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गोड्डा में 63 फीसदी व जामताड़ा में 45 फीसदी बाल विवाह, कैसे हो महिला सशक्तीकरण!

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष

Anwar Hussain

Jamtara: सरकार महिला सशक्तीकरण की बात करती आ रही है. लेकिन समाज मे महिलाओं की स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ है. समाज में बाल विवाह भी महिला सशक्तीकरण पर तमाचा है. राज्य के गोड्डा व जामताड़ा जिले में बाल विवाह काफी फल-फूल रहा है. झारखंड में 38 फीसदी महिलाओं की शादी 18 वर्ष से पहले ही हो चुकी है. ये हम नहीं, नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) की सर्वे में कहा गया है.

सर्वे में झारखण्ड राज्य में प्राथमिक व उच्च कक्षाओं में किशोरियों का विद्यालय छोड़ देना एवं विद्यालय तक पहुंच ना पाना बाल विवाह का प्रमुख कारण माना जा रहा है, जो मुख्य चिंता का विषय है.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के अनुसार, झारखण्ड में 38% विवाहित (20-24 वर्ष की) महिलाओं की शादी 18 साल से पहले हो चुकी थी, जो कि देश के बाल विवाह दर 27% से भी ज़्यादा है.

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राज्य में सर्वाधिक बाल विवाह गोड्डा में, तीसरे स्थान पर जामताड़ा

राज्य में सर्वाधिक बाल विवाह गोड्डा जिले में वा तीसरे नंबर पर जामताड़ा जिला है. सर्वे के अनुसार गोड्डा ज़िले में बाल विवाह की दर 63.5% है,  जो झारखण्ड में सर्वाधिक है व जामताड़ा ज़िले में 43.9% है.

सर्वे के अनुसार जामताड़ा में 45% किशोरों का बाल विवाह हो चुका है. यानी 18 साल से पहले हो चुका है.

गोड्डा ज़िले में महिला साक्षरता दर 44% है व जामताड़ा ज़िले में  52% है. माध्यमिक विद्यालयों में केवल 40% लड़कियां पढ़ रही है. उच्च कक्षाओं में  यह दर और कम होकर सिर्फ 20% ही रह जाती है. विद्यालय से छिजित किशोरियों में बाल विवाह की संख्या ज़्यादा है.

कोविड महामारी  की  वजह से सभी विद्यालय बंद करने पड़े और कुछ बच्चों को काम पर भी जाना पड़ा. इस कारण उनकी सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं और भी बड़ी हो गयी हैं.

गोड्डा व जामताड़ा ज़िलों में बाल विवाह की दर में कमी लाने के लिए के लिए इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन विमेन (आईसीआरडब्ल्यू) इन जिलों में “उमंग” कार्यक्रम के तहत किशोरी सशक्तीकरण और लैंगिक समानता पर काम कर रही है.

“उमंग” कार्यक्रम 10-18 वर्ष की किशोरियों के साथ लिंग परिवर्तनकारी दृष्टिकोण के माध्यम से काम कर रहा है ताकि किशोरियों के जीवन कौशल में सुधार किया जा सके और वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित हो.

मूल उद्देश्य है किशोरियों को सशक्त बनाना ताकि वे उच्च शिक्षा प्राप्त करें और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठा पाएं. आइसीआरडब्लू के साथ बदलाव फाउंडेशन व पापुलेशन कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआइ) उमंग अभियान से जुड़े हैं.

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‘उजाले की ओर बिटिया की दौड़’

बाल विवाह उन्मूलन व महिला सशक्तीकरण के लिए जिले में उजाले की और बिटिया की दौड़ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है.  यह अभियान लगभग 50 तक चलाया जाएगा. यह कार्यक्रम गोड्डा जिले के गोड्डा, महागमा व जामताड़ा जिले के नाला एवं जामताड़ा प्रखंडों में चलेगा.

यह अभियान किशोरियों की शिक्षा प्राप्ति के महत्व व उससे जुड़े उनके जीवन में आने वाले सकारात्मक परिणामों का उल्लेख करेगा और साथ ही बाल विवाह के कुपरिणामों पर भी प्रकाश डालेगा. अभियान के तहत गोड्डा प्रखण्ड में 96 स्थानों व माहागामा प्रखण्ड में 55 स्थानों पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूक करेंगे. वहीं जामताड़ा ज़िले के नाला व जामताड़ा प्रखण्डों में 46 गांव में चलेगा.

क्या कहती हैं आइसीआरडब्लू स्टेट चीफ

आइसीआरडब्लू की चीफ ऑफ झारखंड स्टेट नसरीन जमाल ने कहा कि झारखंड में गोड्डा जिला में सर्वाधिक बाल विवाह होता है. वहीं जामताड़ा जिला का तीसरा स्थान है. दोनों ही जिले में बाल विवाह उन्मूलन के लिए नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जा रहा है. दोनों जिलों में उमंग कार्यक्रम के तहत उजाले की बिटिया की दौड़ नुक्कड़ नाटक शुरू कर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है.

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