न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

4

 

असम : तुनसुकिया में उल्फा उग्रवादियों ने पांच युवाओं को अगवा कर हत्या कर दी

Guwahati : असम के तुनसुकिया में उग्रवादी हमले में पांचलोगों के मारे जाने की खबर है. जानकारी के अनुसार उल्फा (आई) उग्रवादियों ने इन लोगों को अगवा कर गोली मार दी. जिसमें पांच लोगों की मौत हो गयी. मारे गये लोगों के नाम श्यामलाल बिस्वास, अनंत बिस्वास, अभिनाश बिस्वास, सुबोध दास बताये गये हैं. बताया गया है कि गुरुवार शाम लगभग पौने आठ बजे हुए उग्रवादियों ने छह युवाओं को उठा लिया. इसके बाद उग्रवादी इन सभी युवाओं को ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे ले गये और उन्हें गोली मार दी. खबरों के अनुसार इनमें से चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गयी और एक की मौत अस्पताल ले जाते समय हो गयी. एक घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. हमले के संबध में असम पुलिस के एडीजीपी मुकेश अग्रवाल ने कहा है कि हमले के पीछे उल्फा (आई) के उग्रवादियों का हाथ है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने श्यामलाल बिस्वास, अनंत बिस्वास, अभिनाश बिस्वास, सुबोध दास की हत्या की निंदा की है. ममता ने सवाल किया है कि क्या यह एनआरसी की वजह से हुआ है.

हमले के दोषियों को तुरंत सजा दी जाये :  ममता

ममता ने कहा है कि इन लोगों की मौत पर दुख और मृतकों के परिजनों से संवेदना जाहिर करने के लिए उनके पास शब्द ही नहीं हैं. उन्होंने कहा है कि हमले के दोषियों को तुरंत सजा दी जाये. इससे पहले, असम के गुवाहाटी में 13 अक्टूबर को भी एक धमाका हुआ था जिसमें चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गये थे.  धमाका शुक्लेश्वर घाट के पान बाजार पास हुआ था. गुवाहाटी के जॉइंट सीपी दिगांत बोरा के अनुसार लगभग पौने बारह बजे रिवर फ्रंट के नजदीक धमाका हुआ. चश्मदीदों ने बताया कि धमाका शक्तिशाली था, इसमें घाट की चहारदीवारी टूट गयी. धमाके की वजह से इस इलाके में जाम लगने की खबर है.

 

इसे भी पढ़ें :

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं.

हमें सपोर्ट करें
स्वंतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकट लगातार गहराता जा रहा है. भारत के लोकतंत्र के लिए यह एक गंभीर और खतरनाक स्थिति है.इस हालात ने पत्रकारों और पाठकों के महत्व को लगातार कम किया है और कारपोरेट तथा सत्ता संस्थानों के हितों को ज्यादा मजबूत बना दिया है. मीडिया संथानों पर या तो मालिकों, किसी पार्टी या नेता या विज्ञापनदाताओं का वर्चस्व हो गया है. इस दौर में जनसरोकार के सवाल ओझल हो गए हैं और प्रायोजित या पेड या फेक न्यूज का असर गहरा गया है. कारपोरेट, विज्ञानपदाताओं और सरकारों पर बढ़ती निर्भरता के कारण मीडिया की स्वायत्त निर्णय लेने की स्वतंत्रता खत्म सी हो गयी है.न्यूजविंग इस चुनौतीपूर्ण दौर में सरोकार की पत्रकारिता पूरी स्वायत्तता के साथ कर रहा है. लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इसमें आप सब का सक्रिय सहभाग और सहयोग हो ताकि बाजार की ताकतों के दबाव का मुकाबला किया जाए और पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा करते हुए जनहित के सवालों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाए. हमने पिछले डेढ़ साल में बिना दबाव में आए पत्रकारिता के मूल्यों को जीवित रखा है. इसे मजबूत करने के लिए हमने तय किया है कि विज्ञापनों पर हमारी निभर्रता किसी भी हालत में 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो. इस अभियान को मजबूत करने के लिए हमें आपसे आर्थिक सहयोग की जरूरत होगी. हमें पूरा भरोसा है कि पत्रकारिता के इस प्रयोग में आप हमें खुल कर मदद करेंगे. हमें न्यूयनतम 10 रुपए और अधिकतम 5000 रुपए से आप सहयोग दें. हमारा वादा है कि हम आपके विश्वास पर खरा साबित होंगे और दबावों के इस दौर में पत्रकारिता के जनहितस्वर को बुलंद रखेंगे.

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

Open

Close
%d bloggers like this: