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खुदगर्जी: 90 साल के बुजुर्ग को अपनों ने मुंबई में लावारिस छोड़ दिया था, पत्रकारों की मदद से लौटे गांव

एनजीओ के कार्यकर्ताओं ने कोडरमा स्टेशन से गिरिडीह के गांव तक पहुंचाया

Koderma. खुदगर्जी का यह ऐसा दौर है, जब संतानें भी कई बार बुजुर्ग मां-बाप को बोझ मान लेती हैं. इंसान शारीरिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर क्या होता है, अपने भी साथ छोड़ देते हैं. ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग को उसके परिजनों ने बोझ समझकर मुंबई ले जाकर छोड़ दिया. पत्रकारों की मदद से वह वापस अपने घर गिरिडीह लौट सके.

कोडरमा से सटे गिरिडीह जिले के हीरोडीह थाना के डंगारडीह निवासी 90 वर्षीय नोखलाल साव को उनकी ही बेटी, दामाद और नाती ने मुंबई ले जाकर सिद्धि विनायक मंदिर के पास छोड़ दिया. वहां रोते-बिलखते और अपनों को तलाशते हुए भटक रहे थे तो मीडियाकर्मी शिखा वर्मा और अभिनेता नीरज सिंह राजपूत की नजर उनपर पड़ी. उन्होंने उनका हाल-चाल लिया और उन्हें अपने घर ले गये. वे लोग इन्हें सुरक्षित घर भेजने की कोशिश में जुट गए.

ऐसे पहुंचे घर

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उन्होंने गूगल पर कोडरमा के एनजीओ की तलाश की. समर्पण एनजीओ से संपर्क स्थापित कर सारा वाकया साझा किया. समर्पण के सचिव इंद्रमणि साहू ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें आप कोडरमा भेज दें और ट्रेन का पूर्ण विवरण दें, फिर हम उन्हें अपने संरक्षण में लेकर आगे उन्हें कवर देंगे. शिखा वर्मा और नीरज सिंह राजपूत ने उन्हें टिकट देकर कोडरमा भेज दिया,  जहां समर्पण की टीम ने सोमवार सुबह करीब 3 बजे कोडरमा स्टेशन जाकर उन्हें अपने संरक्षण में लिया. बुजुर्ग को एनजीओ के लोगों ने कोडरमा कार्यालय लाया, उचित पोषण आहार के बाद उन्हें अपने वाहन से उनके घर तक सकुशल पहुंचाया गया. इस संबंध में संस्था की ओर से हीरोडीह थाना में एक सनहा भी दर्ज कराया गया है.

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