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खूंटी : अफीम तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, पिछले तीन महीनों में 62 तस्कर गिरफ्तार

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Khunti : खूंटी जिले के मुरहू, अड़की, सायको, बंदगांव सहित कई अन्य इलाकों में इस वर्ष बड़े पैमाने पर अफीम की खेती हुई थी. पुलिस के द्वारा समय-समय पर लगातार कार्रवाई करके अफीम की फसल को नष्ट भी किया गया. लेकिन इसके बावजूद भी पूरी तरह से अफीम की फसल नष्ट नहीं हो पाई.

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बचे हुए फसलों से बड़े पैमाने पर अफीम और डोडा निकाला गया जिसे खरीदने के लिए झारखंड से लेकर दूसरे राज्यों के तस्कर खूंटी पहुंचने लगे. इसी दौरान खूंटी पुलिस ने अफीम तस्करों के खिलाफ लगातार कार्रवाई करते हुए पिछले तीन महीनों में 62 अफीम तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

वहीं 122 किलो अफीम और 2650 किलो डोडा भी बरामद किया. खूंटी के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि अफीम तस्करों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी.

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दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा अफीम और डोडा

अफीम के फलों पर चीरा लगा और अफीम निकाल ली गई लेकिन इसकी भनक तक पुलिस को नहीं लगी. झारखंड के जिलों से अफीम और डोडा को बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है.

हालांकि पुलिस कार्रवाई करते हुए अफीम और डोड़ा बरामद कर रही है, और उसने शामिल तस्करों को भी गिरफ्तार कर रही है. लेकिन फिर भी बड़े पैमाने पर इसका कारोबार फल-फूल रहा है.

वहीं, इस मामले में पुलिस का कहना है कि जहां-जहां अफीम की खेती होने कि सूचना मिली वहां अफीम की खेती को नष्ट किया गया. इसके बाद भी जहां अफीम के फसलों को नष्ट नहीं किया गया और फसल तैयार हो गए वैसे तैयार अफीम और डोडा को पुलिस लगातार बरामद कर रही और तस्करों के ऊपर कार्रवाई भी कर रही है.

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नक्सलियों का अर्थतंत्र है अफीम

रांची सहित अन्य जिलों में अफीम की खेती नक्सलियों का अर्थतंत्र है. नशे के बड़े कारोबारी नक्सलियों को जिम्मेवारी देकर भी कई जिलों में अफीम की खेती करवा रहे हैं. झारखंड के टीपीसी, माओवादी और पीएलएफआई संगठन के साथ गंठजोड़ कर अफीम की खेती कराई जा रही है. अफीम की खेती रांची के अलावा खूंटी, चतरा, गुमला, गढ़वा, पलामू, लातेहार, सिमडेगा और सरायकेला सहित अन्य जिलों में हो रही है.

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डोडा से लेकर डंठल तक बेच डालते हैं कारोबारी

अफीम की खेती में कुछ भी बर्बाद नहीं होने देते हैं कारोबारी. चीरा लगाकर अफीम पहले निकाल ली जाती है फिर फल सूख जाने पर उसके पोस्ता दानों को निकाल लिया जाता है. इतना ही नहीं उसके डोडा और डंठल को भी बेच दिया जाता है.

बाजार में पोस्ता की कीमत 200 से लेकर 400 रुपये किलो तक है. वहीं डोडा 30 हजार से 40 हजार रुपये किलो बिक्री होती है. जबकि डंठल दस हजार रुपये किलो बिक्री होती है.

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कैसे होती है अफीम की खेती

झारखंड के जिलों में उत्तरप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, नेपाल, सहित कई राज्यों के नशे के सौदागर रुपये निवेश करते हैं. बताया जाता है कि सितंबर में अफीम की खेती की शुरुआत हो जाती है. खेती के लिए छह से सात महीने के लिए किसानों के खेत को बतौर लीज लिया जाता है.

अफीम की खेती करने वाले किसानों को पहली किस्त दी जाती है. फसल तैयार होने के दौरान दूसरी किस्त दी जाती है और फिर फसल पूरी तरह तैयार होने पर राशि की अंतिम किस्त दी जाती है. तीन महीने में इन पौधों में फल-फूल निकल आते हैं. इसके बाद उन फलों में चीरा लगाया जाता है. फिर उससे निकले गाढ़े रस को एकत्र कर अफीम तैयार की जाती है.

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अफीम तस्करों के खिलाफ की गयी कार्रवाई

  • 3 अप्रैल 2019 खूंटी पुलिस ने खूंटी और मारंगहादा थाना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए छह अंतरराज्यीय अफीम तस्करों को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तार आरोपियों में एक मैकेनिकल इंजीनियर भी है. उनके पास से लगभग आठ किलो अफीम के साथ ढाई लाख रुपए नगद, एक टाटा इंडिगो, एक मारुति बलेनो, 15 किलो डोडा और आठ मोबाइल बरामद किया गया था.
  • 1 अप्रैल 2019 पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ट्रक में लोड 97 बोरा अवैध डोडा के साथ सात लोगों को गिरफ्तार किया था. 97 बोरों में 1438 किलोग्राम डोडा बरामद किया गया था.
  • 3 मार्च 2019 खूंटी पुलिस ने 33 किलो अफीम के साथ नौ अफीम तस्करों को गिरफ्तार किया था. सायको पुलिस ने जहां 20.150 किलो अफीम के साथ पांच तस्करों को गिरफ्तार किया, वहीं मुरहू पुलिस ने 13 किलो अफीम के साथ चार तस्करों को गिरफ्तार किया था.

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