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338 स्कूलों के 776 व्यावसायिक शिक्षकों को 16 महीने से नहीं मिला है मानदेय, निजी कंपनी निकालने की दे रही धमकी

व्यावसायिक शिक्षकों ने जेईपीसी के अधिकारियों की लापरवाही और एजेंसी से मिलीभगत को बताया वजह

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Ranchi: झारखंड के सरकारी स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए व्यवसायिक शिक्षकों की नियुक्ति की गयी. यह सत्र 2016 से चालू किया गया है. राज्य में फिलहार 388 हाई और प्लस टू के स्कूलों में चल रहा है. सभी 388 स्कूलों में दो-दो विभिन्न ट्रेडों की पढ़ाई करायी जा रही है.

व्यावसायिक शिक्षक संघ ने बताया कि पिछले 16 महीनों का मानदेय उन्हें नहीं दिया गया है. उन्होंने बताया कि झारखंड राज्य शिक्षा परियोजना के अधिकारी कहते हैं कि निजी कंपनियां आपको वेतन का भुगतान करेंगी. वहीं निजी कंपनी से मांगने पर काम से निकालने की धमकी दी जाती है.

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व्यावसायिक शिक्षकों का कहना है कि जेईपीसी के अधिकारियों की लापरवाही और निजी कंपनी के साथ मिली भगत से उन्हें वेतन का भुगतान नहीं किया जा रहा है. जेईपीसी कहती है कि कंपनी को वेतन रिलीज कर दिया गया है, पर कंपनी इससे इनकार कर देती है. व्यावसायिक शिक्षकों की नियुक्ति सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यवसायिक शिक्षा संस्थान भोपाल के जरिये की गयी है.

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बजट से ज्यादा कर्ज हो गया है, मानदेय कहां से देगी सरकारः हेमंत

प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन ने मानदेय नहीं मिलने को लेकर ट्वीट किया है. जिसमें उन्होंने कहा कि सरकार के पास तो बजट से ज्यादा कर्ज हो गया है. वो युवाओं को मानदेय कहां से देगी. हेमंत ने कहा कि ये रघुवर दास की सरकार लुटेरी सरकार है, कुछ नहीं करेगी.

युवाओं को पिछले 16 महीने से मानदेय नहीं दिया गया है. विभिन्न जिला और ट्रेड के आधार पर विभिन्न कंपनियों के द्वारा व्यावसायिक शिक्षकों को मानदेय के आधार पर रखा गया है. कई जिलों में पिछले दस महीने से तो किसी में पिछले 16 महीने से मानदेय का भुगतान नहीं किया गया है.

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आठ ट्रेड की व्यावसायिक शिक्षा दी जा रही है

विभिन्न स्कूलों में कुल आठ ट्रेड की पढ़ाई करायी जाती है. एग्रीकल्चर, अपेरल्स एंड होम, फर्निशिंग, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, आइटी, मल्टी स्किलिंग, रीटेल तथा टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी शामिल है. इन सभी व्यावसायिक शिक्षकों को पहले 15 हजार मानदेय दिया जाता था. 2018-19 में बढ़ा कर 20 हजार कर दिया गया है.

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