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झारखंड में सिविल डिपोजिट में पड़े हैं विकास योजनाओं के 7339 करोड़ रुपए

Ranchi : विकास की विभिन्न योजनाओं से जुड़ी 7339 करोड़ रुपये की राशि सिविल डिपोजिट में पड़ी है. यह आंकड़ा वर्ष 2001 से लेकर अब तक के हैं. राज्य सरकार के वित्तीय आंकड़ों से इस बात की जानकारी मिली है. यह मामला शीतकालीन सत्र में विधायक मनीष जायसवाल ने सदन में उठाया. विधायक जायसवाल ने कहा कि राज्य में सरकार द्वारा राशि का बहाना बनाकर वर्षों पुरानी जनहित योजनाओं को अधूरी छोड़ दी गयी है. जितनी राशि लंबित पड़ी हुई है उससे नयी योजनाओं की शुरूआत कर और पुरानी योजनाओं को पूरी कर सैकड़ों लोगों को लाभान्वित कर सकते थे. सरकार ने माना कि सिविल डिपोजिट राशि पड़ी है. लेकिन, लोगों के मूलभूत सुविधाएं देने के लिये सरकार सिविल डिपोजिट से राशि खर्च भी कर रही है.

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सरकार का कहना है कि सिविल डिपोजिट की राशि से खर्च होते रहते हैं. सिविल डिपोजिट में राशि केवल वर्कस डिपोजिट के लिये नहीं होता है, बल्कि, अन्य कार्यों के लिये भी इस्तेमाल किया जाता है. जैसे सिविल कोर्ट, क्रीमिनल कोर्ट डिपोजिट व सिक्युरिटी डिपोजिट आदि. वित्तीय वर्ष 2019-20 में सिविल डिपोजिट 9339.00 रु में से वर्कस डिपोजिट के लिये 4459.33 करोड़ रु खर्च किये जाने हैं. वहीं, 2302.26 करोड़ रु महालेखाकार(लेखा व हकदारी) द्वारा खर्च किया जाना है.

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विधायक ने पूछा कि खंड-01 में जो राशि है उससे लंबित सभी योजनाओं को चालू वित्तीय वर्ष में पूरा होगा या नहीं अगर होगा तो कब तक? अपने जवाब में सरकार ने कहा कि खंड-01 में निर्धारित राशि 9339.00 करोड़ रु में से 4492.33 करोड़ रु लोक निर्माण कार्य में जमा है. प्रत्येक वर्ष यह राशि इस खाते में जमा होते रहती है और यह वैधानिक प्रक्रिया भी है.

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