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Lockdown के दौरान 85% प्रवासी मजदूरों ने घर वापसी के लिए खुद किया अपने किराये का भुगतान- सर्वे

Mumbai:  कोरोना संकट और उसके कारण लगे लॉकडाउन में सबसे अधिक परेशानी देश के मजदूरों को हुई. प्रवासी मजदूरों की तकलीफ कई बार देश के सामने आयी. अब एक रिपोर्ट में ये बात सामने आयी है कि लॉकडाउन के दौरान अपने गांव-घर वापस लौटने के लिए 85 प्रतिशत प्रवासी मजदूरों ने खुद यात्री किराये का भुगतान किया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एक स्वंयसंवी संगठन ‘स्ट्रैंडेड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क’ (स्वान) का कहना है कि 85 फीसदी से अधिक मजदूरों को घर लौटने के लिए अपनी यात्रा के खर्च का खुद उठाना पड़ा है.

62 फीसदी यात्रियों ने 15 सौ से अधिक खर्च किये

बीते शुक्रवार को ‘टू लीव और नॉट टू लीवः लॉकडाउन, माइग्रेंट वर्कर्स एंड देयर जर्नीज होम’ शीर्षक से रिपोर्ट जारी हुई थी. जिसमें मई के आखिरी सप्ताह और जून के पहले सप्ताह में सर्वेक्षण किया गया था. इस सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 मई को सुप्रीम कोर्ट का प्रवासी मजदूरों की घर वापसी की यात्रा खर्चे को लेकर दिया गया निर्देश बहुत देर में दिया गया निर्देश था. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 28 मई को कहा था कि राज्य की सरकारें मजदूरों की घर वापसी की यात्रा का खर्च उठाएंगी.

फोन पर किये गये इस सर्वे में 1,963 प्रवासी मजदूर शामिल थे. इस सर्वे में ये पता चला कि लॉकडाउन के दौरान 33 फीसदी मजदूर अपने गृह राज्य लौटने में सफल हुए जबकि 67 फीसदी घर गये ही नहीं. जिन लोगों ने यात्रा कि उनमें से 85 फीसदी ने घर पहुंचने के लिए खुद अपने किराये का भुगतान किया है. सर्वे रिपोर्ट बताती है कि लॉकडाउन के दौरान घर पहुंचे मजदूरों में से 62 फीसदी ने यात्रा के लिए 1,500 रुपये से अधिक खर्च किए थे.

घर वापसी का बड़ा कारण बेरोजगारी

सर्वे रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि प्रवासी मजदूरों के अपने गांव-घर वापस लौटने का एक मुख्य कारण बेरोजगारी रही. घर जाने का फैसला सिर्फ महामारी का डर या भावनात्मक नहीं था. शहरों में अभी भी फंसे 75 फीसदी मजदूर बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं. स्वान की शोधकर्ता अनिंदिता अधिकारी का कहना है, ‘हमें पता चला कि सिर्फ महामारी का डर और परिवार के साथ रहने की इच्छा ने ही उन्हें घर लौटने को मजबूर नहीं किया बल्कि जिन शहरों में वे काम कर रहे थे, वहां रोजगार, आय और खाने की कमी ने उन्हें घर लौटने को मजबूर किया.’

39 फीसदी मजदूर श्रमिक ट्रेन से लौटे

स्वान सर्वे में कहा गया कि 44 फीसदी प्रवासी मजदूर जो घर जाने के लिए निकले थे, उनमें से 39 फीसदी लोगों को श्रमिक ट्रेनें मिली थीं. 11 फीसदी ट्रक, लॉरी और दूसरे माध्यमों से घर पहुंचे जबकि छह फीसदी मजदूर पैदल ही घर लौटे. जबकि, शहरों में फंसे 55 फीसदी मजदूर तुरंत अपने घर जाना चाहते हैं.

स्वान की रिपोर्ट में घर पहुंचे 5,911 मजदूरों पर एक और सर्वे किया गया है, जिसमें पता चला है कि इनमें से 821 मजदूरों ने 15 मई से एक जून तक डिस्ट्रेस कॉल की थी. साथ ही जिन लोगों पर सर्वे किया गया, उनमें से 80 फीसदी लोगों को सरकार द्वारा मुहैया कराया गया राशन नहीं मिला. लगभग 63 फीसदी मजदूरों के पास 100 रुपये से भी कम पैसे थे. वहीं तकरीबन 57 फीसदी मजदूरों ने एसओएस कॉल कर कहा कि उनके पास पैसे, राशन कुछ नहीं है. और उनके सामने भुखमरी की समस्या है.

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