न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

जानिये बैलून वाला एसी सिनेमाघर कैसे बनायेगा बाल विवाह मुक्त झारखंड

43

Ranchi: झारखंड के लोगों को विभिन्न विषयों पर जागरुक करने की जरुरत है. राज्य के कई एनजीओ विभिन्न माध्यमों से लोगों को रुढ़ीवादी परंपराओं से दूर करने के लिए नये प्रयोग के साथ काम करते हैं. मानवाधिकार और महिला मुद्दों पर काम करने वाली संस्था ब्रेकथ्रू बाल विवाह पर लोगों में जागरुकता के लिए नये प्रयोग के साथ मुहिम शुरू की है. जिसके तहत कई ईलाकों में जाकर बैलून वाले एसी सिनेमाघर में लोगों को सिनेमा दिखाई जाएगी, जो बाल विवाह और महिला उत्पीड़न से संबंधित विषय पर लोगों को जागरुक करेगा. यह चलता फिरता एक मोबाइल थियेटर है. खास बात यह है कि यह सिर्फ तीन घंटे में इंस्टॉल हो जाता है. जिसमें 120 लोगों को एक साथ डॉल्बी डिजिटल के जरिये 25 नवंबर से 18 दिसंबर तक सिनेमा दिखाया जाये. ब्रेकथ्रू की निदेशक उर्वशी गांधी ने कहा कि फिल्में समाज का आईना होती हैं, जो बदलाव का संदेश देने के लिए एक प्रभावी माध्यम भी हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार हम ये चलता-फिरता मोबाइल थियेटर लाये हैं. जिसमें फिल्मों के माध्यम से हम बाल विवाह, लैंगिक भेदभाव, यौन हिंसा और घरेलू हिंसा जैसे प्रासंगिक मुद्दों पर चर्चा करेगें. साथ ही महिला मुद्दों से जुड़ी फिल्में रश्मि‍ मैट्रिक पास, सीक्रेट सुपर स्टार फिल्म भी दिखाये जाएंगे.

एसी व डॉल्बी साउंड से सुसज्जित है थियेटर

इस अवसर पर ब्रेकथ्रू के स्टेट हेड आलोक भारती ने बताया कि इस चलते फिरते थियेटर से रांची के नगड़ी, सिल्ली, अनगड़ा, नामकुम, बेड़ो और कांके ब्लॉक के 12 स्थानों पर लगाया जाएगा. बालालौंग, नगड़ी, पतरातू, कुच्चू, जोन्हा, राजाउलातू, डुगंरी, दिघिया, केसा, तूको और पिठोरिया राजस्व गांवों को हम कवर करेंगे. इसमें एक साथ 120 लोग फिल्म देख सकते हैं. इसको लगाने के लिए बहुत ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती है.

18 साल से पहले हो जाती है 38% लड़कियों की शादी

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के आंकड़ों के मुताबिक झारखंड में 38 फीसदी लड़कियों की शादी 18 साल से पहले हो जाती है. बाल विवाह की वजह से लड़कियों पर घरेलू हिंसा की संभावना बढ़ जाती है. 30 फीसदी महिलाओं को शारीरिक हिंसा और 31 फीसदी को घरेलू हिंसा और यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है. 65 फीसदी महिलाएं एनिमिया से पीड़ित हैं. वहीं 6-59 माह के 70 फीसदी बच्चे एनीमिक हैं. स्कूलों में टॉयलट न होने से लड़कियों का ड्रॉप आउट भी उम्र बढ़ने के साथ बढ़ जाती है, कम उम्र में विवाह, शिक्षा का स्तर कम होने और लैंगिक भेदभाव का एक असर 18 फीसदी रोजगार प्राप्त महिलाओं को काम के बदले में कुछ भी नहीं मिलना भी है.

इसे भी पढ़ें: जिस सर्वे में झारखंड बताया गया अव्वल, उस पर चेंबर ने कहा- सारे आंकड़े फर्जी

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Comments are closed.

%d bloggers like this: