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अपने हुए बेगाने, जोशी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने पीएमओ से एनपीए पर जवाब मांगा

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 NewDelhi :  भाजपा सांसद मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने पीएमओ को नोटिस भेजकर एनपीए पर जवाब मांगा है.  हालांकि समिति में इसे लेकर आम राय नहीं थी. समिति में शामिल भाजपा के सदस्य समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी की कार्रवाई से खुश नहीं बताये जाते हैं. पीएमओ से जवाब मांगे जाने पर राजनीतिक गलियारों में कयास लगने शुरू हो गये हैं कि अब अपने भी आवाज उठाने लगे हैं. इसका मतलब जोखिम वाले कर्ज (एनपीए) पर मोदी सरकार पर विपक्ष के साथ-साथ अब अपने भी बेगाने हो रहे हैं.  खबरों के अनुसार भाजपा के सीनियर नेता और सांसद मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति (एस्टिमेट कमेटी या प्राक्‍कलन समिति) ने एनपीए मसले पर प्रधानमंत्री कार्यालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. समिति  ने  पूछा कि  एनपीए के संदर्भ में आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन द्वारा दी गयी सूचना पर अब तक क्या कार्रवाई हुई है.

बता दें कि रघुराम राजन ने अपने कार्यकाल के दौरान पीएमओ को बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का लोन लेकर  नहीं चुकाने वाले बड़े औद्योगिक घरानों की सूची सौंपी थी.  यह राशि अब एनपीए में तब्दील हो चुकी है. खबरों के अनुसार  समिति ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर की सूची पर कानूनी कार्यवाही के बारे में भी जानकारी मांगी है. समिति ने एनपीए को नियंत्रित करने के लिए रघुराम राजन से भी मदद करने को कहा है.

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 ऊर्जा व कोयला मंत्रालय को भी नोटिस

पीएमओ के अलावा संसदीय समिति ने कोयला  व ऊर्जा मंत्रालय को भी नोटिस जारी किया है. दोनों मंत्रालयों से बढ़ते एनपीए पर तलब किया गया है. बता दें कि रघुराम राजन ने अपने लिखित जवाब में कोयला और ऊर्जा क्षेत्र में लगातार एनपीए बढ़ने की बात कही थी. आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने समिति को जानकारी दी थी कि बैंकिंग सेक्टर में धोखाधड़ी रोकने के लिए फ्रॉ मॉनिटरिंग सेल बनाया था.  साथ ही हाई-प्रोफाइल मामलों की सूची  PMO को सौंपी थी,   मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मुरली मनोहर जोशी की अध्यक्षता वाली समिति के मेंबरों में जोखिम वाले कर्ज लेकर आम राय नहीं थी. समिति में शामिल भाजपा के सदस्य जोशी की कार्रवाई से खुश नहीं हैं. कुछ माह से संसदीय समिति में शामिल भाजपा के सदस्य जोशी के प्रति अपनी नाखुशी जाहिर करते रहे हैं.  बता दें कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे  एक बैठक में नहीं गये थे.

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