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पीएमसीएच पर गलती छिपाने के लिए घंटों वेंटिलेटर पर मृत इंसान को रखने का आरोप

धनबाद पीएमसीएच का लापरवाही से चोली-दामन का साथ रहा है.

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Dhanbad :  धनबाद पीएमसीएच का लापरवाही से चोली-दामन का साथ रहा है. लेकिन इस बार अस्पताल के चिकित्सकों  पर  लापरवाही बरतने का आरोप है. आरोप है कि इनकी लापरवाही से न सिर्फ एक जिंदा इंसान को अपने जान से हाथ धोना पड़ा, बल्कि पांच मासूम बच्चों के सिर से एक पिता का साया भी उठ गया. खबरों के अनुसार  पिछले शुक्रवार को गिरिडीह जिले में  रिक्शा चलाते वक्त गिर जाने से कृष्णा पासी का हाथ टूट गया. गिरिडीह के एक अस्पताल में कृष्णा पासी का प्राथमिक इलाज हुआ.

इसके बाद डॉक्टरों ने हाथ का ऑपरेशन धनबाद के पीएमसीएच में करवाने की सलाह दी. पीएमसीएच इलाज कराने पहुंचे कृष्णा पासी और उनके परिजनों को पहले तो एक सप्ताह तक अपने हाथ के ऑपरेशन के लिए इंतजार करना पड़ा. इसके बाद किसी तरह कल शनिवार सुबह 10 बजे कृष्णा पासी के हाथ का ऑपरेशन तो हुआ, लेकिन उसे अपने जान से हाथ धोना पड़ा.

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ऑपरेशन के लिए अंदर ले गये तो वह बिलकुल सही सलामत थे

परिजनों की माने तो जब डॉक्टर उन्हें ऑपरेशन के लिए अंदर ले गये तो वह बिलकुल सही सलामत थे, वो हंसते हुए सभी से बात भी कर रहे थे. लेकिन 3 घंटे बाद जब उन्हें बाहर लाया गया तो वह मरणासन्न हालत में थे. इसके बाद उन्हें आईसीयू में घंटों वेंटिलेटर पर रखा गया. परिजनों को भी कुछ समझ नही आ रहा था कि आखिर चल क्या रहा है. जबतक परिजन कुछ समझ पाते, अस्पताल प्रबंधन ने कृष्णा पासी का शव अस्पताल के बाहर एक एम्बुलेंस में रखवा कर घर वापस जाने की हिदायत दे डाली.

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गब्बर इस बैक का वह सीन तो आपको अवश्य ही याद होगा

बॉलीवुड फिल्म गब्बर इस बैक का वह सीन तो आपको अवश्य ही याद होगा, जिसमें एक निजी अस्पताल द्वारा पैसे की लालच में एक मृत मजदूर को घंटों वेंटिलेटर पर रख इलाज के बहाने डॉक्टरों द्वारा रुपए बनाने का खेल खेला जाता है. लोगों के अनुसार  कुछ ऐसा ही मामला धनबाद के पीएमसीच अस्पताल में देखने को मिला. बस फर्क सिर्फ इतना है कि फ़िल्म में यह कारनामा रुपये को लेकर किया गया और यहां लापरवाही को छिपाने के लिए किया गया.

 
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एनेस्थेसिया का ओवर डोज देने के कारण मरीज की मृत्यु  हो चुकी थी!

सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों द्वारा एनेस्थेसिया का ओवर डोज देने के कारण मरीज की मृत्यु ऑपरेशन थियेटर में हो चुकी थी. और इसका प्रमाण भी देखने को मिला. सूत्रों के अनुसार आईसीयू में लगी लाइफ मशीनों पर नजर डालने से कोई भी मशीन कृष्णा के जीवित रहने की ओर इशारा नहीं कर रही थी.  लेकिन  परिजन इसे समझ न सके और धरती के भगवान पर विश्वास करते रहे. फिलहाल परिजन चीख चीख कर न्याय की गुहार लगा रहे हैं. इस मामले में जांच किये जाने से सच्चाई सामने आ सकती है.

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