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कैंप जेल में रखी गयी गर्भवती रसोइयाकर्मी को रिम्स में किया गया भर्ती

देर शाम कैंप जेल से महिलाओं को किया गया रिहा

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Ranchi : आंदोलनरत रसोइयाकर्मियों को प्रशासन की ओर से खेलगांव कैंप जेल ले जाया गया था. इसी कैंप जेल में रखी गयी बंदगांव निवासी एक गर्भवती महिला को शुक्रवार को प्रसव पीड़ा हुई. दोपहर करीब 12 बजे महिलाओं ने कैंप में उपस्थित पुलिस बल को इसकी सूचना दी और आनन-फानन में महिला को सदर अस्पताल पहुंचाया गया. इलाज के बाद महिला की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसे रिम्स रेफर कर दिया गया. कोषाध्यक्ष अनिता देवी ने जानकारी दी कि दो दिनों तक महिलाओं को कैंप जेल में रखा गया, जबकि आंदोलनरत महिलाओं में पांच महिलाएं गर्भवती थीं. अब भी चार महिलाएं गर्भवती हैं. उन्होंने कहा कि महिला को अस्पताल में भर्ती तो करा दिया गया है, लेकिन डॉक्टर की ओर से खून की कमी होने की बात कही गयी है. महिला के परिजनों के देर शाम तक नहीं पहुंचने पर रसोइया संघ की महिलाओं ने ही उसकी देखरेख की.

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कैंप जेल से छोड़ा गया

रसोइयाकर्मियों को शुक्रवार की देर शाम कैंप जेल से छोड़ दिया गया. ज्ञात हो कि राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम में महिलाओं ने आत्मदाह करने की चेतावनी दी थी. इसके कारण महिलाओं को बुधवार रात ही कैंप जेल ले जाया गया था. दो दिन महिलाओं को कैंप जेल में रखने के बाद अब शुक्रवार को महिलाओं को राजभवन के समक्ष वापस लाया गया. हालांकि, महिलाओं को कैंप जेल से छूटने के बाद भी काफी देर बूटी मोड़ में अपने सामान के साथ खड़े रहना पड़ा, क्योंकि वाहन चालक बूटी मोड़ के आगे गाड़ी पकड़े जाने के डर से नहीं आना चाह रहा था.

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काला बिल्ला लगाकर करेंगी काम

संघ की ओर से शुक्रवार को बैठक की गयी, जिसकी अध्यक्षता अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने की. इस दौरान संघ ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि राज्य भर में रसोइयाकर्मी मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री का पुतला दहन करेंगे. वहीं, अध्यक्ष अजीत प्रजापति ने कहा कि राजभवन के समक्ष आंदोलन जारी रहेगा, लेकिन जो रसोइयाकर्मी बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए काम में लौटी हैं, वे काला बिल्ला लगाकर काम करेंगी. उन्होंने कहा कि ऐसा एक सप्ताह तक किया जायेगा.

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