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प्रभावित राज्यों से 73251व विदेशों से 911 लोग लौटे झारखंड, सिर्फ 197 की ही जांच, क्योंकि टेस्ट किट ही है कम

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-जिस अस्पताल को 1250 बेड का आइसोलेशन सेंटर बनाने की है बात वहां सिर्फ 100 पीपीई किट

-500 कोरोना जांच किट में 98 का हो चुका है इस्तेमाल

– राज्य में लौटे 73251 लोगों की स्क्रीनिंग कराने का सरकार ने किया दावा

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-राज्य में 44 प्रतिशत है कुपोषण का आंकड़ा

Kumar Gaurav

Ranchi: पूरे देश में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है. इससे निपटने के लिए 24 मार्च की आधी रात से ही पूरे देश को लॉकडाउन कर दिया गया है. देश भर में प्रतिदिन कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है, पर झारखंड इससे अछूता है.

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अभी तक कोरोना के एक भी संक्रमित झारखंड में नहीं मिले हैं. इस राहत देने वाली खबर के बीच चिंतित करने वाले सवाल हर झारखंडियों के मन में उत्पन्न हो रहे हैं. क्या सच में यहां कोरोना के एक भी संक्रमित मरीज नहीं हैं.

और ये सवाल इसलिए, क्योंकि राज्य में देशभर से कुल 73251 लोग वापस लौटे हैं. सिर्फ विदेशों से 911 लोग झारखंड आये हैं. और ऐसे में 29 मार्च तक सिर्फ 197 संदिग्धों के सैंपल लिये गये हैं. जिनके सैंपल लिये गये हैं रिपोर्ट में सभी के सभी को निगेटिव बताया गया है.

29 मार्च को एक संदिग्ध को रीटेस्ट के लिए बोला गया है. यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है कि नार्थ ईस्ट भारत को छोड़ दिया जाए तो सिर्फ झारखंड ही इससे अछूता है. झारखंड अब तक कोरोना मुक्त है, यह खुशी की बात है या बड़ा सवाल है. इसे समझना होगा.

इसलिए समझना जरुरी है कि झारखंड देश को बड़ी संख्या में मजदूर सप्लाई करता है, वे मजदूर प्रभावित राज्यों से लौटे भी हैं. इसके अलावा राज्य में कुपोषण का आंकड़ा 44 फीसदी का है. कुपोषण के कारण रोगों से लड़ने की क्षमता कितनी होगी, यह सोचने की बात है. ऐसे में अगर हम कोरोना से बचे हुए हैं तो यह खुशी कम और सोचने को मजबूर ज्यादा कर रहा है.

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500 कोरोना जांच किट ही थे रिम्स के पास, 98 हो चुके हैं यूज

कोरोना मरीजों की जांच के लिए जिस जांच किट का उपयोग किया जा रहा है उसकी संख्या 500 से 550 के बीच ही थी. जिसमें से 98 किट का इस्तेमाल हो चुका है. लगभग 400 किट ही हैं. अगर बड़ी संख्या में मरीज एक साथ आ जाएंगे तो रिम्स में जांच कैसे संभव हो पाएगा.

जिस तरीके से गांव मोहल्ले में लोग सोशल डिस्टेंसिंग को नहीं मान रहे हैं. एक जगह एकत्रित हो रहे हैं. ऐसे में कोरोना का एक भी संक्रमित मिला तो पूरा का पूरा इलाका संक्रमित हो जाएगा. इससे नाकारा नहीं जा सकता.

अगर ऐसा हो गया तो शायद ही सभी की तत्काल जांच हो सकेगी. इसको लेकर स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने जल्द से जल्द केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से कोरोना जांच किट और पीपीई किट उपलब्ध कराने की मांग की थी पर अभी तक पहुंच नहीं पाया है.

पीपीई किट नहीं मिलने से परेशान जूनियर डॉक्टर इलाज बहिष्कार की कर चुके हैं बात

रिम्स के जूनियर डॉक्टर पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूप्मेंट किट) नहीं मिलने से परेशान हैं. उनका कहना है कि अगर उन्हें पीपीई किट नहीं दी जाती है तो वो इलाज का बहिष्कार कर देंगे. मरीजों का इलाज नहीं करेंगे.

इसको लेकर रिम्स निदेशक ने कहा कि पॉजिटिव मरीज मिलने के बाद ही वो उन्हें पीपीई किट मुहैया कराएंगे. जूनियर डॉक्टरों का कहना है कि जब पॉजिटिव मरीज मिल ही जाएगा, हम संक्रमण में आ ही जाएंगे तो पीपीई किट लेकर क्या करेंगे.

रिम्स निदेशक ने कहा था कि हमारे पास 100 पीपीई किट हैं. मतलब जिस अस्पताल को 1250 बेड का आइसोलेशन सेंटर बनाने की बात कही गयी है, उस अस्पताल में सिर्फ 100 पीपीई किट हैं, यह खुद में एक बड़ा सवाल है.

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