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जानिए टाटा स्टील के लिए नीलांचल का अधिग्रहण क्यों महत्वपूर्ण है, 12100 करोड़ में सौदा, फिलहाल सालाना एक मिलियन टन उत्पादन, 2030 तक 10 मिलियन टन उत्पादन का लक्ष्य

Jamshedpur: टाटा स्टील लिमिटेड ने सोमवार को ओडिशा स्थित नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) का आधिकारिक अधिग्रहण पूरा कर लिया. कंपनी ने इसकी जानकारी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को दी है. टाटा स्टील की सहायक कंपनी टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स लिमिटेड (टीएसएलपी) ने यह अधिग्रहण किया है. उसने नीलांचल की 93.71 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की है. इसकी उत्पादन क्षमता सालाना एक मिलियन टन होगी. एनआईएनएल में
एमएमटीसी लिमिटेड, एनएमडीसी लिमिटेड, मेकॉन लिमिटेड, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, औद्योगिक संवर्धन निगम लिमिटेड (एनआईएनएल), निवेश निगम ओडिशा लिमिटेड, ओडिशा खनन निगम लिमिटेड के शेयर भी हैं. यह अधिग्रहण शेयर बिक्री और खरीद समझौते के नियमों और शर्तों के अनुसार किया गया है. टीएसएलपी ने यह अधिग्रहण 12100 करोड़ में किया है. इस अधिग्रहण का महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह टाटा स्टील के कलिंगनगर प्लांट के पास है. इससे टाटा स्टील को साझा बुनियादी ढांचे, संसाधन, प्रबंधन और विशाल उत्पाद परिसर का निर्माण करने में सहुलियत होगी. पहले इसकी उत्पादन क्षमता एक मिलियन टन होगी, जिसे आने वाले कुछ सालों में सालाना साढ़े चार मिलियन टन करने की योजना है. और इसे 2030 तक प्रति वर्ष 10 मिलियन टन तक विस्तारित किया जाएगा.
मील का पत्थर है यह अधिग्रहण-नरेन्द्रन
टाटा स्टील के सीईओ और प्रबंध निदेशक और टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स के अध्यक्ष टीवी नरेंद्रन ने कहा कि नीलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) का अधिग्रहण एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. टाटा स्टील अपने लांग प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे रही है और आने वाले दिनों में इसकी उत्पादन क्षमता तेजी से बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि भारत सरकार अपने विनिवेश कार्यक्रम पर ध्यान दे रही है. यह अधिग्रहण टाटा स्टील की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है. ओडिशा राज्य और इसके संचालन के आसपास रहने वाले समुदाय के साथ ही कंपनी के कर्मचारियों का हम स्वागत करते हैं. टाटा स्टील का प्रयास होगा कि एनआईएनएल को तेजी से एक अत्याधुनिक, प्रतिस्पर्धी और टिकाऊ उद्यम में बदला जाए.
2030 तक सालाना 40 मिलियन टन उत्पादन क्षमता होगी
भारत में लांग प्रोडक्ट्स में महत्वपूर्ण वृद्धि देखने को मिल रही है क्योंकि भारत अपने बुनियादी ढांचे का निर्माण तेजी से कर रहा है. अर्ध-शहरी भारत में खुदरा आवास खंड में आई तेजी के साथ सरकार का आत्मानिर्भर भारत कार्यक्रम भी इसमें सहायक साबित हो रहा है. टाटा स्टील अपनी मजबूत ब्रांड इक्विटी का उपयोग करते हुए विशेष रूप से खुदरा क्षेत्र में लंबे उत्पादों के कारोबार में अपनी क्षमता का लाभ उठाएगी. टाटा स्टील ने भारत में 2030 तक अपनी क्षमता को 40 मिलियन टन प्रति वर्ष करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

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