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7% घरों में ही है पाइप जलापूर्ति सुविधा, जल जीवन योजना से 2024 तक सभी को नल से जल की मिलेगी सुविधाः मिथिलेश ठाकुर

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  • 1.50 लाख जलस्रोतों की गुणवत्ता की जांच करेंगीं जलसहिया
  • राज्य में हैं 625 फ्लोराइड प्रभावित टोले, 8 आर्सेनिक प्रभावित टोले

Ranchi: केंद्र और राज्य सरकार मिल कर झारखंड में जल जीवन मिशन योजना चला रही हैं. योजना के तहत राज्य के सभी जिलों में 2024 तक हर घर को नल से जल की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. साथ ही स्थानीय जल संसाधन के समग्र प्रबंधन को बढ़ावा देना भी इसका उद्देश्य है. पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने बुधवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में जल जीवन मिशन पर आयोजित राज्य स्तरीय परामर्श कार्यशाला में ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य जलसंकट समस्या का हर हाल में समाधान और जल स्रोतों के प्रबंधन को प्रोत्साहित करना है.

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जल जीवन योजना में 50:50 की हिस्सेदारी

मिथिलेश ठाकुर ने कहा कि जल जीवन मिशन योजना में केंद्र और राज्य की 50:50 की भागीदारी है. मिशन अंतर्गत प्रति परिवार को 47,000 रुपये की राशि उपलब्ध करायी जानी है. हालांकि झारखंड में टोलों की बसावट एवं स्रोत की दूरी के कारण योजना की लागत लगभग 65,000 से 75,000 रुपये के बीच आती है.

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योजना के अनुसार केंद्र का अंशदान 23,500 प्रति परिवार ही है. ऐसे में शेष राशि का व्यय राज्य सरकार को ही करना होगा. इस हिसाब से वास्तविक रूप से केंद्र एवं राज्य का अनुपात लगभग 35:65 प्रतिशत होगा.

पाइप जलापूर्ति योजना से अब तक मात्र 7 फीसदी परिवारों को ही लाभ

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के घरों में पाइप जलापूर्ति योजना से आच्छादन मात्र लगभग सात फीसदी ही है. राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में 50 लाख घर हैं. इनमें से लगभग 3.40 घरों को पाइप जलापूर्ति के जरिये जल की सुविधा मिल रही है.

मंत्री श्री ठाकुर के अनुसार राज्य के विभिन्न टोलों और बसावटों में आदिम जनजातियों के लगभग 78000 परिवार हैं. इनमें लगभग तीन लाख की आबादी रहती है. सोलर आधारित पीवीटीजी तथा मुख्यमंत्री जन नल योजना के तहत 14892 लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है. इससे दो लाख सत्तर हजार घरों को लाभ मिलेगा.

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सभी जिलों में है जल जांच प्रयोगशाला

राज्य के सभी 24 जिलों में जल जांच प्रयोगशाला है. इनमें प्रतिमाह लगभग 300 जलस्रोतों की जांच की जा रही है. प्रमंडल स्तर पर भी पांच जल जांच प्रयोगशालाएं स्थापित हैं. इसके जरिये प्रतिमाह लगभग 150 जलस्रोतों की जांच की जा रही है.

राज्य की विभिन्न पंचायतों में लगभग 1.50 लाख जलस्रोतों के गुणवत्ता की जांच जलसहियाओं के माध्यम से करायी जायेगी. राज्य में 625 फ़्लोराइड प्रभावित टोले हैं. इनमें से 245 टोलों में फ्लोराइड अटैचमेंट तथा पाइप जलापूर्ति योजनाओं से आच्छादित कर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है.

कार्यशाला में विभागीय सचिव आराधना पटनायक के अलावा विभागीय अभियंता, जल संसाधन, पंचायती राज तथा दूसरे विभागों के अलावा यूनिसेफ व अन्य एनजीओ के प्रतिनिधि भी मौजूद थे.

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