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पार्षद पर जानलेवा हमले की पार्षद समूह ने की निंदा, कहा- यह उचित नहीं

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Ranchi : रांची नगर निगम के वार्ड 52 के पार्षद निरंजन कुमार पर हुए जानलेवा हमले की कई पार्षदों ने कड़ी भ‌र्त्सना की है. साथ ही मेयर आशा लकड़ा, डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय और नगर आयुक्त मनोज कुमार से मारपीट करनेवाले दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. इस संदर्भ में वार्ड 16 की पार्षद नाजिमा रजा का कहना है कि पार्षद के साथ मारपीट कर जानलेवा हमला करना कहीं से भी उचित नहीं है. अगर हम जनप्रतिनिधियों पर होनेवाले ऐसे हमले पर प्रशासन हमारा साथ नहीं देगा, तो फिर हम जनता का भरोसा कैसे जीत सकेंगे. उन्होंने अपने बयान में पार्षदों के बीच खत्म हो चुकी एकता पर नाराजगी जतायी है. वहीं, वार्ड 26 के पार्षद अरुण झा ने इस मामले पर सभी पार्षदों के साथ बैठक कर मामले को सरकार तक पहुंचाने की बात कही है.

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मेयर ने भी नहीं किया सहयोग

पीड़ित पार्षद निरंजन कुमार ने न्यूज विंग से बातचीत में बताया कि शनिवार शाम को उनके हटिया स्थित कार्यालय के बाहर टेंपो और वैगन-आर के बीच टक्कर हुई थी. इससे वहां एक संघर्ष की स्थिति बन गयी थी. हालांकि, वहां के पार्षद होने के नाते उन्होंने स्वयं बीच-बचाव कर पूरे मामले को सुलझा दिया. लेकिन, उसके बाद वैगन-आर चला रहा आदमी (संभवतः वह स्पेशल ब्रांच का सिपाही था) ने अपने कुछ आदमियों के साथ उनके कार्यालय में आकर उनके साथ मारपीट की. इस दौरान उन्हें कुछ चोट भी लगी. उन्होंने हटिया थाना में आवेदन देकर मामले की जांच करने की मांग थाना प्रभारी से की है. पूरे मामले की जानकारी उन्होंने मेयर आशा लकड़ा को भी दी, लेकिन उन्होंने इस पर कोई सहयोग करना उचित नहीं समझा.

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सरकार पर बनाया जायेगा दबाव : अरुण झा

वार्ड 26 के पार्षद अरुण झा ने पार्षद पर हुए हमले की कड़ी निंदा कर कहा कि जनप्रतिनिधि कोई भी काम सम्मान से ही कर सकते हैं. यदि कोई असामाजिक तत्व इस तरह जनप्रतिनिधियों से मारपीट करे, तो स्वतः सरकार को इस पर संज्ञान लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि जल्द ही पार्षद समूह इस पर एक बैठक कर यह निर्णय लेगा कि कैसे सरकार पर दबाव बनाया जाये कि भविष्य में पार्षद-जनप्रतिनिधियों पर किसी तरह का जानलेवा हमला न हो.

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पार्षदों के बीच नहीं रह गयी एकता : नाजिमा रजा

पार्षद पर हुए जानलेवा हमले की वार्ड 16 की पार्षद नाजिमा रजा ने भी निंदा की है. उन्होंने कहा कि पार्षद पर जिस तरह जानलेवा हमला किया गया, उससे सभी पार्षदों को एक हो जाना चाहिए था. लेकिन अब पार्षदों के बीच एकता नहीं रह गयी है. 2008 में अजयनाथ शाहदेव पर कांके में भी कुछ असामाजिक तत्वों ने हमला किया था. उस वक्त के सभी पार्षदों ने इसका विरोध जताकर जांच की मांग की थी. अगर एक प्रतिनिधि पर इस तरह का हमला किया जा रहा है, तो आम आदमी की शहर में क्या स्थिति है, यह किसी से छिपी नहीं है. उन्होंने प्रशासन पर स्वतः संज्ञान लेते हुए आवश्यक पहल करने की बात भी कही.

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