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उच्चतम न्यायालय में 58,669 मामले और विभिन्न उच्च न्यायालयों में 43.55 लाख मामले लंबित

राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी के प्रश्न पर विधि एवं न्याय मंत्री ने दिया जवाब

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New Delhi/Ranchi : वर्तमान में उच्चतम न्यायालय में कुल 58,669 मामले लंबित हैं, जबकि विभिन्न उच्च न्यायालयों में कुल 43.55 लाख मामले लंबित हैं. उच्च न्यायालयों में लंबित मामलो में 8.35 लाख मामले 10 या उससे अधिक वर्षों से लंबित हैं. वहीं करीब 8.44 लाख मामले 5 से 10 वर्षों से लंबित हैं. 26.76 लाख मामले 5 वर्षों से कम अवधि से लंबित हैं.  केन्द्रीय विधि एवं न्याय मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने यह जानकारी राज्य सभा में सांसद परिमल नाथवाणी द्वारा पूछे गये प्रश्न के उत्तर में दी. सांसद नाथवाणी देश के उच्चतम और उच्च न्यायालयों में कितने मामले लंबित हैं और वह कितने वर्षों से लंबित हैं, इसकी जानकारी लेना चाहते थे.

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कुल 43.55 लाख मामले हैं उच्च न्यायालयों में लंबित

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 24 जून तक विभिन्न उच्च न्यायालयों में कुल 43.55 लाख मामले लंबित हैं. इनमें 18.75 लाख दीवानी, 12.15 लाख दांडिक और 12.65 रिट पिटीशन के मामले हैं. इसके अतिरिक्त अप्रैल 2015 में आयोजित मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन में पारित संकल्प के तहत उच्च न्यायालयों में 5 वर्ष से अधिक मामलों के निपटारे के लिए समिति गठित की गयी थी. वर्तमान में पूरे देश में ऐसे 581 त्वरित निपटान न्यायालय कार्यरत काम कर रहे हैं. वहीं निर्वाचित सांसदों व विधान सभा सदस्यों के अपराधिक मामले के निपटारे के लिए 11 राज्यों में 12 विशेष न्यायालय गठित किये गये हैं.

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लंबित मामलों के चरणबद्ध समापन के लिए की गयी कई पहल

रवि शंकर प्रसाद ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा स्थापित ‘राष्ट्रीय न्याय परिदान और विधिक सुधार’ (नेशनल मिशन फॉर जस्टिस डिलिवरी एंड लीगल रिफॉम्र्स) से लंबित मामलों के चरणबद्ध समापन के लिए कई पहल की गयी है. उसमें न्यायालयों के लिए अवसंरचना में सुधार करना,  बेहतर न्याय परिदान के लिए सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आइसीटी) का लाभ उठाना तथा उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों के रिक्त पदों को भरना भी है.

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जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के लिए कुल 6,986.50 करोड़ जारी

उन्होंने कहा कि जिला और अधीनस्थ न्यायालयों के न्यायिक अधिकारियों के लिए अवसंरचना में सुधार के लिए अब तक कुल 6,986.50 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं. इससे पिछले 5 वर्षों में न्यायालय हालों की संख्या 15,818 बढ़ाकर 19,101 हो गयी है. वही आवासीय इकाइयों की संख्या 10,211 से बढ़ाकर 16,777 हुई है. इसके अतिरिक्त, 2,879 न्यायालय और 1,886 आवासीय ईकाइयां निर्माणाधीन हैं. साथ ही देश में ज़िला और अधीनस्थ न्यायालयों को समर्थ बनाने हेतु सूचना और संसूचना प्रौद्योगिकी के लिए ई-न्यायालय मिशन मोड़ परियोजना लागू कर रही है. कम्प्यूटरीकृत ज़िला और अधीनस्थ न्यायालयों की संख्या में जो कि वर्ष 2014 से आज तक 3,173 प्रतिशत बढ़कर 16,845 हो गयी है.

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