Opinion

जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण का आरोप- कुछ बड़ी साजिश हुई है पर्दे के पीछे

Prashant Tandon

छुट्टी के दिन चीफ जस्टिस अगर विशेष बेंच बना कर सुनवाई करते हैं तो मामला इतना न आसान है और न ही छोटा. पहले देखते हैं कि आरोप क्या हैं.

सुप्रीम कोर्ट में क्लर्क के तौर पर काम करने वाली एक महिला ने आरोप लगाया कि जस्टिस गोगोई ने महिला को उसकी मर्जी के बगैर गलत ढंग से छुआ. महिला के एफिडेविट के मुताबिक, घटना अक्टूबर 2018 की है.

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महिला जस्टिस गोगोई के घर पर दूसरे और स्टाफ के साथ कार्यरत थी. महिला का आरोप है कि उसके विरोध करने के बाद उसे नौकरी से निकाला गया. उस पर केस डाले गए और तिलक मार्ग थाने में उस पर पुलिस यातना भी सहनी पड़ी.

जेल भी गई और उसके पति और भाई जो दिल्ली पुलिस में हैं उन्हे सस्पेंड भी किया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक एफ़िडेविट के साथ वीडियो क्लिप भी हैं जिसमें आरोप लगाने वाली महिला जस्टिस गोगोई से माफी भी मांगती दिख रही है.

जस्टिस गोगोई की तरफ से सुपीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है.़

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क्या ये एक बड़ी साजिश है?

आज विशेष सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि इस महिला के पीछे कोई बड़ा हाथ है और चीफ जस्टिस की अदालत को निष्क्रिय करने की साजिश है.

आरोप जांच का विषय है, लेकिन जिस तरह छुट्टी के दिन (गुड फ्राइडे) सुप्रीम कोर्ट के 22 जजों के घर ये एफ़िडेविट भेजे गए वो रहस्यमय है. और जस्टिस गोगोई की बात को विश्वास योग्य ठहराते हैं.
जस्टिस गोगोई ने ये भी कहा कि अगले सप्ताह कुछ बड़े मामलों की सुनवाई करनी है और ये साजिश उसी को प्रभावित करने का हिस्सा है.

जिन बड़े केसों की तरफ जस्टिस गोगोई का इशारा है उनमें राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना और प्रधानमंत्री मोदी पर बनी फिल्म को चुनाव से पहले रिलीज़ करने के मामले हैं.

पिछले सप्ताह ही गोगोई राफेल पर भी सरकार की दलील खारिज कर मीडिया में आए दस्तावेज़ों को जांच के दायरे में लाने का फैसला कर चुके हैं.

अगर ये साजिश है तो गोगोई ने छुट्टी के दिन विशेष बेंच बैठा कर निष्क्रिय कर दिया है? इसका जवाब तो आने वाले दिनों में अपने आप दिख जाएगा.

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लेकिन इस साजिश के पीछे वो “बड़ा हाथ” किसका है, इस राज़ से पर्दा उठाना लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की सेहत के लिए आवश्यक है.

सवाल और भी हैं जिनका उठना लाजिमी है. रिपोर्टों के अनुसार, सरकार को इन आरोपों की जानकारी जनवरी महीने से हे थी. क्या इन आरोपों का इस्तेमाल गोगोई को प्रभावित करने में किया गया? क्या राफ़ेल पर जस्टिस गोगोई का फैसला कारण बना 22 जजों के घर एफ़िडेविट पहुंचने का?

गोगोई इन सब सवालों का जवाब चीफ जस्टिस की तरह उन खास मामलों पर आदेशों से दे सकते हैं और जनता की अदालत में खरे भी उतर सकते हैं. उनके सभी फैसले अब इसी आईने से देखे जायेंगे.

पत्रकार प्रशांत टंडन के फेसबुक वॉल से साभार

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