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रांची MSW की कार्यशैली से पार्षदों का समूह खफा, कहा- पार्षदों के प्रति जनता में कम हो रहा विश्वास

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Ranchi : शहर के कुल 23 पार्षदों ने मुख्यमंत्री, नगर विकास मंत्री, मेयर सहित कई अधिकारियों पर रांची एमएसडब्ल्यू (रांची नगर निगम और एस्सेल इन्फ्रा का ज्वॉइंट वेंचर) को बचाने और प्रोत्साहन देने का आरोप लगाया है. पार्षदों ने बैठक कर कहा है कि सफाई कार्य को लेकर कंपनी की कार्यशैली किसी से छिपी हुई नहीं है. पार्षदों का समूह पिछले कई वर्षों से कंपनी को हटाने की मांग करता रहा है. इसके विपरीत इसे हटाने की जगह अब इसे प्रोत्साहन देते हुए सेवा विस्तार दिया जा रहा है. इसके पीछे उनकी वजह है, यह समझ से परे है. मालूम हो कि रांची एमएसडब्ल्यू वर्तमान में कुल 33 वार्डों में सफाई का जिम्मा संभाल रही है. हाल में नगर आयुक्त कार्यालय में हुई बैठक में निर्णय लिया गया था कि कंपनी दो अक्टूबर तक सभी वार्डों में सफाई का जिम्मा संभाल लेगी. इसके बाद ही सभी पार्षदों ने अपनी नाराजगी जतायी है.

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कंपनी की कार्यशैली की जांच की मांग

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वार्ड 37 के पार्षद आनंद मूर्ति के कार्यालय में बुधवार को हुई बैठक में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय भी मौजूद थे. बैठक में उपस्थित सभी पार्षदों ने कहा कि प्रत्येक जोन में करीब 50 लेबर कार्यरत हैं. इसके बावजूद विभिन्न वार्डों में आज भी सफाई कार्य नहीं हो पा रहा है. सफाई कार्य वाले उक्त सभी लेबर या तो जोनल या नगर निगम के पदाधिकारियों की सेवा में लगे रहते हैं. ऐसा कर वे सभी लेबर लगातार सफाई कार्य से अनुपस्थित रहते हैं. ऐसी कार्यशैली की जल्द ही जांच होनी चाहिए.

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हटाने की जगह दिया जा रहा है प्रोत्साहन

सीएम, नगर विकास मंत्री, मेयर, डिप्टी मेयर सहित नगर आयुक्त पर रांची एमएसडल्ब्यू को हटाने की जगह प्रोत्साहन देने का आरोप लगाते हुए सभी पार्षदों का कहना है कि उनके द्वारा कंपनी को पिछले कई वर्षों से डिबार करने की मांग की जा रही है, लेकिन अब कंपनी के कार्यक्षेत्र को बढ़ाते हुए अन्य वार्डों में भी सेवा विस्तार दिया जा रहा है. इसके पीछे उनकी क्या वजह है, यह समझ से परे है. इस दौरान पार्षदों द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में कमीशनखोरी की भी बात कही गयी है.

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स्वच्छता सर्वेक्षण 2018-2019 का उड़ाया जा रहा मजाक

शहर की साफ-सफाई नहीं होने से जनता की परेशानी की चर्चा करते हुए पार्षदों ने कहा कि ऐसा नहीं होने से जनता का विश्वास पार्षदों के प्रति कम हो रहा है. हाल में कई पर्व-त्योहार सामने हैं, इसके बावजूद कंपनी को अन्य वार्डों का जिम्मा दिया जा रहा है. यह निर्णय स्वच्छता सर्वेक्षण 2018-2019 का एक तरह से मखौल बनाना है.

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