Education & CareerJharkhandLead NewsRanchi

आचार्यकुलम स्कूल पर कोविड काल में मनमानी फीस वसूली का आरोप, अब एनुअल चार्ज भी लगाया

अभिभावकों ने उपायुक्त से की लिखित शिकायत, हरिद्वार मुख्यालय भेजी कॉपी

Ranchi: राजधानी के नामकुम स्थित आचार्यकुलम स्कूल पर मनमानी फीस वसूलने और राज्य सरकार के आदेश के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने उपायुक्त से शिकायत की है.

लिखित शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कि स्कूल द्वारा एनुअल चार्ज के नाम पर मनमानी राशि वसूली जा रही है, वहीं कोविड काल की भी पूरी फीस ली जा रही है.

advt

स्कूल प्रबंधन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए अभिभावकों ने लिखा है कि प्रबंधन ने वादा किया था कि प्लस टू तक किसी प्रकार का रीएडमिशन चार्ज या वार्षिक फीस नहीं लेंगे, सिर्फ नामांकन के समय दस हजार रुपये लिये जायेंगे. यही समझकर अभिभावकों ने अपने बच्चों का नाम दूसरे विद्यालयों से कटवाकर इस विद्यालय में कराया था. लेकिन अब आचार्यकुलम में एनुअल चार्ज समेत हर तरह की फीस अलग से वसूली जा रही है.

अभिभावकों ने इसकी लिखित शिकायत की एक प्रति हरिद्वार स्थित स्कूल प्रबंधन के मुख्यालय को भी प्रेसित की है, वहीं रांची जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला शिक्षा पदाधिकारी और खिजरी विधायक को भी एक-एक प्रति दी गयी है.

इसे भी पढ़ें : पत्नी के ईलाज के लिए सीएम से मिले दिव्यांग भगन, पर रिम्स डायरेक्टर और अधीक्षक से मिलने नहीं दे रहे गार्ड

कोविड काल में लिया 2500 रुपये मासिक शुल्क

अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन पर तानाशाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रबंधन ने सरकारी आदेश का भी उल्लंघन किया है. सरकारी आदेश के अनुसार कोरोना काल में या जब तक स्कूल बंद है तब तक सिर्फ ट्यूशन फीस लेना था. लेकिन आचार्यकुलम प्रबंधन ने पूरे 3000 रुपये लेने का दबाव डाला. जब अभिभावकों ने इसका विरोध किया तो 500 रुपये कम कर दिया गया और 2500 रुपये फीस वसूला गया.

अभिभावकों का तर्क है कि 3000 रुपये मासिक में रोज एक समय के भोजन समेत हर प्रकार के शुल्क शामिल हैं तो कोविड काल में मात्र 500 रुपये कम करना उनकी समझ से परे है.

इसे भी पढ़ें : रांची विवि कैंपस में मेडिकल कॉलेज खोलने पर सिंडिकेट की मुहर, एयर हॉस्टेस की पढ़ाई भी शुरू होगी

बच्चों को परीक्षा में नहीं बैठने देने की धमकी!

इतना ही नहीं, स्कूल प्रबंधन पूरी फीस नहीं देने पर बच्चों को परीक्षा में नहीं बैठने की धमकी भी देता रहा. साथ ही ऐसे बच्चों को स्कूल से निकाल लेने को कहा जाता रहा. दिलचस्प बात यह है कि अभिभावकों ने लगातार स्कूल प्रबंधन से पूछा कि आखिर पूरी फीस में ट्यूशन फीस कितना है, लेकिन इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया.

इस पूरे मसले पर जब प्रबंधन से पक्ष लेने के लिए संपर्क किया गया तो कहा गया कि सारे निर्णय स्वामीजी लेते हैं और उन्होंने कोरोना काल में फीस लेने में किसी तरह की मानमानी नहीं की है.

इसे भी पढ़ें : चेंबर ने मंत्री को बजट के लिए दी सलाह, संथाल में उद्योग और पर्यटन की संभावनाओं पर दिया जाये ध्यान

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: