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पीडीएस दुकान की लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा के दो वर्ष बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

पीडीएस डीलर की मनमानी से ग्रामीण परेशान

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Palamu : जनवितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले खाद्यान की सुरक्षा पुख्ता करने हेतू सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 को प्रभावी बनाया गया है. बावजूद पीडीएस डीलरों की मनमानी अब तक बंद नहीं हो पायी है. जिला मुख्यालय से सटे चौनपुर प्रखंड के कल्याणपुर में पीडीएस डीलर पन्ना लाल द्वारा उपभोक्तओं को खाद्यान सामग्री कम मात्रा में दी जा रही है. लोगों से मनमाना पैसा भी वसूला जा रहा है. राशन देने के बाद पर्ची या रसीद भी नहीं दिया जाता है. डीलर की पहुंच ऊपर तक रहने के कारण दो वर्ष पूर्व अनुज्ञप्ति रहने की अनुशंसा पर अबतक कार्रवाई नहीं हो पायी है.

पार्षद और उपभोक्ताओं ने की उपायुक्त से शिकायत

पीडीएस डीलर की मनमानी से त्रस्त होकर वार्ड 33 के निवासियों के साथ पार्षद चंचला देवी ने जिले के उपायुक्त से इसकी शिकायत की है. उपभोक्ताओं का आरोप है कि डीलर द्वारा कभी भी समय पर खाद्यान का वितरण नहीं किया जाता है. एक माह का खाद्यान देकर राशन कार्ड पर दो माह की एंट्री कर अंगूठा लगा दिया जाता है. खाद्यान देने में निर्धारित रेट से ज्यादा रुपये लिए जाते हैं. ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि कल्याणपुर में जविप्र की दुकान तो है, लेकिन कभी खुलती नहीं. खाद्यान वितरण के लिए डीलर हमेशा अपने आवास पर बुलाते हैं.

पार्षद के आग्रह को डीलर ने किया दरकिनार

 

उपायुक्त से शिकायत से पूर्व उपभोक्ताओं ने पार्षद से खाद्यान देने में अनियमितता की शिकायत की थी. जब शिकायत लेकर पार्षद डीलर की दुकान में पहुंची और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था ठीक करने का आग्रह किया तो डीलर उनके साथ ही दुव्‍यवहार करने लगा. डीलर द्वारा स्पष्ट लहजे में कहा गया कि उसकी व्यवस्था को कोई बदल नहीं सकता. इस संबंध में वे चाहे तो जिले के उपायुक्त से ही क्यों न शिकायत कर दें.

पैसे और पैरवी के बल पर अब तक नहीं हुई कार्रवाई

डीलर की मनमानी की शिकायत कोई पहली बार नहीं की गयी है. वर्ष 2016 में डीलर पन्ना लाल के खिलाफ भी शिकायत की गयी थी. उस समय के चौनपुर के प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने शिकायत की जांच की थी और मामले को सही पाया था. शिकायत के आलोक में जांच की गयी पता चला था कि सितंबर 2016 की खाद्य सामग्री डीलर ने वितरण नहीं की है. जांच के दौरान वितरण पंजी मांगी गयी तो डीलर द्वारा नहीं दिखलाया गया था. आपूर्ति पदाधिकारी की ओर से गत 2  दिसंबर 2016 को डीलर की अनुज्ञप्ति रद्द करने की अनुशंसा सदर अनुमंडल पदाधिकारी से की गयी थी, लेकिन पहुंच और पैसों के बल पर डीलर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

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