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चुनावी बॉन्ड की 95 प्रतिशत राशि गयी बीजेपी के खाते में, सिर्फ अक्टूबर के पहले 10 दिनों में बिके 733 बॉन्ड

Ranchi : चुनावी चंदे में  पारदर्शिता  और राजनीतिक पार्टियों की ओर से चुनाव में किये जानेवाले खर्च में  पारदर्शिता  लाने के लिए जनवरी 2018 में भाजपा सरकार ने चुनावी बॉन्ड की घोषणा की थी. रिपोर्ट के मुताबिक देश भर में चुनावी बॉन्ड की 95 प्रतिशत राशि  मात्र भाजपा के खाते में आयी है. इसकी जानकारी हैदराबाद की डाटा एनालिसिस करनेवाले संस्था फैक्टली ने दी है. सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत संस्था ने चुनावी बॉन्ड से संबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी बॉन्ड की घोषणा के बाद जनवरी से लेकर मार्च तक में 520 चुनावी बॉन्ड 222 करोड़ रुपये में बिके. भाजपा की ओर से भारतीय चुनाव आयोग को दी गयी रिपोर्ट में बताया गया है कि शुरुआती  तीन माह में पार्टी को 210 करोड़ रुपये के बॉन्ड से मिले. शेष  12 करोड़ रुपये कांग्रेस और अन्य राजनीतिक पार्टियों के खाते में गयी होगी.

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अक्टूबर के पहले 10 दिनों में खरीदे गये 733 बॉन्ड

एसोसिएशन  फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) ने अक्टूबर तक के चुनावी बॉन्ड से संबंधित जानकारी एसबीआई से निकाली. इसमें यह बताया गया है कि मात्र अक्टूबर के पहले 10 दिनों में 401.7 करोड़ रुपये के चुनावी बॉन्ड खरीदे गये. इन बॉन्ड्स की संख्या 733 है. मुंबई में 173, कोलकाता में 169 और हैदराबाद में 137 बॉन्ड खरीदे गये. सभी बॉन्ड दिल्ली में भंजे हैं. इन बॉन्ड्स में अधिकतर  10 लाख रुपये के बॉन्ड थे. ऐसे में सरकार ने जो दावा किया था कि आम आदमी भी राजनीतिक पार्टियों को चंदा दे सकता है, वह धूमिल होता दिख रहा है. क्योंकि, आम जनता इतनी बड़ी रकम राजनीतिक पार्टियों को नहीं दे सकती.

आरटीआई के दायरे से बाहर है बॉन्ड खरीदनेवालों की पहचान

एडीआर और फैक्टली ने अपनी रिपोर्टों के हवाले से कहा है कि एसबीआई से बॉन्ड लेनेवालों की जानकारी लेने की कोशिश  की गयी, लेकिन बैंक यह कहते हुए बॉन्ड लेनेवालों की जानकारी नहीं दे रहा कि चुनावी बॉन्ड घोषणा में बॉन्ड लेनेवालों की पहचान को गुप्त रखने का प्रावधान है. इसके कारण बैंक भी बॉन्ड लेनेवालों की जानकारी और किस पार्टी के लिए  अधिकतर बॉन्ड खरीदे गये नहीं, बताना चाहता.

क्या है चुनावी बॉन्ड

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जनवरी 2018 में चुनावी बॉन्ड की घोषणा की थी. इसका उद्देश्य देश  की राजनीतिक पार्टियों के चंदे को पारदर्शी  बनाना था. ये बॉन्ड होते हैं, जिनके ऊपर एक करेंसी नोट की तरह मूल्य लिखा होता है. वर्तमान में  देश  की कुल 29 एसबीआई  शाखाओं  में ये बॉन्ड मिल रहे हैं. जबकि, घोषणा से लेकर अक्टूबर 2018 तक मात्र 11 एसबीआई शाखाओं  में ये बॉन्ड मिल रहे थे.  बैंक में ये बॉन्ड एक हजार, 10 हजार, एक लाख, 10 लाख और एक करोड़ रुपये के मूल्य के मिल रहे हैं.

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