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फिलिप मेडोज टेलर के उपन्यास कन्फेशन्स ऑफ ए ठग पर आधारित है आमिर खान की फिल्म

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Mumbai  : आमिर खान की फिल्म ठग्स ऑफ हिंदोस्तान इस साल दिवाली पर रिलीज होगी.  इस फिल्म में सदी के महानायक अमिताभ बच्चन  एक अहम रोल  कर रहे हैं.  जैसी कि जानकारी है, यह पीरियड फिल्म फिलिप मेडोज टेलर के उपन्यास कन्फेशन्स ऑफ ए ठग पर आधारित  है.  बता दें  कि यह उपन्यास पहले 1839 में प्रकाशित हुआ था. कहानी उस समय के भारत में प्रचलित ठगी के काम पर  आधारित है.  उपन्यास  का ताना-बाना नामी ठग सईद अमीर अली के इर्द-गिर्द बुना गया है. 19वीं सदी का यह नॉवेल ब्रिटेन में बेस्टसेलर बना था.  कहानी के अनुसार  अमीर अली के मां-बाप को लूटा और मार दिया जाता है और फिर बच्चा अमीर अली  ठगों के बीच बड़ा होता है.  उसे इस्माइल नाम का ठग पालता पोसता है. आगे चल कर अमीर अली  खतरनाक और कुख्यात ठग बनता है. इस फिल्म को लेकर काफी हो-हल्ला मचा है, क्योंकि इसका नाम ही कुछ ऐसा है, जो कई सवाल पैदा करता है. ठग्स शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में गुंडे, लुटेरे, डाकू और हत्यारों की तस्वीर सामने आती है.

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जमीन पर कब्जा करने के चक्कर में अंग्रेजों ने एक चाल चली  

 जानकारों की मानें तो भारत में ठग जाति घने जंगलों में रहती थी. वे कोई चोर, लुटेरे, डकैत डाकू नहीं थे. जब अंग्रेजों ने भारत पर धीरे-धीरे अपना कब्जा जमाना शुरू किया, तो ये ठग ही थे, जिन्होंने उनका पुरजोर विरोध किया, क्योंकि अंग्रेज उन जंगलों को खत्म करने पर तुले थे, जिसमें ये पीढ़ियों से रह रहे थे. जमीन पर कब्जा करने के चक्कर में अंग्रेजों ने एक चाल चली और इनकी छवि खराब करने के लिए ऐसी किताबें छापी, जिसमें इन्हें डकैत, लुटेरे और हत्यारा बताया गया.  इसके लिए उन्होंने एट्रोसिटी लिटरेचर का सहारा लिया गया. ऐसी ही एक किताब कन्फेशन्स ऑफ ए ठग 1839 में फिलीप मेडोज टेलर ने लिखी, जिसमें ठग्स को कुख्यात लुटेरा, हत्यारा और डकैत बताया गया.  इस किताब को आज भी ठग जाति से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़कर देखा जाता है. ये किताब ही नहीं, ब्रिटिश संसद ने 1871 में क्रिमिनिल ट्राइब्स एक्ट पारित किया.  जिसके तहत भारत की कुछ चिन्हित जनजातियों को सामूहिक रूप से मारने का अधिकार अंग्रेजों को दिया गया. इसमें दुधमुंहे बच्चे भी शामिल थे.

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क्रिमिनिल ट्राइब्स एक्ट की आड़ में अंग्रेजों ने ठग के अलावा जनजातियों पर जमकर जुल्म ढाये

क्रिमिनिल ट्राइब्स एक्ट की आड़ में अंग्रेजों ने ठग के अलावा कई जनजातियों पर जमकर जुल्म ढाये.  बड़े पैमाने पर इनका कत्लेआम किया गया.  ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि जंगल में रहने वाले ये आदिवासी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं थे. ऐसे में इन्हें खत्म करने के इरादे से अंग्रेजों ने मनमाने कानून बनाये और उसकी आड़ में भारत पर कब्जा जमाने के अपने नापाक मंसूबों को अंजाम दिया. इस सामूहिक नरसंहार को सही साबित करने के लिए ब्रिटिश संसद ने कई लेखकों को आर्थिक सहयोग दिया, ताकि वो ठग्स के खिलाफ किताबें लिखें और उन्हें इतना बदनाम कर दें कि समाज उन्हें कभी स्वीकार भी कर सके. ये ठीक वैसा ही था, जैसा नेटिव अमेरिकन्स और ऑस्ट्रेलिया के मूल बाशिंदो के साथ अंग्रेजों ने किया था. इसी वजह से आज ठग एक गाली बन चुका है. इसे हिंसा और अपराध के साथ ही जोड़कर देखा जाता है.  

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