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मुआवजा दिए बगैर सड़क चौड़ीकरण के लिए जमीन का अधिग्रहण, ग्रामीणों में रोष

काम रोके जाने के भय से रात के अंधेरे में हो रहा निर्माण कार्य    

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Palamu : पलामू जिले में मुख्य पथों के साथ-साथ ग्रामीण पथों का निर्माण का सुदूर गांवों को मुख्यालय और मुख्य पथ से जोड़ने का काम किया जा रहा है. लेकिन सड़क चौड़ीकरण के दौरान ग्रामीणों की ली जा रही जमीन का मुआवजा भुगतान में भारी सुस्ती बरती जा रही है. नतीजा ग्रामीण सोने जैसी कीमती जमीन को सड़क में मिलने से भारी नाराज हैं और सड़क का निर्माण कार्य बार-बार रोक दे रहे हैं.

ग्रामीणों ने अपनी-अपनी रैयती जमीन दी

छतरपुर-नौडीहा, खजुरी, बेलहारा लोहरसी और खाटिम को जोड़ने वाली सड़क के चौड़ीकरण का काम ग्रामीणों के भय के कारण संवेदक रात को करा रहे हैं. सड़क चौड़ीकरण के लिए जिन ग्रामीणों ने अपनी-अपनी रैयती जमीन दी है, उन्हें आज तक कोई भी मुआवजा राशि नहीं मिली है. इस कारण ग्रामीणों में काफी रोष है. विरोध स्वरूप ग्रामीण पिछले तीन-चार दिनों से दिन में काम शुरू होते ही विरोध और हंगामा कर काम को रोक दे रहे हैं. ग्रामीणों के विरोध को देखते हुए संवेदक रात को सड़क चौड़ीकरण का काम करा रहे हैं.

16 किलोमीटर लंबी सड़क हो रही चौड़ी 

बता दें कि 16.30 किलोमीटर लंबी इस सड़क में 16 करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से उक्त गांव से गुजरने वाली सड़क को दोनों तरफ से 20-20 फीट चौड़ा किया जा रहा है. इस कार्य की शुरूआत छतरपुर के विधायक राधाकृष्ण किशोर ने 10 अक्टूबर को की थी. पहले चौड़ीकरण का काम दोनों तरफ 10-10 फीट करना था, लेकिन बाद में विभागीय स्तर पर 20-20 फीट चौंंड़ाई को बढ़ाने का निर्णय लिया गया.

मुआवजा के लिए नहीं मिली शिकायत : कार्यपालक अभियंता 

पीडब्ल्यूडी के कार्यपालक अभियंता रामेश्वर साह ने बताया कि अभी तक उनके पास मुआवजा राशि के लिए किसी भी ग्रामीणों की शिकायत नहीं आयी है. गांव के लोगों का जमीन सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जा रही है, तो उन्हें निश्चित रूप से मुआवजा विभागीय प्रावधान के तहत दिया जायेगा.

बिना एनओसी के काटे जा रहे पेड़  

दूसरी ओर सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सड़क किनारे लगे हरे पेड़ों को भी बिना एनओसी लिए धड़ल्ले से काटा जा रहा है. अब तक करीब 50 पेड़ों को काटा जा चुका. पूछे जाने पर छतरपुर वन क्षेत्र के पदाधिकारी अशोक दास ने कहा कि पेड़ काटने का कोई एनओसी पीडब्ल्यूडी विभाग ने नहीं लिया है. ग्रामीणों से इस बात की जानकारी मिली है. विभागीय सत्यापन के बाद पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को इस संबंध में पत्र लिखेंगे.

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