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58 लाख परिवारों को राशन दुकानों से मिलेगा आयरन युक्त फोर्टिफाईड चावल

कुपोषण से निपटने के लिए सरकार ने उठाया कदम

Ranchi: सूबे में कुपोषण से निपटने के लिए पीडीएस दुकानों से साधारण चावल की जगह फोर्टिफाईड चावल देने की तैयारी की जा रही है. इसके तहत सूबे के करीब 58 लाख परिवारों को इसका लाभ मिल सकेगा. खाद्य-आपूर्ति विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इसके अनुमोदन के लिए विभागीय मंत्री रामेश्वर उरांव के पास भेजा गया है.

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पूर्वी सिंहभूम के धालभूमगढ़ और चाकुलिया शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

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फिलहाल इस योजना की शुरुआत पायलट प्रोजेक्ट के तहत जमशेदपुर के दो प्रखंडों से होगी. इन प्रखंडों में धालभूमगढ़ और चाकुलिया शामिल हैं. सरकारी सर्वे के अनुसार इन दोनों जगहों पर सबसे अधिक कुपोषित है, बच्चों से लेकर बड़े तक में कुपोषण का दंश झेल रहे हैं.
विभागीय पदाधिकारी बताते हैं कि इन प्रखंडों के पीडीएस दुकानों से लोगों को फोर्टिफाईडल चावल दिया जाएगा जिससे लोगों को आयरन के साथ-साथ अन्य विटामिन भी मिल सके. मुख्य रूप से पोषक तत्व को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है जिससे लोगों की डायट में आयरन की कमी पूरी हो सके. खासकर के महिलाओं में खून की कमी को दूर किया जा सके.

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स्कूलों के एमडीएम में भी मिलेगा फोर्टिफाईड चावल

स्कूलों में चलने वाले एमडीएम में भी फोर्टिफाईड चावल दिया जाएगा. येाजना के तहत आम लोगों के अलावा स्कूलों में भी आठवीं कक्षा तक के बच्चों को फोर्टिफाईड चावल दिया जाएगा. इससे बच्चों को एनेमिक होने से बचाने का उद्देश्य है. अभी स्कूलों में पढ़ रही लड़कियों को आयरन की गोली दी जाती है, लेकिन यह चावल भोजन में दिए जाने के बाद उन्हें दोहरा लाभ मिल सकेगा.

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मालूम हो कि राज्य में 65 प्रतिशत से अधिक महिलाएं एनेमिक है जिसे कम करने के लिए सरकार कई स्तर से अभियान भी चलाती है. सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क आयरन की गोली महिलाओं को दी जाती है और बीच-बीच में कई जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित की जाती है जिसमें एनेमिया से लड़ने के उपाए भी बताए जाते हैं.

पहले रामगढ़ जिले से शुरू करनी थी योजना

फोर्टिफाईड चावल देने की योजना पहले रामगढ़ जिले से की जानी थी. लेकिन वहां से अधिक कुपोषण जमशेदपुर इलाके में पाया गया. साथ ही रामगढ़ में बड़ी आबादी को चावल उपलब्ध कराने के लिए उस इलाके में मिलर की भी संख्या कम थी जिस कारण इस योजना को पूरा होने में समय लग सकता था.

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