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6th jpsc : सफल अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से फिर बड़ी राहत मिली, अगली सुनवाई 5 अक्तूबर को

Ranchi : 6th जेपीएससी पीटी रिजल्ट (क्वालिफाइंग मार्क्स) को लेकर सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती देने वाली अपील याचिकाओं पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान जेपीएससी सिविल सेवा के सफल अभ्यर्थियों को एक बार फिर से बड़ी राहत मिली है. सुनवाई के दौरान अपीलार्थियों की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण और वरीय अधिवक्ता पीएन शाही और अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया और प्रतिवादियों की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, अजीत कुमार, सुभाष रसिक सोरेन, अमृतांश वत्स, अपराजिता भारद्वाज और कुमारी सुगंधा ने अपना पक्ष रखा. सभी पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ. रविरंजन और न्यायमूर्ति सुजीत नारायण की खंडपीठ ने यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 5 अक्तूबर् को दोपहर सवा दो बजे निर्धारित की है.

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बता दें कि पिछली सुनवाई के बाद अदालत ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी थी,फलस्वरूप छठी जेपीएससी के सफल उम्मीदवारों को राहत मिली थी. अदालत ने एकलपीठ में मेरिट लिस्ट को चुनौती देने वाले सभी प्रार्थियों को इस मामले में प्रतिवादी बनाने के लिए नोटिस जारी करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 28 सितंबर निर्धारित की थी. एकलपीठ ने सात जून को छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट को रद्द कर दिया था और सरकार को आठ सप्ताह में नयी मेरिट लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया था. इस आदेश से 100 से अधिक सफल उम्मीदवारों की नौकरी जाने का खतरा था. इसके बाद 140 सफल उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में एकलपीठ के आदेश के खिलाफ अपील दायर की, जिसपर 11 अगस्त को सुनवाई करते हुए कोर्ट ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था.

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किसी दूसरे पेपर में न्यूनतम अंक लाने की शर्त नहीं

पिछली सुनवाई के दौरान सफल अभ्यर्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता प्रशांत भूषण, वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार सिन्हा और सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखते हुए कहा कि पेपर वन (हिंदी और अंग्रेजी) का अंक कुल प्राप्तांक में जोड़ा जाना सही है. यह दोनों क्वालीफाइंग पेपर हैं, क्योंकि इसमें निर्धारित न्यूनतम अंक लाने वाले को ही पास माना जाएगा, भले ही वे दूसरे अन्य पेपर में फेल हों. जेपीएससी ने पेपर-वन के अलावा किसी भी अन्य पेपर में न्यूनतम अंक लाने की शर्त नहीं लगाई है.

क्वालीफाइंग अंक नहीं जोड़ा जाता तो 950 अंक ही होते

अदालत को बताया गया कि जेपीएससी ने विज्ञापन में ही 1050 अंक निर्धारित किए हैं.इसमें पेपर-वन को जोड़ने के बाद ही कुल प्राप्तांक 1050 के बराबर होता है. अगर पेपर-वन के अंक को हटा दिया जाए तो निर्धारित 1050 से कम यानी 950 अंक ही आते हैं, इसलिए जेपीएससी के द्वारा मुख्य परीक्षा के परिणाम में उनके मार्क्स जोड़ा जाना उचित है.

सरकार एकलपीठ के आदेश से सहमत

सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि राज्य सरकार ने एकल पीठ के आदेश के पालन का निर्णय लिया है. इसी कारण सरकार की ओर से अपील दाखिल नहीं की गई है. जेपीएससी ने भी राज्य सरकार के निर्णय पर सहमति जताई. इस पर अदालत ने कहा कि एकल पीठ में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जेपीएससी के स्टैंड का बचाव किया था, लेकिन अब वह अपील में तटस्थ हो गई है.

क्या है एकलपीठ का आदेश

एकल पीठ ने छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट रद्द करते हुए दोबारा संशोधित मेरिट लिस्ट जारी करने का निर्देश दिया था. अदालत ने माना था कि कि पेपर वन (हिंदी व अंग्रेजी) के क्वालिफाइंग मार्क्स को कुल प्राप्तांक में नहीं जोड़ा जा सकता है. यह विज्ञापन की शर्तों के विपरीत है. अदालत ने इस मामले के लिए जिम्मेदार जेपीएससी के पदाधिकारियों पर कार्रवाई करने का भी आदेश दिया था. इस आदेश से प्रभावित होने वाले 140 से ज्यादा चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अपील दाखिल कर एकल पीठ के आदेश को निरस्त करने की मांग की थी. याचिका में कहा गया था कि जेपीएससी की ओर से जारी मेरिट लिस्ट में कोई त्रुटि नहीं है.

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