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जमशेदपुर जेल में हुई कैदी मनोज सिंह की हत्या के मामले में जेलर बालेश्वर सिंह पर हत्या का मामला दर्ज

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Jamshedpur: 25 जून को जमशेदपुर स्थित घाघीडीह सेंट्रल जेल में कैदी मनोज सिंह की पीट-पीट कर हत्या के मामले में मृतक के पिता अनिरूप सिंह ने घाघीडीह सेंट्रल जेल के जेलर बालेश्वर प्रसाद सिंह के खिलाफ परसुडीह थाना में हत्या का मामला दर्ज कराया है. बता दें कि जेल में मनोज सिंह की हत्या के मामले में पंकज दुबे समेत अन्य बंदियों पर हमले के मामले में चार कक्षपाल और 26 बंदियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था.

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जेलर ने साजिश के तहत करवायी मनोज सिंह की हत्या

परसुडीह थाना में मृतक मनोज सिंह के पिता अनिरूप सिंह के द्वारा दिये गये आवेदन में कहा गया है कि 25 जून को मुझे 7:00 बजे शाम में फोन आया कि आप एमजीएम अस्पताल चले जाइये और अपने बेटे को देख लीजिए. जब उन्होंने पूछा कि आप कौन बोल रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि मैं जेलर बालेश्वर सिंह बोल रहा हूं. जिसके बाद मृतक मनोज सिंह के पिता एमजीएम अस्पताल पहुंचे वहां पर एक कैदी सुमित सिंह का इलाज चल रहा था. जब उन्होंने कैदी सुमित सिंह से पूछा कि मनोज सिंह कहां है, तो कैदी सुमित सिंह बोला कि पुलिसवाले ने मनोज सिंह को लाठी से मार-मार कर मार दिया है. जब मनोज सिंह के पास गया तो उसकी मौत हो चुकी थी. इस मामले में मनोज सिंह के पिता का कहना है कि मेरे बेटे की हत्या जेलर बालेश्वर सिंह ने साजिश के तहत करवायी है एवं इसका जिम्मेवार जेलर बालेश्वर सिंह तथा जेल के कुछ सिपाही और कैदी का हाथ है.

मनोज सिंह की हत्या के पीछे जेलर बालेश्वर सिंह का हाथ

परसुडीह थाना में मृतक मनोज सिंह के पिता अनिरूप सिंह के द्वारा दिये आवेदन में कहा गया है कि जब मैं मनोज सिंह से मिलने जेल गया था तब मेरा बेटा बोला था कि पापा मुझे जल्दी से जल्दी जेल से निकलवा लीजिए क्योंकि जेलर साहब की नीयत मेरे प्रति ठीक नहीं है. वह हमेशा मुझे तंग करते हैं. मनोज सिंह के पिता ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे बेटे की हत्या में जेलर बालेश्वर सिंह का पूरा हाथ एवं साजिश है. जेलर ने साजिश करके उसकी हत्या करायी है. जेल में कैदी के अनुसार मनोज सिंह ने चिल्ला-चिल्ला कर कहा था कि जेलर साहब आप मारने की धमकी देते थे, लेकिन आज जान से ही मरवा दिये. आप जल्दी से मुझे अस्पताल ले चलिए कि मेरी जान बच जाये. जिसके बाद मनोज सिंह को अस्पताल ले जाया गया जहां पर उसकी मौत हो गयी.

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मनोज सिंह की मौत का असल जिम्मेदार कौन

घाघीडीह सेंट्रल जेल में बंदियों और कक्षपालों ने सजायाफ्ता मनोज सिंह की पीट-पीट कर हत्या कर दी. इसमें हत्या की प्राथमिकी दर्ज की गयी और चार कक्षपालों को जेल भी भेज दिया गया. कानूनी औपचारिकता पूरी कर ली गयी. जांच टीम भी गठित की गयी. लेकिन मुख्य बातें गौण हो गयीं. सही मायने में आखिर मनोज सिंह की हत्या का जिम्मेदार कौन? उसकी सुरक्षा की जिम्मेदार किसकी थी? सुरक्षा में कौन लोग थे? ऐसे में क्या जेल प्रशासन के बड़े अधिकारी भी सुरक्षा में चूक के जिम्मेदार नहीं?

जेल के भीतर सुरक्षा का जिम्मा जेल प्रशासन का

कानून के जानकारों की मानें तो न्यायालय के आदेश पर ही न्यायिक हिरासत में किसी भी आरोपित को जेल भेजा जाता है. मतलब है कि उसकी सुरक्षा का जिम्मा जेल प्रशासन का होता है. हर बंदी की सुरक्षा व्यवस्था से लेकर खाने-पीने, सोने तक की व्यवस्था जेल प्रबंधन की जिम्मेदारी है. बंदी को तो सरकारी मुलाजिम का दर्जा प्राप्त होता है. इस व्यवस्था को धता बता किसी बंदी की हत्या पीट-पीट कर दी जाये तो लापरवाही किसकी मानी जायेगी? व्यवस्था की या फिर सुरक्षा में सेंध लगानेवालों की. कहा जायेगा दोनों की. तो फिर लापरवाह रहनेवाले लोग कानूनी घेरे से आखिर अछूते अब तक कैसे रह गये?

डर के मारे छिप गया था कैदी मनोज तो क्यों हुआ उस पर हमला

जेल अधीक्षक सत्येंद्र चौधरी द्वारा दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में जिक्र है कि हरीश सिंह गुट का कैदी रहा मनोज सिंह मारपीट के भय से सेक्टर आरुणी के ऊपरी तल्ले में जाकर छिप गया था. उग्र बंदी व कक्षपालों को जब पता चला कि मनोज सिंह आरुणी कक्ष में छिपा है तो 15 सजायाफ्ता और चार कक्षपाल उसे ढूंढ़ते हुए गये और उस पर लाठी एवं डंडे से बुरी तरह हमला कर दिया. पिटाई से बाद में उसकी मौत हो गयी. अब ऐसे में सवाल है कि मनोज सिंह के छुपने के बाद भी उस पर हमला क्यों किया गया?

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