Opinion

अमर सिंह जैसी शख्सियत का ठीक से कंडोलेंस नहीं हुआ

Hasan Jamal Zaidi

Jharkhand Rai

अमर सिंह जी की कंडोलेंस वक्त की आपा धापी में रह गया. हम भी नहीं लिख पाए उनपर. जबकि उनका स्टाइल मुझे पसंद था. समय और खबरें ही ऐसी चल रही थी के उन्हें उतना स्पेस नहीं मिल पाया. जबकि श्री देवी इस मामले में काफी लकी साबित हुईं. तीन दिन तक मीडिया उनके गाने बजाती रही थी.

अमर सिंह जैसे लोग इतने हल्के भी लिए जाने वाले नहीं थे.‌ लेकिन जिस तरह की उनकी राजनीति थी, उसमें यूज एंड थ्रो का गेम भी चलता है. जबकि एक टाइम ऐसा भी था जब UPA की सरकार तक अमर सिंह ने गिरने से बचाई थी.

अमेरिका से परमाणु करार करने के कारण वामपंथियों ने UPA से समर्थन वापस ले लिया था. उस समय अमर सिंह ने ही सपा को राजी किया था. जबकि मुलायम सिंह जी ने बाद में इसे अपनी गलती माना था. कहा थाः हम कुछ बदले में उनसे ले भी नहीं पाए. कुछ लोग ही अमर सिंह जैसे होते हैं. जिनके लिंक और कांटेक्ट आम लोग नहीं समझ पाते.

Samford

इसे भी पढ़ें- तो क्या पीएम मोदी ने चीनी घुसपैठ पर “देश से झूठ” बोल कर चीन को फायदा पहुंचाया!

वो बिल क्लिंटन तक को लखनऊ ला सकते थे. सरकारें बचा ओर गिरा सकते थे. हालांकि उनपर क्लिंटन फाउंडेशन को फंड देने के आरोप भी लगे. लेकिन वो इससे इंकार करते रहे.

एक टाइम में जब समाजवादी पार्टी खड़ी हो रही थी और नेता जी किसी ऐसी तोड़-जोड़ वाली और पार्टी कोष को फंड दिलाने वाली शख्सियत को ढूंढ रहे थे. तब अमर सिंह की बिल्कुल सही समय पर एंट्री हुई.
उन्होंने बड़े कौशल से कॉरपोरेट ओर बॉलीवुड को राजनीति से जोड़ा. अनिल अंबानी को राज्यसभा में लाये. जया प्रदा, जया भादुड़ी और न जाने कितने फिल्म और स्पोर्टस वालों को जोड़ा.

ये काम राज बब्बर उतने बेहतर ढंग से नहीं कर पा रहे थे. हर आदमी हर तरह का काम नहीं कर पाता. कुछ कामों के लिए कुछ स्पेशल लोग ही होते हैं. किसी भी राजनीतिक पार्टी में नंबर 2 की पंक्ति में रहने वाले नेता नहीं चाहते कि उनके सुप्रीमो के कोई इतना करीब आ जाए, जिससे उनकी वैल्यू कम हो जाए. राज बब्बर और आजम चच्चा, राम गोपाल, मोहन सिंह से यही रटाका था अमर सिंह का.

इसे भी पढ़ें- कोरोना काल में देश के बुद्धिजीवियों व वामपंथियों ने निराश किया, जिम्मेदारी नहीं निभाई

समाजवादी छोड़ने के बाद उन्होंने BJP में भी ट्राई किया. काफी बयान बाजी भी की. लेकिन ये बड़ी पार्टी थी और इसमें उनके वाले हुनर के दिग्गज पहले से स्टेबल थे. इसलिए स्पेस नहीं बन पाया. कुछ उनका स्वास्थ्य भी साथ नहीं दे रहा था. किडनी ट्रांसप्लांट के बाद वो जूझ रहे थे. और वैसे भी किसी दूसरी पार्टी में जाकर वो बात तो नहीं आ पाती.

देखिए, इस तरह के लोगों का सांप्रदायिकता, जाति, धर्म से कोई बहुत ज्यादा लेना-देना नहीं होता. ये तो इन्हें माहौल बनाने के लिए ये सब करना पड़ता है. वो पब्लिक का माइंडसेट जानते हैं. और हर पार्टी की अपनी अलग पब्लिक है. उसी हिसाब से बोलते हैं. ज्यादातर के साथ ऐसा ही है.

जब सपा में थे तो बटला हाउस एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे थे. जब भाजपा में जाने का हिसाब देखा तो उन्हीं अखिलेश यादव को नमाजवादी तक कह दिया जिनका एडमिशन तक खुद करा कर आये थे. तो ये सब चलता रहता है.

इसे भी पढ़ें- मुंबई में क्वॉरेंटाइन किये गये पटना SP विनय तिवारी को BMC ने छोड़ा, रखी कुछ शर्तें

बहुत पहले कहीं पढ़ा था कि ट्विंकल खन्ना ने अमर सिंह से कहा था के वो अक्षय कुमार से बहुत प्यार करती है. उनकी शादी करा दें. वो शादी अमर सिंह जी ने ही करायी थी.

बाकी बिपाशा बसु और अमर सिंह जी का एक ऑडियो टेप भी काफी चर्चित हुआ था. कुल मिला कर नेशनल ओर इंटरनेशनल लेवल के तोड़-जोड़ का एक माहिर खिलाड़ी 64 वर्ष की उम्र में किडनी जैसी बीमारी से जूझते हुए थोड़ा जल्दी चला गया.

देखिए, जो काम करता है. उसके साथ विवाद भी जुड़ते हैं. और गलतियां भी होती है. शायद इन्हीं सब चीजों को ध्यान में रखकर नेता जी ने कहा होगा “लड़के हैं गलतियां हो जाती है.”

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

Advertisement

6 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: