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1993 से प्रमोशन की राह देख रहे हैं झारखंड हाइस्कूल के 8000 शिक्षक

Ranchi : राज्य के विभिन्न जिलों के हाई स्कूलों में कार्यरत आठ हजार शिक्षक साल 1993 से प्रमोशन  की राह देख रहे हैं. दरअसल हाई स्कूल में कार्यरत शिक्षकों को 24 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद वरीय वेतनमान में प्रमोशन दी जाती है. लेकिन राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत हाई स्कूल शिक्षकों को 1993 से वरीय वेतनमान में प्रोन्नति नहीं दी गयी है.

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शिक्षकों की प्रोन्नति को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया गया है. इसके बाद ही कई जिला प्रमोशन की दिशा में कार्यवाही नहीं की.

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प्रमोशन के लिए 24 में 20 जिलों ने नहीं की पहल

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से सभी जिला को प्रमोशन की दिशा में कार्य करने के बाद रिपोर्ट निदेशालय को देने के लिए कहा गया था. लेकिन राज्य के 24 जिलों में से 20 जिला ने इस दिशा में कोई पहल ही नहीं की. केवल गुमला, गढ़वा, देवघर और पाकुड़ में शिक्षकों को प्रोन्नति दी गयी है. प्रमोशन की राह देख रहे 8 हजार में से कई शिक्षक रिटायर हो चुके हैं. जबकि कई शिक्षकों की मृत्यु हो चुकी है.

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माध्यमिक शिक्षक संघ की मानें तो 24 वर्ष की सेवा के बाद हाई स्कूल शिक्षकों की वरीय वेतनमान में प्रमोशन जिला स्तर से की जाती है. क्योंकि हाई स्कूल शिक्षकों का जिला कैडर होता है. इसलिए संबंधित जिला के जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रोन्नति का रिकमेंडेशन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को करते हैं. इसके बाद शिक्षकों की प्रोन्नति होती है.

निर्देश के बावजूद काम नहीं होने से हुई प्रमोशन में देरी

माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि राज्य के 24 जिलों में से कई ऐसे जिले हैं. जिन्हें माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद भी शिक्षा विभाग से मार्गदर्शन मांग रहे हैं. झारखंड के धनबाद जिला में शिक्षकों के प्रमोशन इसी वजह से रुकी हुई है.

इसके अलावा रांची जिला में भी शिक्षकों का प्रमोशन रुका हुआ है. रांची जिला में 422 शिक्षकों को सीनियर पे स्केल में प्रमोशन दी जानी थी. लेकिन तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी मिथिलेश कुमार सिन्हा के आदेश के बाद प्रमोशन का काम रोक दिया गया है.

वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि प्रमोशन में देरी की वजह निदेशालय की ओर से भेजे गये निर्देश के बाद भी काम नहीं होना है.

इसमें जिला शिक्षा पदाधिकारियों की भूमिका सबसे अधिक है. अधिकारी ने बताया कि प्रत्येक जिला शिक्षा पदाधिकारी को वरीय वेतनमान में प्रमोशन देने के लिए तमाम तरह के निर्देश दिये जा चुके हैं, इसके बाद भी वे अपने काम में कोताही बरत रहे हैं.

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