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60 ‘बड़े’ लोगों का सिंडिकेट करा रहा पशुओं की तस्करी; अब रात नहीं, दिन दहाड़े कारोबार

Manoj Mishra 

Dhanbad :  झारखंड में सरकार ने पशु तस्करी रोकने के लिए कड़े नियम बनाये हैं, सख्त आदेश दिये हैं लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि सिस्टम के लोग ही इस कारोबार को बड़े पैमाने पर चला रहे हैं.

झारखंड गोवंशीय पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 धनबाद और पड़ोसी जिले गिरिडीह में पूरी तरह बेअसर साबित हो रहा है. रात के अंधेरे में तो क्या, अब दिन के उजाले में खुलेआम तस्करी हो रही है.

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धनबाद जिले से गुजरनेवाले जीटी रोड (कोलकाता-नयी  दिल्ली फोरलेन) से बड़े पैमाने पर जानवरों को पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश भेजने का धंधा चल रहा है.

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हर दिन गुजरते हैं सौ ट्रक

धनबाद जिले की सीमा के अंदर पड़ने वाले थानों की पुलिस की कमाई का भी यह बड़ा जरिया बना हुआ है. हर दिन  जानवर लदे 100 से अधिक ट्रक धनबाद जिले से जीटी रोड होकर पश्चिम बंगाल में प्रवेश करते हैं.

निरसा विधायक अरूप चटर्जी का कहना है कि झारखंड गोवंश तस्करी का हब बनता जा रहा है. यहां सालाना 5000 करोड़ का कारोबार हो रहा है. धनबाद जिले में जीटी रोड गौ तस्करी का केंद्र है.  इसको रोकने के लिए जिस समिति का गठन हुआ आज वो भी स्पेशल ब्रांच की जांच के दायरे में है.

एक अनुमान के अनुसार पशु तस्करी रोकने के लिए जिम्मेवार पशु क्रूरता निवारण समिति (एसपीसीए) से जुड़े अफसरों और जीटी रोड के  तोपचांची, राजगंज, बरवाअड्डा, गोविंदपुर, निरसा, गलफरबाड़ी और मैथन में प्रतिमाह करीब तीन करोड़ की वसूली की जाती है. यह राशि घटती-बढ़ती रहती है.

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कोलकाता का ईलम बाजार है प्रमुख पड़ाव

सिंडिकेट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, धनबाद के रास्ते पशु लदे जो ट्रक बंगाल जाते हैं, उनका प्रमुख पड़ाव कोलकाता का पंडुवा और ईलम बाजार होता है. दोनों बाजारों में हर रोज हजारों पशुओं का कत्ल होता है.  फिर उसके मांस की आपूर्ति कई इलाकों में होती है.

बांग्लादेश में भी भारतीय पशुओं की काफी डिमांड है. वहां से कई देशों में इस प्रतिबंधित मांस की सप्लाई की जाती है.

जानकारों का कहना है कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम पश्चिम बंगाल में लागू नहीं है. इसी कारण झारखंड में तो वाहनों में पूरी तरह से पैक कर जानवरों को ले जाया जाता है, पर मैथन चेकपोस्ट के बाद बंगाल में प्रवेश करते ही तिरपाल को खोल दिया जाता है. फिर उन गाड़ियों से कहीं पूछताछ नहीं होती.

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 60 लोगों का बड़ा सिंडिकेट

धनबाद के जीटी रोड में पशु लदे वाहनों को राज्य की सीमा से पार पहुंचाने का काम सिंडिकेट करता है. 60 लोगों के सिंडिकेट में आधे से ज्यादा एक बड़े राजनैतिक दल से जुड़े लोग हैं.

ये लोग लंबे समय से यूपी-बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक पशु तस्करी का संचालन करते आ रहे हैं. धनबाद के तीन नेताओं के नाम भी इनमें शामिल हैं. इन तीनों की शह पर राजगंज से मैथन तक जीटी रोड को तीन हिस्सों में बांटकर पशु लदे वाहनों से निश्चित रकम वसूली जाती है.

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बंटा हुआ है नेताओं का क्षेत्र

एक नेता प्रति वाहन 45 हजार की वसूली करता है. उगाही गयी राशि से संबंधित थानों और एसपीसीए डॉक्टर को बंधी-बंधाई रकम दी जाती है.

एक सिंडिकेट का अधिकार क्षेत्र राजगंज से गोविंदपुर तक है. इसमें एक दबंग नेता के साथ कुछ छुटभैए नेता और लठैतों का एक दल है. वहीं तेतुलिया से मैथन चेकपोस्ट तक की कमान दूसरे नेता के पास है.

इस धंधे से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का दावा है कि इस काम में पुलिसकर्मियों की भी मौन सहमति रहती है जिसके बदले में उन्हें तीन लाख प्रतिमाह की दर से नजराना दिया जाता है.  डीएसपी व इंस्पेक्टरों को एक से डेढ़ लाख रुपये और दो से तीन हजार रुपये मिलते हैं.

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डिबूडीह का एक होटल है ऑफिस 

बंगाल की सीमा शुरू होते ही डिबूडीह में एक होटल है जो सिंडिकेट के ऑफिस के तौर पर काम करता है. बताया जाता है कि होटल में मवेशी लदे वाहन रुकते हैं, तिरपाल खोला जाता है. होटल मालिक ही चेकपोस्ट से लेकर थाना तक को मैनेज करता है.

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बड़ा बाजार है बांग्लादेश 

बांग्लादेश तक ले जाये जानेवाले प्रतिबंधित मवेशी ज्यादातर यूपी के इटावा, बिहार के चौसा (बक्सर) और बख्तियारपुर तथा झारखंड के गिरिडीह, पलामू और गढ़वा के होते हैं.

सिंडिकेट के लोग दूध नहीं देने वाले पशुधन को किलो के भाव से खरीदते हैं और ऊंची कीमत पर तस्करों के हवाले कर देते हैं.

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रास्ता बदलने में माहिर है सिंडिकेट 

मवेशी लदे वाहन आम तौर पर मैथन चेकपोस्ट से होकर बंगाल पहुंचते हैं. किसी कारण वहां कोई दिक्कत आती है, तो सिंडिकेट टुंडी रोड होते हुए दुमका के रास्ते बंगाल की सीमा में गाड़ी प्रवेश करा देता है तो कभी महुदा, चास होते हुए पुरुलिया पहुंचा देता है.

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‘सिंह’ नाम का आदमी करता है सबकुछ मैनेज

धनबाद में पुलिस, नेता, चेक पोस्ट आदि को मैनेज करने का जिम्मा सिंह नामक व्यक्ति का है. एसपीसीए निरीक्षकों को बोलचाल की भाषा में बकरी इंस्पेक्टर व मवेशी डॉक्टर बोला जाता है. सिंह भी एक एसपीसीए ही है.

खाकी वरदी में कुछ लोगों के साथ बकरी इंस्पेक्टर रात को जीटी रोड पर देखे जाते हैं. आरोप है कि जानवर तस्करों  से वसूली जानेवाली राशि में अच्छा-खासा हिस्सा बड़े लोगों तक यहीं से पहुंचता है.

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एक ट्रक पर रोज 50 हजार घूस में खर्च 

एक अनुमान के मुताबिक तस्कर एक ट्रक पर प्रतिदिन 50 हजार रुपये घूस में खर्च करते हैं.

पशु तस्करी के इस खेल में बिहार के गया जिले का रहने वाला खान, पश्चिम बंगाल के आसनसोल निवासी  खान, बराकर डिबुडीह चेकपोस्ट के समीप रहने वाला घोष, आसनसोल निवासी लंबू, कुल्टी निवासी श्यामा, झारखंड के धनबाद जिले के चिरकुंडा निवासी सिंह, पूर्वी टुंडी का रहने वाला अंसारी, बरवाअड्डा का रहने वाला अंसारी, राजनीतिक दल के नेता मंडल और मिश्र सहित दो दर्जन लोग शामिल हैं.

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