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ऑपरेशन मुस्कान के तहत झारखंड में 778 बच्चों का हुआ रेस्क्यू

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Ranchi: राज्य में ऑपरेशन मुस्कान से 778 बच्चों का रेस्क्यू अब तक किया गया है. बाल तस्करी के मामले में ऐसे अभियान कारगर कहे जा सकते हैं. विकास भवन में चाइल्ड ट्रैफिकिंग पर आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में बाल हित के मसले पर ये विचार उभर कर सामने आये.

झारखंड सरकार ने 22 मार्च, 2018 को एक अधिसूचना जारी की थी. इसके अनुसार 18 वर्ष से कम आयु के जरूरतमंद बच्चों के भरण-पोषण, देख-रेख प्रायोजन संबंधी दिशा- निर्देशिका जारी की गयी थी. इसके आधार पर प्रत्येक जिले में बच्चों के स्पांसरशिप के लिए 10 लाख रुपये का प्रावधान है.

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छोटे जिलों के लिए यह राशि पर्याप्त हो सकती है पर बड़े जिलों के लिए नहीं. केंद्र प्रायोजित इस योजना में केंद्रांश तथा राज्यांश की राशि 60:40 है. झारखंड के 24 जिलों के लिए कुल राशि 2,40,000.00 है. इसमें केंद्रांश 1 करोड़ 44 लाख है जबकि राज्य सरकार की ओर से इसके लिए 96 लाख रुपये का प्रावधान है.

सीडब्ल्यूसी कौशल किशोर के अनुसार झारखंड बाल तस्करी के लिए चारागाह है. ऐसे में अगर स्पांसरशिप प्रोग्राम के तहत राज्य सरकार चौबीसों जिले के लिए कम से कम 10 करोड़ का प्रावधान करे तो बेहतर होगा. स्पांसरशिप के तहत प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिमाह 2000 रुपये खर्च करने का प्रावधान रखा गया है. 40 बच्चों को चिन्हित करके इसका लाभ दिया जाना है. इस संख्या को भी बढ़ाने की जरूरत है.

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अब दिल्ली ही नहीं, असम, हिमाचल भी खपाये जा रहे बाल श्रमिक

विकास भवन सभागार में बुधवार को कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रन फाउंडेशन व प्रतिज्ञा संस्था के द्वारा चाइल्ड ट्रैफिकिंग मुक्त भारत पर राष्ट्रव्यापी जन संवाद का आयोजन किया गया था. मुख्य अतिथि रांची के उपायुक्त राय महिमापत रे के अनुसार चिल्ड्रन ट्रैफिकिंग झारखंड का ज्वलंत मुद्दा है. इसके लिए सरकार और श्रम विभाग मिलकर निरंतर कार्य कर रहे हैं. सबों को एकजुट होकर आगे आना होगा.

श्रम विभाग के अविनाश कृष्ण के मुताबिक बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के लिए पेंसिल पोर्टल कार्यक्रम चलाया जा रहा है. जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुमन सिंह के अनुसार सबसे ज्यादा जरूरी उन दलालों को पकड़ना है जो काम देने के बहाने बच्चों को गलत काम में लगा दे रहे हैं.

रांची की सीडब्लूसी सदस्य तनुश्री सरकार ने कहा कि सस्ता मजदूरी दर होने की वजह से झारखंड चाइल्ड ट्रैफिकिंग के लिए जाना जाता है. चाइल्ड ट्रैफिकिंग को रोकने हेतु सबसे पहले लोगों को जागरूक करने की जरूरत है. आजकल बच्चों का गंतव्य स्थान भी बदला बदल गया है. पहले इसके लिए दिल्ली को गिना जाता था, अब असम, हिमाचल भी इसमें शामिल हो चुका है.

अधिवक्ता अनूप कुमार अग्रवाल ने बच्चों के ट्रैफिकिंग से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों के बारे में लोगों को अवगत कराया. कार्यक्रम में सीडब्ल्यूसी सदस्य प्रतिमा तिवारी,  सदस्य बृजकिशोर ओसी आतु, विनीता कुमारी सीडीपीओ, निर्मला करण, पम्मी सिन्हा, मीना ठाकुर, बीबीए के ब्रजेश मिश्रा, प्रतिज्ञा के अध्यक्ष अजय कुमार, रश्मि कुमारी भी उपस्थित थीं.

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