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बैंकों में, शेयरों और इंश्योरेंस में लावारिस पड़े हैं 70 हजार करोड़, आपके भी हो सकते हैं

देश के बैंकों के पास 20,000 करोड़ जमा हैं, जि‍नका कोई दावेदार नहीं है.

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NewDelhi : देश की विभिन्न संस्थाओं में 70 हजार करोड़ रुपये का कोई माई बाप नहीं है. यह राशि लावारिस पड़ी है.  इतनी बड़ी राशि का कोई लेनदार ही नहीं है. बताया गया है कि कई लाेेग शेयर खरीदकर, पोस्ट ऑफिस स्कीम्स या बैंक खातों में जमा पैसे जमा कर या फिर इंश्योरेंस खरीद कर भूल गये.  इनमें कुछ लोगों की मौत हो गयी और उनके परिवारों को जमा रकम की जानकारी ही नहीं है.  दूसरी वजह यह कि कई लोगों ने पैसे जमा करने शुरू किये, लेकिन मेेच्योरिटी तक निवेश बरकरार नहीं रख पाये.

इन परिस्थितियों में अलग-अलग जगहों पर जमा राशि  को कोई दावेदार सामने ही नहीं आ रहा है.  देश के बैंकों के पास 20,000 करोड़ जमा हैं, जि‍नका कोई दावेदार नहीं है.  बता दें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का  डिपॉजिटर एजुकेशन ऐंड अवेयरनेस फंड (डीईए फंड) उन बैंक खातों पर कब्जा कर लेती है , जिन पर 10 वर्षों तक कोई दावा नहीं करता.  जून 2018 तक ऐसे लावारिस पड़े बैंक अकाउंट्स से डीईए फंड को 19,567 करोड़ रुपये मिले थे.

एक कंपनी पीयरलेस जनरल फाइनैंस ऐंड इन्वेस्टमेंट में कई लोग पैसे निवेश कर भूल गये. बता दें कि  15 साल में ऐसे लोगों के निवेश की राशि बढ़कर 1,514 करोड़ रुपये हो चुकी है. जान लें कि 15 साल पहले कंपनी ने छोटे निवेशकों को डिपॉजिट सर्टिफिकेट्स बांटकर 1.49 करोड़ रुपये जुटाए थे. उस समय 51% डिपॉजिट सर्टिफिकेट्स 2,000 रुपये या इससे कम कीमत पर जारी किये गये थे.

कंपनी मामलों के मंत्रालय ने इससप्ताह जानकारी दी है कि  यह राशि अब सरकार के अधीन इन्वेस्टर एजुकेशन ऐंड प्रॉटेक्शन फंड (IEPF) में ट्रांसफर हो गयी है.  इसी तरह आईईपीएफ में सात वर्षों में लावारिस पड़ी कंपनियों के घोषित लाभांश और शेयर ट्रांसफर किये गये  हैं.  इस फंड में कुल 4,138 करोड़ रुपये जमा हैं.

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बीमा कंपनियों के पास बीमाधारकों के 16,000 करोड़ रुपये लावारिस पडे हैं

इसके अलावा, यहां कंपनियों ने 21,232.15 करोड़ रुपये मूल्य के 65.02 करोड़ शेयर भी जमा हैं.  इस क्रम में 24 जीवन बीमा कंपनियों के पास बीमाधारकों के 16,000 करोड़ रुपये लावारिस पड़े हैं.  इसका 70% यानी कुल 10,509 करोड़ रुपये सिर्फ एलआईसी के बीमाधारकों के है.  यह आंकड़ा 31 मार्च, 2018 का ही है.  साथ ही 24 गैर-जीवन बीमा कंपनियों के पास पड़े 848 करोड़ रुपयों का कोई दावेदार नहीं है.

डाक घरों में हैैं 9,395 करोड़ रुपये

देश के विभिन्न डाक घरों में जमा 9,395 करोड़ रुपये के दावेदार सामने नहीं आये हैं.  लोगों ने डाक घर योजना के तहत पैसे जमा किये, लेकिन मच्योरिटी पीरियड के बाद भी कई दावेदार नहीं आये.  कई ऐसे भी लोग हैं जिन्होंने छोटी-छोटी बचत योजनाओं में पैसे जमा कराने तो शुरू किये,  लेकिन कुछ दिनों पर जमा कराना बंद कर दिया.

ऐसे लोग भर अपनी जमा रकम वापस लेने भी नहीं आये. इस ताह कुल रकम को जोड़ा जाये,  तो यह 70,000 करोड़ रुपये पर पहुंचती है।. इन निवेशों में ज्यादातर लावारिस पड़े हैं क्योंकि कई निवेशकों की मौत हो चुकी है और उनके परिवार को इसकी जानकारी नहीं है या फिर वे अपना दावा साबित ही नहीं कर पा रहे हैं.

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