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उपायुक्त के आदेश पर तीन महीने बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, विभागीय पदाधिकारी जानबूझकर बने हैं अंजान  

Palamu : पलामू जिले में हर सप्ताह दो दिनों जनता दरबार लगाया जाता है. इसमें बड़ी संख्या में फरियादी आते हैं और आवेदन देकर समस्याओं के निदान का आग्रह करते हैं. अक्सर उपायुक्त जनता दरबार में समस्याओं को सुनते हैं, लेकिन जब कभी उनकी उपस्थिति नहीं रहती, अन्य पदाधिकारी इस जवाबदेही को निभाते हैं.

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तीन महीने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई

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जनता दरबार में कुछ मामलों का ऑन स्पॉट, जबकि कई मामलों में कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाता है, लेकिन गत 11 दिसंबर 2018 को जनता दरबार में उपायुक्त द्वारा दिये गये एक निर्देश पर तीन माह बीत जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई है. सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि संबंधित विभाग के पदाधिकारी कार्रवाई को लेकर अंजाम बने हुए हैं.

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क्या है मामला?

दरअसल, विगत 11 दिसंबर 2018 को उपायुक्त डॉ. शांतनु कुमार अग्रहरि के वेश्म में आयोजित जनता दरबार में जिला समाज कल्याण कार्यालय से संबंधित शिकायतों की झड़ी लग गयी. तब उपायुक्त ने उक्त सभी मामलों में दोषी जिला समाज कार्यालय में प्रतिनियुक्त सहायक शंकर विश्वकर्मा को विभागीय कार्य संपादन में शिथिलता बरतने के मामले को लेकर विरमित करने का निदेश दिया था. साथ ही जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को शंकर विश्वकर्मा को निलंबित करने के लिए प्रमंडलीय आयुक्त के पास प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया था. आश्चर्य की बात तो यह है कि तीन माह बीत जाने के बाद भी कार्यवाहक सहायक शंकर विश्वकर्मा को जिला समाज कल्याण कार्यालय से न तो विरमित किया गया और न ही निलंबन का प्रस्ताव प्रमंडलीय आयुक्त के पास भेजा गया.

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सहायक को विरमित करने का कोई आदेश नहीं हुआ जारी : डीएसडब्ल्यूओ

समाजिक सुरक्षा कोषांग पदाधिकारी सह प्रभारी जिला समाज कल्याण पदाधिकारी शत्रुंजय कुमार ने कहा कि जिला समाज कार्यालय के सहायक शंकर विश्वकर्मा को विरमित करने संबंधी कोई भी आदेश उपायुक्त के स्तर से जारी नहीं किया गया है. इस कारण उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गयी है. अगर ऐसा कोई आदेश जारी होगा तो कार्रवाई जरूर की जायेगी.

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उनके उपर लगे आरोप बेबुनियाद

एक अन्य सवाल के जवाब में कुमार ने उनके उपर लगे आरोपों को तथ्यहीन और बेबुनियाद बताया है. उन्होंने कहा कि सरकार की जो गाईडलाईन है, उसी के अनुरूप पोषाहार का पैसा दिया जा रहा है. जिले की किसी भी परियोजना में संवेदक के खाते में पोषाहार की राशि नहीं भेजी है. उन्होंने कहा कि कुछ नेता सस्ती लोकप्रियता के लिए झूठा आरोप लगा रहे हैं. इससे पूर्व भी ऐसे लोग विभाग पर आरोप लगा चुके थे, लेकिन सब बेबुनियाद साबित हुआ.

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संवेदक के निजी खाते में भेजी जा रही पोषाहर राशि : राजमुनी

झामुमो के वरिष्ठ नेता राजमुनी मेहता ने उपायुक्त को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि पाटन बाल विकास परियोजना में वर्ष 2015 से फरवरी 2019 तक संवेदक अमूल्य ट्रेडर्स, अंकित ट्रेडर्स एवं श्रीराम ट्रेडर्स (सभी पाटन) के खाता में ही पोषाहार की राशि भेजी गयी है. जबकि आंगनबाड़ी सेविकायें उधार पोषाहार खरीदकर राशि के लिए भटक रही हैं और दूसरी तरफ आपूर्तिकर्ता (संवेदक) मालामाल हो रहे हैं.

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विश्रामपुर परियोजना को एक साल से पोषाहार नहीं मिला

झामुमो नेता ने आरोप लगाया है कि अभी भी विश्रामपुर परियोजना की सेविकाओं को एक साल से पोषाहार की राशि नहीं मिली है. श्री मेहता ने आरोप लगाया है कि इस समस्या के निराकरण हेतु वे कई बार जिला समाज कल्याण पदाधिकारी से मिले, किन्तु बकाये पोषाहार की राशि भुगतान हेतु कोई कार्रवाई नहीं की गयी. झामुमो नेता ने उपायुक्त से आग्रह किया है कि पोषाहार राशि के भुगतान के मामले स्वयं संज्ञान लेते हुए अविलंब भुगतान करायें. साथ ही जिन 74 आपूर्तिकर्ताओं (संवेदकों) के मामले में गबन की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है, उन्हें अविलंब गिरफ्तार कराने की कार्रवाई की जाये.

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11 करोड़ का हुआ था गबन 

आपूर्तिकर्ता (संवेदक) के खाता में जिला समाज कल्याण विभाग द्वारा पोषाहार खरीद की राशि भेजे जाने के कारण 11 करोड़ रुपये का गबन का हुआ था. मामले में जिले की तत्कालीन प्रभारी डीएसडब्लूओ कुमारी रंजना, विश्रामपुर एवं हरिहरगंज सीडीपीओ के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. बावजूद जिले की कई परियोजनाओं में आज भी आपूर्तिकर्ता (संवेदक) के खाता में ही पोषाहार की राशि भेजी जा रही है.

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