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दो लाख की आबादी में एक राजकीय औषधालय, जहां इलाज करते हैं सिर्फ दो डॉक्टर और एक एएनएम

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  • छह बेड के औषधालय में नाइट शिफ्ट की नहीं है कोई व्यवस्था
  • ओपीडी खुलता है सुबह आठ से दो बजे तक, बाद में मरीज लौट जाते हैं
  • क्षेत्र में न ही कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और न ही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

Ranchi: राज्य के पंद्रह जिलों में अटल क्लिनिक खोले जा रहे हैं. जबकि राज्य सरकार राज्य में डॉक्टरों की कमी को पूरा नहीं कर पा रही. खुद सरकार की ओर से संचालित राजकीय औषधालयों की स्थिति तो और भी बदतर है. बोकारो के बालीडीह स्थित राजकीय औषधालय भी अब दम तोड़ने की स्थित में है. जबकि इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए दूसरा कोई विकल्प नहीं है.

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स्वास्थ्य विभाग की मानें तो इस अस्पताल में मात्र दो डॉक्टर और एक एएनएम हैं, जो मरीजों का इलाज करते हैं. नाइट और डे शिफ्ट के लिए यहां कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. अस्पताल बोकारो स्थिति सदर अस्पताल से लगभग 12 किलोमीटर की दूरी पर है. ऐसे में स्थानीय मरीजों के इलाज का एकमात्र साधन राजकीय औषधालय है. छह बेड का यह औषधालय इस स्थिति में है कि अगर यहां कोई भर्ती हो जाये तो रात में इलाज करने के लिए कोई डॉक्टर न मिले. कक्ष सेवक मात्र 11 हैं. इसे भी पढ़ें – 15 IAS अधिकारियों का हुआ तबादला, रांची के एसडीएम बने लोकेश मिश्रा, राहुल कुमार सिन्हा बने गिरिडीह के डीसी

दो लाख की आबादी में एक मात्र औषधालय

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जिस क्षेत्र में यह औषधालय स्थित है. वहां की आबादी दो लाख है. न ही बालीडीह में कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है और न कोई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र. ऐसे में मरीजों के लिए एकमात्र साधन ये औषधालय है. ओपीडी में मरीजों की संख्या अच्छी खासी है. इसके बाद भी औषधालय का ओपीडी सुबह आठ बजे से दिन के दो बजे तक ही खुलता है. जानकारी के अनुसार अस्पताल में संसाधानों की कोई कमी नहीं है. विगत दिनों विधायक मद से अस्पताल की मरम्मत करायी गयी, लेकिन डॉक्टरों और नर्सों की कमी के कारण स्थानीय निवासियों को परेशानी होती है.

विधानसभा में उठाया गया है मामला

हालांकि यह मामला विधायक बिरंची नारायण की ओर से विधानसभा सत्र के दौरान उठाया गया. जिसमें खुद स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने स्वीकारा की औषधालय में स्टाफ की कमी है और न ही आसपास कोई वैकल्पिक स्वास्थ्य सुविधा है. विधायक ने यह भी पूछा कि क्या भविष्य में क्षेत्र में कोई दूसरा स्वास्थ्य विकल्प खोलने की योजना बनायी जा रही है, लेकिन इस पर मंत्री ने कोई जवाब नहीं दिया. इस मामले में विधायक बिरंची नारायण ने कहा कि क्षेत्र में आबादी अधिक है और सदर अस्पताल से क्षेत्र की दूरी काफी अधिक है. ऐसे में प्रयास किया जा रहा है कि कम से कम एक डॉक्टर और कुछ नर्सों की नियुक्ति की जाये, जिससे नाइट शिफ्ट चले.

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