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एक्सपेंडर तकनीक के जरिये एसिड और आग से जले भाग को छुपाया जा सकता है

झारखंड में चाइनिज व फ्रेंच एक्‍सपेंडर तकनीक उपलब्‍ध

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Ranchi: तकनीक के विकास के साथ-साथ मेडिकल साइंस मे भी काफी बदलाव देखा जा रहा है. तकनीकी आधुनिकता ने इस क्षेत्र को समय के साथ-साथ सरल बनाने का काम किया है. झारखंड जैसे शहर में जहां लोग प्लास्टिक सर्जरी के नाम से डरते हैं, यहां पिछले तीन-चार सालों में इस क्षेत्र में काफी बदलाव देखा गया है. इन बीते सालों में राज्य मे भी ऐसी तकनीकें प्लास्टिक सर्जरी में इजाद हुई है, जिसे कराने पहले लोग बड़े-बड़े शहरों में जाते थे. एक्सपेंडर टेक्निक इन्हीं में से एक है.

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प्लास्टिक सर्जन डॉ अनंत कुमार सिन्हा ने बताया कि एक्सपेंडर टेक्निक प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में बिलकुल नया है. झारखंड में कम ही ऐसे सर्जन होंगे जो इस विधि से इलाज करते हों, क्योंकि एक्सपेंडर टेक्निक में इस्तेमाल किये जाने वाले सामान विदेशों से मंगाये जाते हैं.

चमड़ी को ढकने का काम करती है एक्सपेंडर

डॉ अनंत कुमार सिन्हा ने जानकारी दी कि एक्सपेंडर टेक्निक के जरिये सफेद दाग, एसिड के छींटे, आग के जले भाग आदि को ढंका जा सकता है. उन्होंने बताया कि यह टेक्निक राज्य में पिछले चार साल से प्रचलित हुई हैं, अधिकांश लेाग प्लास्टिक सर्जरी का मतलब शरीर के एक स्थान से चमड़ी काट के दूसरे स्थान पर लगाना समझते है, जो काफी पुरानी प्रक्रिया है. लेकिन अब एक्सपेंडर के माध्यम से दाग या मृत कोशिकाओं  के बगल जहां चमड़ी स्वस्थ हो, वहां एक्सपेंडर डालकर चमड़ी को फूला दिया जाता है, उसके कुछ दिन फिर से ऑपरेशन कर उस चमड़ी को फैलाकर जख्मी हिस्से को ढक दिया जाता है. जिससे चमड़ी पूरी तरह स्वस्‍थ और दाग या उपर से लगी चमड़ी दोनों पता भी नहीं चलता.

फ्रेंच एक्सपेंडर है अच्छी

बाजार में चाइना और फ्रेंच दोनों एक्सपेंडर मिल रहे हैं. जिसमें फ्रेंच एक्सपेंडर की गुणवत्ता सबसे अच्छी है, क्योंकि ये कभी भी फुल कर या पपड़ी जैसी उखड़ती नहीं है. वहीं चाइना एक्सपेंडर पांच-छह साल में चमड़ी छोड़ने लगती है. एक्सपेंडर की कीमत 35,000 से 40,000 तक है. ऑपरेशन कर कुल लागत लगभग 70 हजार रुपये तक आती है.

सुरक्षित और सरल है प्रक्रिया

एक्सपेंडर से चमड़ी ढकना काफी सरल है. इससे कहीं भी शरीर के अन्य हिस्से से चमड़ी नहीं काटी जाती. दो ऑपरेशन कर आसानी से चमड़ी से दाग-धब्बों समेत एसिड के छींटों को भी हटाया जा सकता है.

ब्रेस्ट इंप्लांटेशन और टम्मी टक

पिछले पांच सालों में ब्रेस्ट इंप्लांटेशन की मांग काफी बढ़ी है. एक्सपेंडर के जरिये इसका ऑपरेशन भी सरल है. वहीं ब्रेस्ट ब्रेस्ट इंप्लांटेशन  से पीड़ित महिलाएं ये अधिक कराती हैं. पहले राज्य की महिलाएं ब्रेस्ट ब्रेस्ट इंप्लांटेशन के लिये मेट्रो सिटी जाया करती थीं. लेकिन, अब राज्य में ये सुविधाएं उपलब्ध हैं. बड़े शहरों में जहां चार-पांच लाख की लागत से ऑपरेशन  किया जाता है. जबकि झारखंड में इसकी कीमत सवा लाख रूपये तक है. जबकि, मरीजों को एक ही दिन में ऑपरेशन करके अस्पताल से छुट्टी दे दी जा रही है. गर्भधारण के बाद महिलाओं के पेट निकलना जिसे टम्मी टक कहा जाता है, उसे भी इसके जरिये ठीक किया जा सकता है. डॉ अनंत ने बताया कि आने वाले समय में मेडी स्पा भी राज्य के लोगों को सुविधायें देगा. जो पूर्णता मेडिकल और ब्यूटी पार्लर की तरह काम करेगा. उन्होंने बताया कि अभी भी राज्य में मेडि स्पा के लिए लोग अस्पताल आते हैं.

केस स्टडी: बिरसा चौक की रहने वाली 20 वर्षीय प्रतिमा कुमारी ने बताया कि उनका हाथ बचपन में जल गया था. काफी इलाज करायी. लेकिन, कभी भी दाग गया नहीं. वहीं बढ़ती उम्र के साथ हाथ के दाग को ठीक करना काफी जरूरी था. ऐसे में डॉक्टरों ने प्लास्टिक सर्जरी कर दाग हटाने की बाद कहीं. लेकिन, तब डर लगा कि प्लास्टिक सर्जरी में पैसे भी बहुत खर्च होंगे और कैसे सर्जरी होगी, इस बात का डर अधिक था. ऐसे में डॉक्टरों ने एक्सपेंडर टेक्निक के बारे में बताया. उन्होंने बताया कि अप्रैल 2018 में दो ऑपरेशन किये गये. जिसमें एक्स्पेंडर के जरिये दाग को ढका गया. अब न ही दाग दिखता है और न ही चमड़ी का पता चलता है कि उपर से फैलाया हुआ है.

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