न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

अंधविश्वास में जकड़ा है गांव, भूत के डर से न तो होती है खेती और न बजती है शहनाई

164

Sonu Kumar

eidbanner

Chatra : राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में शुमार चतरा के अति पिछड़े लावालौंग प्रखंड अंतर्गत रिमी पंचायत का पशहंग गांव एक अजीब से डर के साये में जी रहा है. यहां न तो बच्चों की शिक्षा के लिए स्कूल की व्यवस्था है और न ही आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र की. शिक्षण संस्थान और स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम इस गांव के लोग आज अंधविश्वास में जकड़े हुए हैं. स्थिति यह है कि आज के डिजिटल युग में भी यहां के लोग भूत-प्रेत के डर से न खेती-बारी कर रहे हैं और न ही अपनी बेटियों की शादी ही कर रहे हैं.

तीन साल से न खेती हुई है न किसी बेटी की उठी है डोली

इस गांव में भूत का आतंक इस कदर हावी हो चुका है कि यहां पिछले तीन सालों से न तो किसी किसान के घर में एक छटाक अनाज आया है और न ही किसी के घर में शहनाई बजी है. सबसे भयावह स्थिति तो गांव की बेटियों की हो गयी है, जो शादी की उम्र रेखा पार करने के बाद भी अपने घरों में महज अंधविश्वास के जाल में फंसकर कुंवारी बैठी हैं. इसी प्रकार इस गांव में भूत के भय के कारण पिछले तीन वर्षों से खेती तक नहीं हुई है. ऐसा नहीं है कि गांव के लोग अपनी बेटियों की शादी करने में सक्षम नहीं हैं. घर से सुखी-संपन्न होने के बावजूद ये लोग न तो अपनी बेटियों की शादी करवा पा रहे हैं और न ही अपना जीवन यापन करने के लिए खेती-बारी कर रहे हैं.

क्या है मामला

इस गांव में मान्यता है कि बगैर ग्राम देवता के पुजारी पाहन को खुश किये न तो यहां बेटियों की शादी हो सकती है और न ही खेती-बारी. जब तक पाहन द्वारा ग्राम देवता और कुलदेवता की पूजा विधि-विधान से नहीं की जाती है, तब तक किसी भी प्रकार का विधि-विधान और कार्य शुभ नहीं माना जाता है. ग्रामीणों के अनुसार बगैर पाहन की सहमति के किसी भी प्रकार के शुभ कार्य और खेती-बारी का काम होता है, तो बड़ी आपदा गांव पर आन पड़ती है. अंधविश्वास है कि बगैर पाहन को खुश किये अगर घर में शहनाई बजती है और बेटियों की डोली उठती है, तो डोली के साथ ही किसी न किसी की अर्थी भी उठ जाती है. यही हाल खेती-बारी का भी है. जब तक पाहन खेतों में जाकर पूजा-अर्चना नहीं करते हैं, तब तक खेती शुभ नहीं मानी जाती है. ग्रामीणों का मानना है कि इससे गांव का भूत उनका कुछ न कुछ बुरा जरूर करेगा.

दो पाहनों के विवाद में पिस रहा गांव

Related Posts

चतराः आर्थिक तंगी से जूझ रहे पारा शिक्षक की उचित इलाज के अभाव में मौत

चार महीनों से बाकी है पारा शिक्षकों का मानदेय

mi banner add

दरअसल, वर्षों पूर्व इस गांव के लोगों ने एक पाहन को गांव में खेती योग्य जमीन देकर पूजा-अर्चना के उद्देश्य से बसाया था. लेकिन, वह पाहन चार वर्ष पूर्व किसी कारणवश गांव छोड़कर चला गया. उसके बाद गांव के लोगों ने मिलकर दूसरे पाहन को बुलाकर कुलदेवता व ग्राम देवता की पूजा-अर्चना का दायित्व सौंपा. पहले पाहन के जाने के बाद ग्रामीणों द्वारा उसे उपलब्ध करायी गयी खेती योग्य भूमि अब ग्रामीणों ने दूसरे पाहन को दे दी. इसके बाद गांव में आये दूसरे पाहन ने अपना काम शुरू ही किया था कि पहले पाहन ने आकर उससे विवाद शुरू कर दिया. इसके कारण ग्रामीणों के आग्रह पर गांव पहुंचे दूसरे पाहन ने भी काम छोड़ दिया. लेकिन, दूसरे पाहन के काम छोड़ने के बाद भी गांव छोड़कर गया पाहन काम करने को तैयार नहीं हुआ. ऐसे में कुल देवता और ग्राम देवता की पूजा नहीं हो पा रही है. अब कुल देवता और ग्राम देवता की पूजा के बगैर यहां न तो खेती-बारी हो रही है और न ही कुंवारी बेटियों की शादी. ग्रामीणों की मानें, तो अगर बगैर पूजा-अर्चना के बेटियों की शादी कर दी जाती है, तो गांव का भूत भी उनके साथ-साथ जायेगा और बेटियों के ससुराल में जाकर कुछ न कुछ अशुभ कार्य कर देगा.

डर इतना कि बेटों की भी शादी गांव के बाहर मंदिरों में होती है 

गांव में स्थिति यह बनी हुई है कि अगर परिस्थितिवश किसी के घर बेटे की शादी होती है, तो वह भी गांव से बाहर किसी मंदिर में होती है. क्योंकि, अंधविश्वास इस कदर हावी है कि अगर बेटे की भी बारात निकलती है, तो कोई विपत्ति गांव पर जरूर आ जायेगी. ग्रामीण गांव में भूत के इस भय से इस कदर भयभीत हैं कि वे उस अंधविश्वास से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और न ही उन्हें इस अंधविश्वास से बाहर निकालने के लिए सरकार या किसी संस्था की ओर से ही कोई पहल की जा रही है.

इसे भी पढ़ें- कर्ज में डूबे पिठोरिया के 2000 किसान, झेल रहे 70 करोड़ का नुकसान

इसे भी पढ़ें- 374 करोड़ का भारी-भरकम बजट, फिर भी एम्स जैसी सुविधा उपलब्ध कराने में नाकाम रिम्स

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: