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झारखंड में चरमरा सकती है कानून व्यवस्था, 70 हजार पुलिसकर्मी 28 से जायेंगे हड़ताल पर

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Ranchi:  झारखंड में आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था की स्थिति चरमरा सकती है. 7 सूत्री मांग पूरा नहीं होने पर राज्य भर के 70 हजार पुलिसकर्मियों ने 28 फरवरी से 4 फरवरी तक सामूहिक अवकाश पर जाने की घोषणा की है. और अगर ऐसा हुआ तो राज्य में केवल आईपीएस और डीएसपी स्तर के अधिकारियो के भरोसे ही जनता की सुरक्षा रह जायेगी.

पुलिस कर्मी तीसरे चरण के आंदोलन के तहत जायेंगे हड़ताल पर 

प्रथम चरण के तहत काला बिल्ला लगाकर काम करने और द्वितीय चरण में एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम समाप्त हो चुका है. तीनों संघ के प्रतिनिधियों का कहना की हमारी सात सूत्री मांग पूरी नहीं होती है तो तीसरे चरण के आंदोलन के तहत 27 फरवरी की रात्रि 12 बजे से 4 मार्च तक के लिए 5 दिनों का सामूहिक अवकाश में जाने का कार्यक्रम प्रारंभ हो जायेगा.

पुलिस महानिदेशक के साथ वार्ता हुई विफल 

बता दें कि 11 फरवरी को पुलिस मुख्यालय में झारखंड पुलिस एसोसिएशन,  झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन तथा झारखंड पुलिस चतुर्थवर्गीय कर्मचारी संघ की पुलिस महानिदेशक के साथ हुई वार्ता विफल हो गयी थी. तीनों संघों के प्रतिनिधियों की पुलिस मुख्यालय में झारखंड पुलिस के आलाधिकारियों के साथ बैठक हुई थी. जिसकी अध्यक्षता झारखंड पुलिस महानिदेशक ने की थी.

 चुनाव की तैयारी में जुटे पुलिसकर्मी  

इस मामले में एडीजी मुरारी लाल मीणा ने कहा कि पुलिस मुख्यालय के तरफ से पुलिसकर्मियों से अनुरोध किया गया है कि चुनाव सामने हैं. कभी भी चुनाव की तारीख घोषित हो सकती है. ऐसे समय में पुलिस विभाग को अनुशासन में रहकर चुनाव की तैयारी करनी चाहिए. पुलिस विभाग हड़ताल पर जायेंगे तो गलत मैसेज जायेगा. हड़ताल के लिए यह गलत समय चुना गया है. मांगों पर सरकार सहानुभूति पूर्वक विचार कर रही है.

जरूरत पड़ी तो हमारे जवान शरीर और खून देकर करेंगे सेवा  

इस मामले में जब पुलिस मेंस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राकेश पांडे से बात की गयी तो उन्होंने कहा कि 2011 से पुलिस कर्मियों की मांग है. 1 महीने का अतिरिक्त वेतन दिया जाये. अतिरिक्त वेतन के रूप में हमलोग सरकार से अनुदान नहीं मांग रहे हैं. पुलिस के जवान छुट्टी के दिन भी काम में लगे रहते हैं. उसके एवज में एक महीने का अतिरिक्त वेतन दिया जाये. आज भी पुलिस कम पैसे में जनता को सेवा देना जानती है. चुनाव का अगर माहौल है तो 2011 से तो चुनाव नहीं हो रहा है. चुनाव की बात कहकर, हमलोग पर लांछन लगाना गलत बात है. हमलोग चुनाव को सफल बनायेंगे. और बिना वेतन के भी चुनाव ड्यूटी करेंगे. सरकार हमलोग को जनता की सेवा करने से वंचित कर रही है. पुलिसकर्मी जवान अगर हड़ताल में भी रहेंगे और जहां मानवीय संवेदना की जरूरत पड़ेगी, तो पुलिसकर्मी शरीर और अपने खून देकर सेवा करेंगे.

 28 फरवरी को पुलिस लाइन प्रस्थान कर जायेगे पुलिसकर्मी  

पुलिस मेंस एसोसिएशन के उपाध्यक्ष राकेश पांडे ने बताया कि 27 फरवरी को सभी जिला के पुलिस अधीक्षक, जैप के समादेष्टा और सभी जवान जहां भी कार्यरत हैं, उनके जो छुट्टी नियंत्रण अधिकारी हैं उनको लेटर दे दिया जायेगा. और 28 फरवरी से पुलिसकर्मी के जवान अपने-अपने जिले के पुलिस लाइन प्रस्थान कर जायेंगे.  वह अपने घर नहीं जायेंगे. पुलिस लाइन में ही रहेंगे लेकिन काम नहीं करेंगे.

 क्या हैं सात सूत्री मांगें

  • झारखंड पुलिस एसोसिएशन और मेंस एसोसिएशन, राज्य सरकार द्वारा की जा रही सिपाही से सीधे एसआई की भर्ती को रद्द करने की मांग कर रही है. एसोसिएशन के अनुसार अगर सिपाही को सीधे दारोगा बना दिया जायेगा, तो कई लोगों का प्रमोशन बाधित हो जायेगा.
  • मुख्यमंत्री रघुवर दास ने एक कार्यक्रम के दौरान घोषणा की थी कि राज्य के पुलिसकर्मियों को 13 माह का वेतन दिया जायेगा. मुख्यमंत्री की घोषणा के 2 साल बीत जाने के बाद भी अभी तक यह व्यवस्था सरकार की तरफ से लागू नहीं की गयी.
  • सातवें वेतन आयोग की अनुशंसा के अनुरूप पुलिसकर्मियों को मिलने वाले भत्ते तथा वर्दी भत्ता, राशन मनी, धुलाई भत्ता, भोज भत्ता, प्रशिक्षण भत्ता, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में 25% अतिरिक्त भत्ता एवं अन्य सभी भत्तों को निरंतर से लागू किया जाये तथा अपराध अनुसंधान विभाग, विशेष शाखा, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में पदस्थापित पुलिसकर्मियों को राज्य के जिला/ इकाई में पदस्थापित पुलिसकर्मियों की तरह वर्दी भत्ता दिया जाये.
  •  एसीपी/एमएसीपी की लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण कराया जाये तथा एसीपी के लिए काल गणना नियुक्ति की तिथि में की जाये. प्रशिक्षण की तिथि से गणना करने की नियमावली को संशोधित किया जाये.
  • शहीद पुलिसकर्मियों के आश्रित पुत्र की नौकरी हेतु निर्धारित उम्र सीमा में अन्य आश्रितों की तरह अधिकतम उम्र सीमा की छूट दी जाये एवं आश्रित परिजनों को मिलने वाली राशि में से 25 % उसके माता पिता को दी जाये.
  • नई पेंशन नियमावली की जगह पुरानी पेंशन योजना को लागू किया जाये.
  • वरीय पुलिस पदाधिकारियों की तरह कनीय पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जाये तथा प्रतिपूर्ति की नियमावली को सरल बनाया जाये.

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