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97,500 करोड़ रुपए की डील, क्या बोइंग का एफ/ए- 18 सुपर हॉर्नेट डार्क होर्स साबित होगा 

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 New delhi : भारत में पिछले 15 सालों से नये फाइटर जेट्स की जरूरत महसूस की जा रही है.  लेकिन एयर फोर्स के पास वर्तमान में जरूरत की तुलना में सिर्फ तीन-चौथाई ही जेट है. भारत में खरीद की जटिल प्रक्रिया को फाइटर जेट्स की कमी के लिए जिम्मेदार माना जाता है. भारत अब तेजी से ये प्रक्रिया बढ़ाना चाहता है, लेकिन भारत की नये फाइटर जेट्स खरीदने की योजना में बदलाव आ गया हे. बता दें कि सरकार द्वारा सिंगल इंजन के बजाय ट्विन (दो) इंजन वालो जेट्स खरीदने पर जोर दिये जाने से इस ऑर्डर को हासिल करने की होड़ में बोइंग फ्रंट रनर के तौर पर सामने आयी है. 

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100 सिंगल इंजन जेट्स की होनी है खरीद 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अभी तक 100 सिंगल इंजन जेट्स सप्लाई करने की दौड़ में लॉकहीड मार्टिन कॉर्प के एफ-16 और साब एबी के ग्रिपेन के बीच ही प्रतियोगिता देखने को मिल रही थी.  भारत सरकार की योजना में बदलाव के बाद इस ऑर्डर की वैल्यू 15 अरब डॉलर (97,500 करोड़ रुपए) तक पहुंच सकती है. इस ऑर्डर को इसलिए भी खासा अहम माना जा रहा है, क्योंकि सरकार इंडियन एयरफोर्स के बेड़े को मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है. लॉकहीड मार्टिन कॉर्प और साब एबी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मेक इन इंडिया इनीशिएटिव के तहत स्थानीय कंपनियों के साथ भागीदारी से भारत में प्लेन्स के निर्माण की पेशकश की है;  इससे इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी लाने में मदद मिलेगी.

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