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आधार कार्ड के लिए दबाव बनाना पड़ेगा महंगाः कंपनी को देना पड़ सकता है एक करोड़ का जुर्माना

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट और भारतीय टेलिग्राफ एक्ट में संशोधन को मंजूरी

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New Delhi:  आधार कार्ड की अनिवार्यता को लेकर मोदी सरकार ने कुछ अहम फैसले लिए हैं. अब मोबाइल फोन के लिए सिम कार्ड खरीदना या बैंक में खाता खुलवाने के लिए आधार कार्ड जरुरी नहीं है. यह पूरी तरह से आपकी इच्छा पर निर्भर है कि आप आधार कार्ड देना चाहते हैं या नहीं. अगर बैंक या कोई कंपनी पहचान और पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड को लेकर दबाव बनाती है, तो वो उसे महंगा पड़ सकता है. इसके लिए बैंक और टेलिकॉम कंपनियों को एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है.  इतना ही नहीं ऐसा करने वाले कंपनियों के कर्मचारी को 3 से 10 साल तक की सजा भी हो सकती है. केंद्र सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट और भारतीय टेलिग्राफ एक्ट में संशोधन कर इस नियम को शामिल किया है. मोदी कैबिनेट ने इस संशोधन को सोमवार को मंजूरी दी थी.

डेटा लीक पर 50 लाख फाइन, 10 साल की सजा

प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट और भारतीय टेलिग्राफ एक्ट में हुए संशोधनों के अनुसार, आधार ऑथेंटिकेशन करने वाली कोई संस्था अगर डेटा लीक के लिए जिम्मेदार पाई जाती है तो 50 लाख तक का फाइन और 10 साल तक की सजा हो सकती है. हालांकि, इन संशोधनों को फिलहाल संसद की मंजूरी मिलना बाकी है.

सरकारी सूत्रों की मानें तो सुप्रीम कोर्ट के हाल के आदेश को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह फैसला लिया गया है. ज्ञात हो कि उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि यूनिक आईडी को सिर्फ वेलफेयर स्कीमों के लिए ही इस्तेमाल किया जा सकता है.

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