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जज लोया मौत मामले में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट में दायर पुनर्विचार याचिका स्वीकार

बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने दायर की पुनर्विचार याचिका

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New delhi: बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन द्वारा सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत के मामले में पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी.  याचिका को स्वीकार कर लिया गया है. नियमों के मुताबिक, ये सुनवाई खुली अदालत में नहीं होगी बल्कि जज चेंबर में फ़ैसला करेंगे. इस पर सुप्रीम कोर्ट जुलाई को विचार करेगा. 19 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ जज ने जज लोया की मौत की निष्पक्ष जांच कराने से मना कर दिया था. 19 अप्रैल के फैसले पर पुनर्विचार करने और उसे वापस लेने की गुहार की गई है. एसोसिएशन ने पुनर्विचार याचिका में कहा कि जिला जजों के बयानों पर भरोसा कर सुप्रीम कोर्ट का इस नतीजे पर पहुंचना कि हार्ट अटैक से जज लोया की मौत हुई थी, यह सही नहीं है.

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SIT से जांच कराने की मांग ठुकरा दी थी

19 अप्रैल को न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि और इन याचिकाओं में न्याय प्रक्रिया को बाधित करने तथा बदनाम करने के गंभीर प्रयास किए गए हैं. न्यायाधीश की स्वाभाविक मृत्यु हुई थी शीर्ष अदालत ने कहा कि जज लोया के निधन से संबंधित परिस्थितियों को लेकर दायर सारे मुक़दमे इस फैसले के साथ समाप्त हो गए.

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संदिग्ध  है जज लोया की मौत 

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26 नवंबर 2005 को सोहराबुद्दीन अनवर हुसैन शेख़ की फ़र्ज़ी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई थी. सोहराबुद्दीन की पत्नी को भी मार दिया गया था. इन हत्याओं के आरोप गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह पर लगे. उनकी गिरफ़्तारी भी हुई. न्यायालय के आदेश पर अमित शाह को राज्य-बदर कर दिया गया.

अमित शाह को दिसंबर 2014 में आरोपमुक्त कर दिया गया था. जज एमबी गोसावी ने जाँच एजेंसी के आरोपों को नामंज़ूर कर दिया था. फिर ये मामला जज लोया को सौंप दिया गया, मामले में अमित शाह जज लोया की अदालत में भी पेश नहीं हुए. एक दिसंबर 2014 को लोया की मौत नागपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई.

जस्टिस लोया की मौत दिसंबर, 2014 में नागपुर में हो गई थी. जिसे संदिग्ध माना गया था. जस्टिस लोया की मौत के बाद जिन जज ने इस मामले की सुनवाई की, उन्होंने अमित शाह को मामले में बरी कर दिया था.

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