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JHARKHAND के 57 लाख परिवारों को मुफ्त में मिलेगी मफतलाल ब्रांड की धोती-साड़ी

सोबरन धोती-साड़ी योजना(Sobran Dhoti-Sari Scheme) के तहत मिल रहा है लाभ

Anuj Tiwary

Ranchi: राज्य के 57 लाख परिवार अब मफतलाल ब्रांड की धोती-साड़ी पहनेंगे. इसके लिए इन्हें लंबा इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा. इन परिवारों को अगस्त तक धोती-साड़ी मिल जाये, विभाग इसकी तैयारी कर रहा है. परिवारों को सोबरन धोती-साड़ी योजना(Sobran Dhoti-Sari Scheme) के तहत लाभ दिया जा रहा है.

खाद्य-आपूर्ति विभाग ने इस संबंध में जनवरी माह में ही धोती-साड़ी व लुंगी के लिए टेंडर निकाला था, जिसमें 70 दशक के नामी बड़ी कंपनी मफतलाल को इसका ठेका दिया गया है. इस योजना के लिए 200 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है.

इन राशन कार्डधारियों को दिए जाने वाले कपड़े में झारखंड सरकार का लोगो लगा होगा. जिसमें यह भी लिखा होगा कि यह धोती-साड़ी योजना के तहत दी गई है और इसकी बिक्री नहीं की जा सकेगी. इस बार गरीबों को दिए जाने वाले कपड़े का रंग भिन्न होगा. जबकि धोती और लुंगी 60:40 के अनुपात में बांटे जाएंगे.

विभागीय सचिव अरूण सिंह ने बताया कि जिन भी कंपनी को ठेका मिला है उसे जल्द से जल्द योजना का लाभ गरीबों तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है. मालूम हो कि मफतलाल पुरानी बड़ी टेक्सटाईल कंपनियों में से एक है.

जो अपने कपड़े की क्वालिटी के लिए पहचाना जाता है. लेकिन अब एक बार फिर से इस कंपनी के अच्छे क्वालिटी वाले धोती-साड़ी लोगों को मिलने की उम्मीद है.

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एक परिवार को 20 रुपए देने होंगे, साल में दो बार मिलेगा लाभ

एक राशनकार्ड पर एक जोड़ी कपड़े दिए जाएंगे. इसमें एक साड़ी और एक धोती या लुंगी शामिल होगा. एक परिवार को यह कपड़े लेने के लिए 20 रुपए देने होंगे. 10 रुपए साड़ी के लिए और 10 रुपए धोती या लुंगी के लिए.

कार्ड में जो प्रधान सदस्य होंगे उन्हें इसका लाभ मिलेगा और इसके साथ एक सदस्य और होगा. कुल मिलकार दो सदस्यों को इसका लाभ दिया जाएगा. साल में दो बार एक कार्ड पर योजना का लाभ मिलेगा. छह-छह माह में दो बार लाभ दिया जाएगा.

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2014 में भी शुरू की गई थी योजना

धोती-साड़ी योजना 2014 में हेमंत सोरेन की सरकार में शामिल किया गया था, जिसे पिछली सरकार में तत्कालीन खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने भी चलाने की घोषणा की थी. लेकिन यह शुरू नहीं किया जा सका और चुनाव आ गया.

पिछली हेमंत सोरेन की सरकार ने इस योजना को शुरू किया था जिसमें लाभुकों को धोती साड़ी दिया गया था. लेकिन इसमें भी कई तकनीकी समस्याओं के कारण हर लाभुक को इसका लाभ नहीं मिल सका था. रघुवर सरकार के आने के ठीक बाद इस योजना को ही बंद कर दिया गया था.

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