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आठ सालों में राज्य में SC/ST पर अत्याचार के 9556 मामले दर्ज, 3776 केस अब भी हैं लंबित

दो जिलों को छोड़ 22 जिलों में है SC/ST थाना लेकिन नहीं होती है अपेक्षित कार्रवाई, चतरा, पलामू और गोड्डा है अत्यधिक संवेदनशील जिला

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Deepak

Ranchi: झारखंड में अनुसूचित जाति (SC/ST ) और अनुसूचित जनजातियों पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. राज्य भर में इनसे संबंधित 9556 मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं. रामगढ़ और खूंटी को छोड़ अन्य सभी जिलों में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत विशेष थाने भी गठित किये गये हैं. पर इन थानों में ना तो शिकायतें समय पर ली जाती हैं और न ही मामलों पर सुनवाई होती है. राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान की अध्यक्षता में लंबित मामलों के निबटारे को लेकर प्रत्येक सोमवार को दोपहर में नियमित बैठकें भी हो रही है. लेकिन न तो SC/ST के खिलाफ अपराध कम हो रहे हैं और न ही अत्याचार थम रहा है.

उदाहरण के तौर पर राजधानी में ही एक अनुसूचित जाति परिवार पिछले आठ वर्षों से लगातार प्रताड़ना का शिकार हो रहा है. स्थानीय डोरंडा थाने में परिवार की न तो शिकायत ली जाती है और न ही कोई कार्रवाई. परिवार के सभी सदस्य अस्थायी होटल से 14 लोगों का भरन-पोषण कर रहे हैं. राजधानी के हिनू की रहनेवाली ममता देवी को उसके ही पड़ोसी गीता देवी और उसके पति रामधनी प्रसाद लगातार प्रताड़ित कर रहे हैं. अंचल कार्यालय अरगोड़ा, सदर अनुमंडल अधिकारी के कार्यालय में ममता देवी और उसके देवर उमाकांत पासवान और पूरे परिवार के सदस्यों पर गीता देवी ने फर्जी प्राथमिकी और मुकदमा दर्ज कर रखा है. पुलिस भी बार-बार ममता देवी के परिवार को ही परेशान करती रही है.

अनुसूचित जाति का हो रहा अधिक दमन

सरकार के ही आंकड़ों को लें तो 2010 से लेकर जुलाई 2018 तक राज्य भर में SC/ST अत्याचार से संबंधित 9556 मामले दर्ज हुए. इनमें अनुसूचित जाति के 6807 और अनुसूचित जनजाति के 2755 मामले शामिल हैं. आठ वर्षों में 3776 मामले लंबित हैं. राज्य में मुख्य रूप से रांची, गुमला, पलामू, गढ़वा, गिरिडीह, धनबाद, बोकारो, देवघर, जमशेदपुर, कोडरमा, हजारीबाग और जामताड़ा ऐसे जिले हैं, जहां पांच वर्षों में अनुसूचित जाति, जनजाति से आनेवाले लोगों के खिलाफ सर्वाधिक घटनाएं दर्ज करायी हैं. इन जिलों को एट्रोसिटी प्रोन एरिया के रूप में घोषित किया गया है.

तीन जिलों में काम कर रहा विशेष न्यायालय

सरकार की तरफ से रांची, हजारीबाग, धनबाद और देवघर में SC/ST अत्याचार अधिनियम के अंतर्गत विशेष न्यायालय भी गठित हैं. ताकि मामलों का निबटारा जल्द से जल्द हो सके. इतना ही नहीं, सभी तरह के व्यवहार न्यायालयों में अनुसूचित जाति, जनजाति से संबंधित मुकदमों के संचालन के लिए रांची और दुमका में विशेष लोक अभियोजक (पब्लिक प्रोसिक्यूटर) भी हैं. अन्य जिलों में अधिवक्ताओं के पैनल की सूची संबंधित जिलों के उपायुक्त से मांगी गयी है. गृह विभाग की तरफ से अन्य 22 जिलों में भी विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति के लिए 11 अक्टूबर 2018 को विशेष आदेश भी जारी किया गया है.

तीन जिले अत्यधिक संवेदनशील

राज्य सरकार चतरा, पलामू और गोड्डा को अनुसूचित जाति, जनजाति संवर्ग के खिलाफ होनेवाली हिंसा की घटनाओं को लेकर अत्यधिक संवेदनशील जिला घोषित करने की तैयारी कर रही है. गृह सचिव ने इसको लेकर औपचारिकताएं पूरा करने का निर्देश भी दिया है. इन जिलों के पुलिस अधीक्षकों को भी SC/ST एट्रोसिटीज की घटनाओं की प्राथमिकी दर्ज करने में थाना प्रभारियों को आवश्यक निर्देश देने का आदेश दिया गया है.

वर्ष                    SC/ST के दर्ज मामले

2010                           386
2011                           476
2012                           647
2013                          1053
2014                          1127
2015                          1234
2016                          1420
2017                         1730
2018 (जुलाई तक)      1483
कुल                          9556

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