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रघुवर सरकार की नीतियों से 60 कंपनियों हो चुकी हैं बंद, कामगार हुए बेरोजगार: जेएमएम

Ranchi : राज्य में बिजली की लचर व्यवस्था और बढ़ रही बेरोजगारी पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने रघुवर सरकार पर जनविरोधी शासन व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया. बिजली नहीं होने पर पार्टी मुख्यालय में मंगलवार को मोमबती जला कर प्रेस कांफ्रेस कर पार्टी प्रवक्ता सुपियो भट्टाचार्य ने कहा कि रघुवर सरकार की नीतियों से बेरोजगारी इतनी बढ़ी है कि लोग आत्महत्या करने को विवश हैं. बीजेपी सरकार में तो वैसे ही युवाओं को रोजगार नहीं मिला है, वहीं आज बिजली की लचर व्यवस्था के कारण कई कंपनियों में उत्पादन ठप है. इससे यहां काम रहे लोग बेरोजगार हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि आयडा (आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण) की 25 यूनिट बंद हो चुकी हैं. टाटा मोटर्स, टाटा हिताची ने अपने 12,000 कर्मियों को बैठाने की तैयारी कर ली है. तो चांडिल डिवाइन एलोय के 2000 कर्मी बेरोजगारी से तंग आकर सड़क पर हैं. रघुवर राज्य की नीतियों का आलम यह है कि कुल 60 कंपनियां आज बंद हो चुकी हैं. जिनमें करीब 40,000 से ऊपर कर्मी काम करते थे. उनके बेरोजगार होने से उनपर आश्रित लोग दाने-दाने को मोहताज हैं.

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बेरोजगारी, गरीबी जैसी हालत के लिए रघुवर सरकार जिम्मेवार

कंपनियों के बंद होने के कारणों की बात करते हुए जेएमएम प्रवक्ता ने कहा कि इसके लिए व्यावसायिक क्षेत्र में बिजली की बढ़ती बेहताशा दर वृद्धि है. सरकार ने एक साथ 38 % बिजली की दर को जैसे ही बढ़ाया, कंपनियों को इसका प्रभाव झेलना पड़ा. नतीजा यह हुआ कि कंपनी को उत्पादन ठप करना पड़ा. जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो गये. कंपनी के मालिक कर्ज में डूब गये. ऐसा होने के बाद भी डबल इंजन की सरकार की तारीफ करने से रघुवर सरकार पीछे नहीं है. उन्होंने कहा कि आज राज्य में बेरोजगारी, गरीबी जैसी हालत बनी है, उसके लिए रघुवर सरकार ही पूरी तरह से जिम्मेवार है.

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राज्य को कारपोरेट के हाथों में बेचने की तैयारी में सरकार

मोमेंटम झारखंड की बात करते हुए जेएमएम नेता ने कहा कि इसके नाम पर सरकार ने करोड़ों रुपये तो उड़ा दिये, लेकिन इससे राज्य में एक भी नयी औद्योगिक इकाईयों की स्थापना नहीं की जा सकी. हालत तो यह बनी कि सिंहभूम और सरायकेला-खरसांवा के इलाके में जो इस्पात के कारखाने लगे थे, एक-एक कर सभी बंद हो गये. इसका परिणाम हुआ कि लाखों लोग विस्थापित हुए. अब सरकार एक सोची-समझी राजनीति के तहत बंद हो चुकी कंपनियों की जमीन को सरकार औऩे-पौने दामों में बेचने की तैयारी में है. दरअसल सरकार की मंशा पूरे राज्य को कारपोरेट के हाथों में बेचने की है.

दो दिन की बारिश ने खोली सरकार के स्वच्छता के दावे

इस दौरान सुप्रियो भट्टाचार्य ने स्वच्छता को लेकर भी सरकार को घेरा. कहा कि आज मोदी सरकार में राजधानी को स्वच्छता के अवार्ड से नवाजा गया है. लेकिन पिछले दो दिनों की बारिश ने सरकार के इस दावे की पोल खोल दी है. राजधानी के सभी नाला सड़क पर बह रही है. युवाओं को दिये रोजगार और स्वच्छता के झूठे दावे पर जनता के बीच काफी नाराजगी है. विधानसभा चुनाव में पार्टी इन मुद्दों को लेकर जनता के पास जायेगी और रघुवर सरकार के झूठ को जनता को बतायेगी.

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