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करोड़ों खर्च कर बनाये गये 67 मॉडल टॉयलेट, अब गंदगी और बदबू से लोग परेशान

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Roshan Kumar Sinha

Dhanbad: धनबाद नगर निगम में साफ-सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का दुरुपयोग हो रहा है. निगम के विभिन्न क्षेत्र में बनाये 67 मॉडल टॉयलेट की दशा देखकर कोई भी यही कहेगा. स्वच्छता की अच्छी रैंकिंग के लिए बनाये गये इन टॉयलेट के पास से गुजरते हुए भी घिन्न आती है. पूरे निगम क्षेत्र में अच्छी हालत में किसी मॉडल टॉयलेट को ढूंढ़ना चुनौतीपूर्ण है.

मॉडल टॉयलट अनदेखी का शिकार

निगम क्षेत्र में 67 मॉडल टॉयलेट दो तरीके से बनाये गये. कोई 2 सीटर तो कोई 4 सीटर. आज की तारीख में सभी टॉयलेट बद्बूदार हैं. टॉयलेट बाहर से जितना खूबसूरत दिखाई देता है, अंदर से उतना ही बदसूरत और बदबूदार है. वजह है कि बनने के बाद से आज तक मॉडल टॉयलेट की साफ-सफाई नहीं हुई.

ऐसे टॉयलेट इतने अच्छे से बनकर तैयार किया गया था कि देखकर लोग इसकी चर्चा करते थे. कई जगह टॉयलेट में पानी-बिजली की भी व्यवस्था की गई, ताकि किसी को भी इमरजेंसी हो तो इस मॉडल शौचालय का उपयोग कर सकें. पर आज स्थिति यह है कि मॉडल टॉयलेट की स्थिति को देखकर लोग अंदर जाना भी नहीं चाहते. इसकी सफाई पर न ही निगम के कर्मचारी और न ही पार्षद का ध्यान है. वार्ड नंबर 27 के पार्षद अंकेश राज अपने कार्यालय के समीप एक मॉडल टॉयलेट बनाये हुए हैं. इसकी स्थिति नारकीय है. हर तरफ गंदगी फैली है. टॉयलेट साफ करवाना पार्षद भी जरूरी नहीं समझते.

दो फेज में बनाया गया 67 मॉडल टॉयलेट

बता दें कि मॉडल टॉयलेट बनाने के लिए को दर्जनों बड़े फार्म इच्छुक थे. लेकिन काम मिला पासा रिसोर्स प्राइवेट लिमिटेड रांची को. निगम से काम मिलने के बाद 2 फेज में 67 मॉडल टॉयलेट बनाया गया. पहली बार में बने 30 टॉयलेट जो 4 सीटर थे. प्रत्येक की लागत 5 लाख रुपये थी. इसके कुछ माह के बाद और 37 टॉयलेट बनाए गये जो 2 सीटर थे. ऐसे प्रत्येक टॉयलेट की लागत 2 लाख 49 हज़ार की थी. हालांकि टॉयलेट का एक करोड़ 8 लाख रुपए का बिल अभी निगम से पास नहीं हुआ है.

क्या कहते हैं चीफ इंजीनियर

चीफ इंजीनियर एसके सिन्हा ने कहा कि निगम का काम टॉयलेट बनाना था, बनवा दिया. अब सिर्फ उसे देखने का काम निगम का नहीं है. अब टॉयलेट गंदा हो या साफ निगम को इससे कोई मतलब नहीं है. जिसे जाना हो तो साफ देखकर टॉयलट जाएं नहीं तो बाहर जाएं.

लोगों को साफ-सफाई का रखना चाहिए ध्यान- नगर आयुक्त

नगर आयुक्त चंद्रमोहन कश्यप ने कहा कि मॉडल टॉयलेट लोगों के लिए निःशुल्क है. इसलिए लोगों की भी अपनी इच्छा होनी चाहिए कि जिस तरह से हम गंदगी करते हैं, उसी तरह इसे भी हमें ही साफ करना है. अभी कुछ ऐसे टॉयलेट हैं, जहां बिजली और पानी पहुंचाया जा रहा है. जो भी लोग शौचालय को तोड़ रहे या फिर किसी प्रकार क्षति पहुंचा रहे हैं ऐसे लोगों पर एफआईआर की जाएगी.

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