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महाराष्ट्र :  70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले के लपेटे में कांग्रेस-एनसीपी, एसीबी ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया  

सीबी ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया है कि करोड़ों रुपये के कथित सिंचाई घोटाला मामले की जांच में अजित पवार तथा अन्य सरकारी अधिकारियों द्वारा गडबड़ी किये जाने की बात सामने आयी है.

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 NewDelhi : भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, एसीबी ने महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजित पवार को 70 हजार करोड़ के कथित सिंचाई घोटाले का जिम्मेदार करार दिया है. बता दें कि एसीबी ने बंबई उच्च न्यायालय को बताया है कि करोड़ों रुपये के कथित सिंचाई घोटाला मामले की जांच में अजित पवार तथा अन्य सरकारी अधिकारियों द्वारा गडबड़ी किये जाने की बात सामने आयी है. यह घोटाला लगभग 70,000 करोड़ रुपए का बताया गया हे. मामल  कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के शासन के दौरान अनेक सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी देने और उन्हें शुरू करने में कथित भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है. बता दें कि अजीत पवार राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उन मंत्रियों में शामिल रहे, जिनके पास महाराष्ट्र में 1999 से 2014 के दौरान कांग्रेस-राकांपा गठबंधन सरकार में सिंचाई विभाग का प्रभार था. खबरों के अनुसार एसीबी के महानिदेशक संजय बारवे ने   स्वयंसेवी संस्था जनमंच की ओर से दाखिल याचिका के जवाब में बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष मंगलवार को हलफनामा दाखिल किया.

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 एसीबी ने आपराधिक कार्रवाई करने के लिए और समय की मांग की है

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जानकारी के अनुसार एनजीओ ने अपनी याचिका में विदर्भ और कोंकण सिंचाई विभाग द्वारा शुरू की गयी सिंचाई परियोजनाओं में अनियमितता पर चिंता जताई थी. अपने जवाबी हलफनामे में जल संसाधन विभाग के अंदर घोटाले को साजिश का एक विचित्र मामला बताया,  जिसने सरकार से ही धोखाधड़ी की. याचिका में कहा गया कि जब पवार जल संसाधन विकास मंत्री थे, तो उस दौरान विदर्भ और कोंकण सिंचाई विकास निगम की अनेक परियोजनाओं में देरी हुई, लागत में वृद्धि हुई और सिंचाई के अनुमानित लक्ष्यों तक नहीं पहुंचा गया. हलफनामे में कहा गया कि पूछताछ के दौरान पवार ने दावा किया कि उन्होंने सारे निर्णय सचिव स्तरीय अधिकारियों के सुझाव पर लिये थे और अधिकतर निर्णय जमीनी स्तर पर लिये गये. बता दें कि एसीबी ने इस अनियमितता मामले की जांच आगे बढ़ाने और कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई करने के लिए और समय की मांग की है.

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