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84 दिन बीते, तीन बार सैलेरी ली, पर घोषणा के मुताबिक झारखंड सरकार ने नहीं दी पुलवामा शहीदों के परिजनों को राशि

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Ranchi: 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों ने बड़ी बेरहमी से देश के 44 सीआरपीएफ के जवानों धोखे से ब्लास्ट में उड़ा दिया था. सभी 44 शहीदों के लिए पूरा देश एक साथ खड़ा था. पुलवामा के बाद पाकिस्तान को भारत ने सबक सिखाने के उद्देश्य से एयर स्ट्राइक भी किया था. उसके तुरंत बाद होनेवाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने इस मामले को जनता के सामने काफी मजबूती से रखा. विपक्ष ने आरोप लगाया कि देश की सेना को चुनाव में हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. घटना के दो दिनों के बाद ही झारखंड के मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि वो और उनके मंत्रिमंडल के सभी मंत्री एक महीने की सैलेरी शहीदों के परिजनों को देंगे. इसे लेकर सीएम ने ट्वीट भी किया. लेकिन घोषणा के 84 दिन बीत चुके हैं. घोषणा करने के बाद मंत्रिमंडल से सभी सदस्यों ने फरवरी, मार्च और अप्रैल तीन बार सैलेरी ली. लेकिन शहीदों के परिजनों के वायदे के मुताबिक एक रुपये की भी मदद नहीं की. अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ऐसा सिर्फ और सिर्फ लोगों के बीच साहानुभूति दिखाने के लिए रघुवर दास ने घोषणा कर दी थी. क्या इसे शहीदों का अपमान नहीं माना जाये.

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शहीद विजय सोरेंग के पार्थिव शरीर को कंधा देने के बाद की थी घोषणा

14 फरवरी को पुलवामा में 44 सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने के बाद दूसरे ही दिन झारखंड के गुमला से शहीद विजय सोरेंग के पार्थिव शरीर को कंधा देने के बाद पूर्ण बहुमतवाली बीजेपी की सरकार के मुखिया रघुवर दास ने एक घोषणा की. घोषणा में उन्होंने कहा कि “पुलवामा के शहीदों की शहादत बेकार नहीं जायेगी. झारखंड सरकार की तरफ से पुलवामा के शहीदों के परिजनों को मदद के तौर पर मैं और मेरे कैबिनेट के सभी मंत्री एक महीने के वेतन की राशि देंगे.” इसके एक दिन बाद 16 फरवरी को दोपहर 2.42 मिनट पर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक ट्वीट किया. इसमें उन्होंने लिखा थाः पुलवामा में शहीद हुए वीर सपूतों के परिजनों के साथ पूरा देश खड़ा है. मैं और मेरे मंत्रिमंडल के सभी साथी अपना एक महीने का वेतन शहीदों के परिजनों के चरणों में अर्पित करते हैं. लेकिन ऐसा नहीं किया.

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कैबिनेट में बनी थी सहमति, सरकार ने नहीं बनाया कोई सिस्टम

अभी तक पुलवामा के शहीदों के परिजनों को कैबिनेट के सदस्यों का एक महीने के वेतन की राशि नहीं पहुंची है. इस बीच मुख्यमंत्री रघुवर दास समेत सभी मंत्रियों को सैलेरी मिल चुकी है. घोषणा के करीब तीन महीने होने को हैं. सीएम रघुवर दास की घोषणा के बाद कैबिनेट में सहमति बनी थी. सहमति बनी कि अधिकारियों और कर्मियों के वेतन से एक दिन का वेतन दिया जाये. लेकिन कर्मियों और अधिकारियों के वेतन से भी एक दिन के वेतन की राशि नहीं कटी है. सरकार को एक सिस्टम तैयार करना था कि कैसे कैबिनेट के सदस्यों और सरकार के अधिकारी और कर्मियों के वेतन से राशि कट कर प्रधानमंत्री राहत कोष में जाये. लेकिन इस दिशा में मीडिया में खबर छपने के अलावा कोई काम नहीं हुआ. ऐसे में पुलवामा के शहीदों के परिजन झारखंड सरकार से अपने आप को ठगा हुए महसूस कर रहे हैं.

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मुख्यमंत्रियों सहित मंत्रियों का कितना वेतन

  • मुख्यमंत्री का वेतन: 80,000
  • मंत्री का वेतन: 65,000
  • आइएएस कैडर का वेतन: 1,75,000  से  2,25,000
  • आइएफएस कैडर का वेतन: 1,75,000 से 2,25,000
  • आइपीएस कैडर का वेतन: 1,75,000 से 2,25,000
  • मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों का एक माह का वेतन: 6,50,000
  • सभी आइएएस कैडर के एक दिन का वेतन: 12,88,000
  • आइपीएस कैडर के एक दिन का वेतन: 8,16,000
  • आइएफएस कैडर के एक दिन का वेतन: 11,28,000
  • 1.90 लाख राज्य कर्मियों के एक दिन का वेतन: लगभग 47 करोड़

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