ट में पेश कर बीजेपी नेता को ऐसा करने से रोक रहे हैं. डुमरी के अंचल अधिकारी ने तीनों वकीलों के पास से मामले को वापस लेते हुए अंतनु बनर्जी (सरकारी वकील) के पास मामले को रेफर किया. इस मामले में इंटरलोकुटरी एप्लीकेशन जिसमें तुरंत हियरिंग के लिए अनुरोध किया जाता है, अंचल अधिकारी के द्वारा डाला गया.

पहले भी हो चुकी है जमीन पर दखल की कोशिश

इसके पूर्व भी उक्त माफिया द्वारा जमीन पर अपना दखल बनाने की कोशिश में वहां एक घर बनाया जा रहा था. जिसे अंचल अधिकारी ने तत्काल प्रभाव से रोका. यह आरोप लगाया जा रहा है कि जब कभी भी हॉस्पिटल में किसी तरह का जीर्णोद्धार या शेड निर्माण का काम शुरू होता था, माफिया में शामिल लोग कोर्ट से स्टे ले आते थे. सरकारी स्टेडियम का निर्माण भी उन लोगों ने रुकवा दिया था.

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