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स्वास्थ्य विभाग सचेत रहता तो बर्बाद नहीं होती 75 हजार लोगों की कोरोना वैक्सीन

विभाग ने वैक्सीन की इतनी बर्बादी को चिंतायोग्य नहीं बताया

Anuj Tiwary

Ranchi: झारखंड में अभी तक करीब 11 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन दिया जा चुका है. इसी बीच करीब सात फीसद तक वैक्सीन लगभग हर जिले में बर्बाद हुई.

यानी अब तक करीब 75 हजार लोगों को दी जाने वाली वैक्सीन बर्बाद हो चुकी है. केंद्र ने भी वैक्सीन की बर्बादी पर दुख जाताया है और राज्यों से इसपर रोक लगाने के लिये कदम उठाने को कहा है.

नियमानुसार नया वैक्सीन खुलने के चार घंटे के अंदर ही लगाया जाना चाहिए. इसके खराब होने का मुख्य कारण यह है कि वैक्सीन खुलने के बाद समय पर लोग आते नहीं और वैक्सीन बर्बाद हो जाता है. शुरुआती दिनों में झारखंड समेत देश के अन्य राज्यों से भी 13 प्रतिशत तक वैक्सीन खराब होने की शिकायतें आती रही थी.

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लगातार बर्बाद हो रहे वैक्सीन पर लगाम लगाने के लिए एनआरएचएम के मिशन निदेशक रविशंकर शुक्ला ने सभी जिलों के उपायुक्त व सिविल सर्जनों को निर्देश दिया है कि इस पर रोक लगे.

वैक्सीन लेने वालों की संख्या पर्याप्त होने के बाद ही वैक्सीन देने की शुरुआत करें. इन्होंने बताया कि केंद्र की ओर से तय गाइडलाइन के तहत वैक्सीनेशन हो रहा है. इन्होंने दावा किया कि बर्बादी की दर अन्य राज्यों की तुलना झारखंड में कम है.

रांची के सिविल सर्जन डॉ वीबी प्रसाद के अनुसार रांची में पांच से सात फीसद तक वैक्सीन बर्बाद हो रहा है. उनके अनुसार वैक्सीन की इतनी बर्बादी चिंता योग्य नहीं है. यहां तय लक्ष्य का 57 से 60 फीसद तक वैक्सीनेशन हो रहा है.

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कैसे होती है वैक्सीन की बर्बादी

कोवैक्सीन के एक वॉयल में 20 डोज होता है और कोविशील्डी के वॉयल में 10 डोज होते हैं. ऐसे में वैक्सी नेशन सेंटर पर दो-चार भी आदमी जाते हैं तो पूरा वॉयल खोलना पड़ता है और बाकी बची वैक्सी न बिना लगाए खराब हो जाता है.

एक बार वॉयल खुलने के बाद इसे चार घंटे के अंदर इस्तमाल कर लेना जरूरी है. लेकिन ऐसे में ये बची हुई डोज फेंकनी ही पड़ती हैं. वैक्सीनेशन के इंचार्ज डॉ विमलेश सिंह बताते हैं कि अब शाम को वैक्सीन केंद्र बंद होने से पहले लोगों की संख्या देख कर ही आखरी वॉयल खोलने का निर्देश दिया गया है.

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