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उम्मीदवार की सहमति के बगैर होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर छापनेवाले प्रकाशकों के विरुद्ध होगी कार्रवाई

प्रकाशकों को देनी होगी, अपनी पहचान : डॉ मनीष रंजन

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Ranchi : लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर और अन्य प्रचार सामग्रियों पर उम्मीदवारों की सहमति जरूरी है. ऐसा नहीं होने पर प्रकाशकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 171 एच के खिलाफ निर्वाचन आयोग कार्रवाई करेगी. इस तरह की शिकायत में यदि प्रकाशकों की पहचान नहीं दी जाती है, तो संबंधित समाचार पत्रों पर भी कार्रवाई करने के निर्देश दिये गये हैं. प्रिंट मीडिया में प्रकाशित सरोगेट विज्ञापन के मामले में लोक प्रतिनिधित्व कानून की धारा 77 (1) के तहत विज्ञापन को उम्मीदवार के खर्च में जोड़ा जायेगा. उन्होंने कहा कि यदि विज्ञापन में संबंधित उम्मीदवारों की सहमति नहीं है, तो जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 के प्रावधानों का अनुपालन कर कार्रवाई की जायेगी. सभी संबंधित प्रकाशकों को विज्ञापन के मामले में प्राधिकृत किया गया है.

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छापे गये विज्ञापन, प्रचार सामग्रियों को चुनाव खर्च माना जायेगा

चुनाव प्रचार के लिए प्रकाशकों द्वारा छापे गये विज्ञापन (होर्डिंग्स, फ्लैक्स, पोस्टर) को चुनाव व्यय माना जायेगा. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 127 ए के तहत पार्टियों के कार्यकर्तांओं के द्वारा चुनाव में संबंधित पोस्टर, पांपलेट का वितरण किया जायेगा. प्रावधानों के नियमों के अनुसार भाषा के बारे में जानकारी देना भी जरूरी किया गया है. पोस्टर, बैनर यदि रांची में छपे हैं, तो उसकी प्रति मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में जमा करना होगा. इसके लिए दलों को एक घोषणापत्र भी जमा करनी होगी. यहीं से जिलों में ये बैनर, पोस्टर भेजा जायेंगे.

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प्रकाशकों का नाम बैनर, होर्डिंग्स में रहना जरूरी

जिस होर्डिंगस, बैनर, पोस्टर के पहले पन्ने पर प्रकाशकों का नाम नहीं होगा, तो वैसे प्रकाशकों के विरुदध कार्रवाई की जायेगी. इसके बाद प्रकाशकों को स्वयं हस्ताक्षरित दो परिचित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक करते हुए घोषणापत्र देना होगा. विज्ञापनों, प्रचार सामग्रियों को डिस्पले से पहले जिला निर्वाची पदाधिकारी कार्यालय में दो फोटोग्राफ के साथ जमा करना होगा. अनुमति मिलने के बाद ही इसे प्रकाशित अथवा जारी किया जायेगा.

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