BiharLead NewsLITERATURERanchi

पटना के सेंट जेवियर्स स्कूल में पढ़े थे सूटेबल बॉय विक्रम सेठ

जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi :   विक्रम सेठ का नाम मैंने पहली बार तब सुना था जब उनकी किताब ए सूटेबल बॉय प्रकाशित हुई थी. उन दिनों मैं दिल्ली में था. यह मोटी सी किताब देखी पर अंग्रेजी में इतनी मोटी किताब पढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पाया. इसके बदले निर्मल वर्मा के कई छोटे उपन्यास पढ़े थे.

खैर एक बात और मैंनें गौर की है कि अंग्रेजों ने हमारे देश पर जो दो सौ साल राज किया था उससे जो हमारा अपमान हुआ उसका बदला एक दूसरे तरीके से हमारे अंग्रेजी लेखक अनजाने में ही ले रहे हैं. आप अगर ध्यान देंगे तो पाएंगे कि भारतीय और भारतीय मूल के अंग्रेजी लेखकों ने अंग्रेजों को उनकी खुद की मातृभाषा अंग्रेजी में पछाड़ दिया है. आपको कुछ नाम गिनवाता हूं सलमान रुश्दी, वीएस नॉयपाल, विक्रम सेठ, अमिताव घोष, नीरद चंद्र चौधरी, अरुंधति राय व झुंपा लाहिड़ी आदि. खैर अब चलते हैं मूल मुद्दे पर विक्रम सेठ के जीवन और कृतित्व के बारे में जानते हैं.

Catalyst IAS
ram janam hospital

इसे भी पढ़ें :वापस लौटे रामेश्वर ने कहा 12वें मंत्री पद का दावा जायज, सरकार में खटास नहीं

The Royal’s
Pushpanjali
Sanjeevani
Pitambara

मां लीला सेठ हाई कोर्ट की पहली महिला जज थीं

विक्रम सेठ का जन्म कलकत्ता  में 20 जून 1952 को हुआ था. उनके पिता प्रेम नाथ सेठ, बाटा शूज़ कंपनी में काम करते थे. उनकी मां लीला सेठ  दिल्ली उच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी थीं. विक्रम ने सेंट माइकल हाई स्कूल व सेंट जेवियर्स हाई स्कूल पटना से प्रारंभिक शिक्षा ली. इसके बाद देहरादून के प्रसिद्ध दून स्कूल में अध्ययन किया. वहां उन्होंने द दून स्कूल वीकली संपादित किया.

स्नातक होने के बाद, सेठ अपने ए-लेवल को पूरा करने के लिए इंग्लैंड के टोंब्रिज स्कूल गए. इसके बाद ऑक्सफोर्ड कॉर्पस क्रिस्टी कॉलेज में दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र पढ़ा. वहां से वे स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय (यूएस) में अर्थशास्त्र में पीएचडी करनी चाही हालांकि इसे कभी पूरा नहीं किया.

लंदन में कई सालों तक रहने के बाद, सेठ इंग्लैंड के सैलिसबरी के पास रहते हैं. उन्होंने 1996 में एंग्लिकन कवि जॉर्ज हर्बर्ट के घर को खरीदा और पुनर्निर्मित किया था.

इसे भी पढ़ें :आइआइटी धनबाद के एमएससी कोर्स में एडमिशन शुरू, जैम स्कोर होगा आधार

अच्छे कवि भी हैं विक्रम

विक्रम सेठ एक उपन्यासकार होने के साथ-साथ एक अच्छे कवि भी हैं. उनकी कविताएं पांच खंडों में प्रकाशित हुई हैं. इनमें से पहला, मैपिंग्स को 1980 में खुद प्रकाशित किया था. इनकी अन्य कविता संग्रहों में 1985 की द हम्बल एडमिनिस्ट्रेटर्स गार्डन, 1990 की ऑल यू हू स्लीप टुनाइट, 1991 की बीस्टली टेल्स और 1992 की थ्री चाइनीज पोएट्स आदि शामिल हैं. उन्होंने यात्रा लेखन भी किया है. उनकी पुस्तक ट्रेवल्स थ्रू सिंकियांग एंड तिबेट के लिए बहुत प्रसिद्ध है, जो 1983 में प्रकाशित हुई थी.

इसे भी पढ़ें :शिवसेना- कांग्रेस में दरार, उद्धव बोले- कोई अकेले लड़ने की बात करेगा तो लोग जूतों से पीटेंगे

पहला उपन्यास ‘द गोल्डन गेट’

1986 में प्रकाशित उनका उपन्यास ‘द गोल्डन गेट’ अद्वितीय था क्योंकि यह पूरी किताब कविता के रूप में थी. ये सिलिकॉन वैली के लोगों के जीवन के बारे में बताती है. यह उपन्यास अलेक्सांद्र पुश्किन का कार्य ‘यूजीने ओनेगिन’से प्रेरित है. यह किताब काफ़ी सफ़ल रही और साहित्यिक प्रेस से उन्हें काफ़ी प्रशंसा भी प्राप्त हुई.

1999 में, उनका  उपन्यास इक्वल म्यूजिक ‘ प्रकाशित हुआ था. कहानी एक पेशेवर वायलिनिस्ट माइकल और उसके प्यार जूलिया( पियानो वादक) के आसपास घूमती है. उपन्यास संगीत प्रशंसकों द्वारा पसंद किया गया था.विक्रम सेठ के संगीत के विवरण की सटीकता के लिए सराहना की गई थी.

इसे भी पढ़ें :BIG NEWS : केंद्रीय कर्मचारियों की पेंशन को लेकर किया गया बड़ा बदलाव, रखी गई हैं ये शर्तें

शोध के लिए चीन गए थे

1980 से 1982 तक विक्रम शोध के लिए चीन चले गए थे. हालांकि जिस डॉक्टरेट शोध प्रबंध की सामग्री इकट्ठा करने के लिए चीन में यात्रा की थी उसे कभी लिखा नहीं. जब वो चीन में थे तब नानजिंग यूनिवर्सिटी में शास्त्रीय चीनी कविता और भाषा का अध्ययन किया.

इसे भी पढ़ें :कोरोना की दूसरी लहर में बिहार में 48 बच्चों के सिर से उठा मां-बाप का साया, बढ़ा मानव तस्करी का खतरा

दूसरी किताब ‘फ्रॉम हेवन लेक’

सन 1983 इनकी दूसरी किताब ‘फ्रॉम हेवन लेक’ प्रसिद्ध हुई. इसमें इन्होने उनकी चीन से भारत की यात्रा के बारे में बताया है. समीक्षकों ने इस किताब की प्रशंसा की और उनका कार्य सभी के सामने आया. 1985 में इनकी ‘द अम्बल एडमिनिस्ट्रेटर्स गार्डन’ नामक एक और कविता की किताब प्रकाशित हुई.

1990 में इन्होंने ‘आल यू हु स्लीप टुनाइट’ नामक कविता की किताब लिखी. और 1992 में ‘थ्री चायनीज पोएट्स’ नाम की कविता की पुस्तक लिखी है. 1992 में सेठ ने बच्चों के लिए एक किताब लिखी जिसका नाम ‘बीस्टली टेल्स फ्रॉम हेरा एंड देयर’ है. इसमें प्राणियों के बारे में दस कहानिया है.

1993 में आयी सबसे प्रसिद्ध किताब

1993 में इनकी सबसे प्रसिद्ध किताब आयी वो थी ‘अ सूटेबल बॉय’. ये कहानी स्वतंत्रता मिलने के बाद एक परिवार पर आधारित है. इस किताब में 1349 पन्ने है और ये इंग्लिश भाषा की लम्बी किताबों में से एक है. 1994 में इनकी एक और किताब आयी और वो थी ‘द फ्रॉग एंड नाइटिंगेल’.

इसे भी पढ़ें :

अपने नाना के भाई का जीवन उकेरा टू लाइवस में

टू लाइव्‌स’ यानी दो जीवन की चर्चा काफी जोरों पर रही. सेठ और उनके उपन्यास को लेकर मची खास हलचल की वजह यह थी कि यह एक साथ कई दुनियाएँ समेटता है. इसमें हिटलर के समय का जर्मनी, द्वितीय विश्व युद्ध है तो भारत के स्वाधीनता आंदोलन का समय भी. 1970 का ब्रिटेन और फिलिस्तीन, इसराइल भी. मगर यह उपन्यास आत्मकथात्मक है और संस्मरणात्मक भी.  इसके कथानक के रूप में विक्रम सेठ ने अपने नाना के छोटे भाई शांतिबेहारी सेठ और उनकी जर्मन पत्नी हेनी के जीवन की कथा को चुना है. शांति अंकल जो एक भारतीय हैं. जो डेंटिस्ट के रूप में जर्मनी गए. वहाँ हेनी के माता-पिता के घर में किराए से रहे. जब शांति जर्मनी पहुँचे तो जर्मन नहीं जानते थे. उनके आगमन पर हेनी ने कहा था- ‘निम डेन श्वारजेन, निश्ट (इस काले आदमी को यहाँ मत रहने दो).’ मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था. हिटलर कालीन जर्मनी में हेनी की माँ और बहन लोला यातना शिविरों में मर गईं. हेनी लंदन में थीं सो बच गईं.

इधर शांति सेठ ब्रिटिश आर्मी डेंटल यूनिट में मोर्चे पर गए. वहाँ बम धमाके में अपना एक हाथ खो बैठे. इन दो अकेलों ने बाद में विवाह कर लिया. विक्रम सेठ की कहानी लंदन में अपने ग्रेट अंकल-आंट के साथ बिताई किशोरावस्था से शुरू होती है और द्वितीय विश्वयुद्ध काल में जाती है. अपनी इस कृति में विक्रम सेठ ने जर्मन-यहूदी स्त्री ‘हेनी’ के व्यक्तित्व और व्यवहार का खाका खींचा है और लकड़ी के हाथ से भी सफल डेंटिस्ट बने रहने वाले अंकल शांति सेठ का भी.

इसे भी पढ़ें :BSNL का 90 दिन वैलिडिटी वाला धमाकेदार प्लान लांच, Jio से 2.4 गुना ज्यादा मिलेगा डेटा

साहित्य संसार :

  • द गोल्डन गेट (1986)
  • अ सूटेबल बॉय (1993)
  • आन इक्वल म्यूजिक (1999)
  • अरिओन एंड द डॉलफिन (1994)
  • फ्रॉम हेवन लेक: ट्रेवल्स थ्रू सिंकियांग एंड तिबेट (1983)
  • टू लाइव (2005)
  • द रिवेरेड अर्थ (2005)
  • द अम्बल एडमिनिस्ट्रेटर्स गार्डन (1985)
  • मप्पिंग्स (1986)
  • आल यू हु स्लीप टुनाइट (1990)
  • बीस्टली टेल्स (1991)
  • थ्री चायनीज पोएट्स (1992)
  • समर रिक्विम: अ बुक ऑफ़ पोयम्स (2012)
  • द फ्रॉग एंड नाइटिंगेल (1994)

इसे भी पढ़ें :जानें केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से क्यों कहा, कोरोना से मौत पर नहीं दे सकते 4 लाख मुआवजा

पुरस्कार व सम्मान

थॉमस कुक ट्रैवल बुक अवार्ड (1983) (हेवेन लेक: ट्रेवल्स थ्रू सिंकियांग एंड तिब्बत); कॉमनवेल्थ काव्य पुरस्कार (एशिया) (1985) (द विनम्र प्रशासक गार्डन); कॉमनवेल्थ राइटर्स पुरस्कार – कुल मिलाकर विजेता, सर्वश्रेष्ठ पुस्तक (1994) (ए सूटेबल ब्वॉय); एसएच स्मिथ लिटरेरी अवार्ड (1994) (ए सूटेबल बॉय); क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड्स (1999) (एन इक्वल म्यूजिक ); बेस्ट बुक / नोवेल (2001) (एन इक्वल म्यूजिक) के लिए ईएमएमए (बीटी जातीय और बहुसांस्कृतिक मीडिया पुरस्कार) साहित्य में योगदान के लिए पद्म श्री (2007).

इसे भी पढ़ें :125 करोड़ में बनेगी कुडू-घाघरा रोड, जल्द होगा टेंडर फाइनल. केंद्र को भेजा गया प्रस्ताव

Related Articles

Back to top button